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लक्ष्मी जी आ रही हैं!

Wed, 12 Dec 2012 10:17 PM IST
सहीराम
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दिवाली बेशक जा चुकी है, पर लक्ष्मी जी आ रही हैं। जी नहीं, ऐसा नहीं है कि देश में भ्रूण हत्याएं बंद हो गई हैं। बल्कि अब तो वह साक्षात आ रही हैं। सेठों और अमीरों के यहां तो वह अक्सर आती रहती हैं, अब गरीबों के यहां भी आ रही हैं। सरकार ने झाड़-बुहारकर गरीब की झोंपड़ी तक उसके लिए रास्ता साफ कर दिया है। सरकार ने तय कर लिया है कि वह गरीबों को राशन, किरासन आदि के रूप में सब्सिडी नहीं देगी, बल्कि उसके बदले नकदी देगी।
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अब यह कहा जा सकेगा कि सिर्फ वोट के लिए नहीं, सब्सिडी के लिए भी नोट दिए जाते हैं। सरकार पर अक्सर यह आरोप लगता है कि वह अमीरों को और अमीर बनाती है। अब वह गरीबों को भी अमीर बनाएगी। गरीब को तनख्वाह के रूप में तो कभी पैसा मिलता नहीं। और साहब, मजदूरी के रूप में भी उसे कब पैसा मिलता है? पर अब सरकार उसे पैसा देगी, सब्सिडी के रूप में।  

बस यही बात जलकुकड़ों को सहन नहीं हो रही। वे कह रहे हैं कि यह तो घूस है। सरकार गरीबों का वोट लेने के लिए उन्हें सब्सिडी नकदी के रूप में दे रही है। जब नेता और अफसर घूस लेते हैं, तो उन्हें परेशानी नहीं होती। लेकिन गरीब की जेब में पैसा आने से उन्हें परेशानी हो रही है। जब वोट के लिए गरीब के घर बोतल पहुंचाया जाता है, तब उन्हें परेशानी नहीं होती। पर गरीब को पैसा मिलता है, तो उन्हें परेशानी होती है।
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सो इसे रुकवाने के लिए वे जी-तोड़ कोशिश कर रहे हैं। वे अदालत तक जा पहुंचे हैं। जलकुकड़े वही नहीं हैं, जो इसे चुनावी वोट बैंक के रूप में देख रहे हैं। बल्कि वे भी है, जो कह रहे हैं कि उन्हें गरीब और उसके परिवार की चिंता है। वे कह रहे हैं कि राशन के बदले नकदी मिलेगी, तो क्या पता, बंदा दारू में ही सब उड़ा दे। परिवार तो भूखों मर जाएगा न।

पर जी ठेकेवाले बड़े खुश हैं। वे उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब सरकार गरीब की जेब में पैसे डालेगी, और वह इतराता हुआ उनके पास आएगा। सुना है, सूदखोर भी बड़े खुश हैं कि देखते हैं कि अब कैसे बचेगा? जिस दिन पैसा मिलेगा, उसी दिन सब वसूल लूंगा। खुश तो सुना है, योजना आयोग भी है, जिसकी योजना सफल हो रही है। और सरकार तो खुश है ही कि अब उस पर यह आरोप नहीं लगेगा वह सिर्फ अमीरों की तिजोरी भरती है। अब वह कह सकती है कि वह गरीबों की जेब भी भरती है, पेट भले खाली रह जाए।
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