मेरे द्वारा निर्मित शब्दों का घर
टूट जाएगा रूदन से
मेरे मरने के बाद
वैसे अचंभित होने जैसा
कुछ भी नहीं है इसमें
पुछ जाऊंगा घर के आईने से
दीवारों पर नहीं होंगे मेरे चित्र
वैसे दीवार अच्छी नहीं लगी
कभी मुझे
अब आकाश ही मेरी दीवार होगा
जिस पर चिमनियों के धुएं से
पंछी मेरा नाम लिखेंगे
आकाश ही मेरे लिखने का
टेबुल होगा अब
ठंडा पेपरवेट होगा चांद
काले मखमली कुशन में
तारे टिमटिमाएंगे
मुझे याद कर के
दुखी होने की
जरूरत नहीं है तुम्हें
इन बातों को लिखते हुए
मेरे हाथ नहीं कांप रहे
पर जब पहली बार
थामा था तुम्हारे हाथों को
कुछ आवेग और कुछ झिझक में
मेरे हाथ जरूर कांपे थे
मेरी सुन्दर पत्नी मेरी प्रेयसी
मेरी यादें तुम्हें घेरे रहेंगी
जरूरी नहीं है जकड़ी रहो
तुम भी उनमें
गढ़ना अपना जीवन खुद
मेरी यादें होंगी तुम्हारा साथी
तुम करो यदि प्रेम किसी से
दे देना इन सारी यादों को उसे
कॉमरेड बना लेना उसे अपना
हां, मैं जरूर सब कुछ
तुम पर छोड़े जा रहा हूं
मेरा विश्वास है कि गलतियां नहीं करोगी तुम
तुम मेरे बेटे को
अक्षरज्ञान के समय
मनुष्य धूप और तारों से
प्रेम करना सिखाना
वह मुश्किल से मुश्किल गणित सुलझा पाएगा तब
क्रांति का एलजेब्रा भी
वह मुझसे बेहतर समझेगा
चलना सिखाएगा मुझे जुलूसों में
पथरीली जमीन पर और घास पर
हां! मेरी कमियों के बारे में भी
बताना उसे
पर ध्यान रहे
वह मुझसे नफरत न करे
कोई बड़ी बात नहीं है मेरा मरना
जानता था
बहुत दिनों तक
जिंदा रहने वाला नहीं हूं मैं
पर समस्त तरह के मृत्यु का अतिक्रमण कर
हर तरह के अन्धकार को
अस्वीकार कर
मेरा विश्वास कभी नहीं डिगा
क्रांति हमेशा दीर्घायु हुई है
क्रांति हमेशा चिरजीवी हुई है
बांग्ला से अनुवाद- राजीव कुमार
(अभिनेता बिजन भट्टाचार्य एवं मशहूर लेखिका महाश्वेता देवी के इकलौते बेटे नवारुण भट्टाचार्य ने वैसे तो साहित्य की हर विधा में काम किया, लेकिन उनका नॉवेल `हर्बर्ट’ काफी चर्चित हुआ। कुछ दिन पहले 66 वर्ष की उम्र में कोलकाता में उनका निधन हो गया।)