केतन अग्रवाल हर मायने में एक आदर्श बेटे और करोड़ों रुपये के पारिवारिक कारोबार के उत्तराधिकारी थे। विदेश से पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह हाल ही में भारत लौटे थे और परिवार के बिजनेस की जिम्मेदारी संभाल चुके थे। 26 साल की उम्र में, उनके परिवार ने तय किया कि उनकी जिंदगी के अगले कदम, यानी शादी के लिए यह सही समय है। इसके लिए उन्हें अधिक तलाश भी नहीं करनी पड़ी। लड़की पुणे की रहने वाली थी और उसका परिवार भी परिचितों में ही था। उस समय यह सब बहुत अच्छा और किस्मत का खेल लगा होगा। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। जब तक कि एक सनसनीखेज हत्या सामने नहीं आई थी।
केतन अग्रवाल की मौत पूरे देश में चर्चा का विषय सिर्फ इसलिए नहीं बनी कि यह एक नौजवान की हैरतअंगेज मौत का मामला है, बल्कि इसलिए कि इसने लोगों की धारणाओं को तोड़ा है। पहली धारणा यह कि पैसा किसी परिवार को दुख और त्रासदी से बचा सकता है और दूसरी यह कि एक भव्य और आलीशान भारतीय शादी अपने आप में प्यार, भरोसे और भावनात्मक रूप से मजबूत रिश्ते की गारंटी होती है। वैसे भी भारतीय शादियां अब निजी समारोह के बजाय एक सार्वजनिक प्रदर्शन और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक अधिक बन चुकी हैं।
दरअसल, जब शादी वेन्यू की बुकिंग और मेहमानों की लिस्ट बनाने के चरण तक पहुंचती है, तब तक परिवार न सिर्फ पैसा, बल्कि अपनी भावनाएं, प्रतिष्ठा और सामाजिक हैसियत भी उसमें दांव पर लगा चुके होते हैं। इसी वजह से शादी को अक्सर ऐसा फैसला माना जाता है, जिसे बदला नहीं जा सकता। यह दबाव संपन्न परिवारों में कहीं अधिक होता है। एक बार जब तैयारियों का सिलसिला शुरू होता है, तो पूरे आयोजन की अपनी एक रफ्तार बन जाती है।
इस मामले में भी माता-पिता शादी की औपचारिक घोषणा कर चुके थे। रिश्तेदारों ने अपने टिकट बुक करा लिए थे। निमंत्रण-पत्रों पर चर्चा हो रही थी और दिनभर चलने वाले समारोहों के लिए कपड़ों की तैयारी उसी तरह से की जा रही थी, जैसे फिल्मों में कॉस्ट्यूम डिजाइनर करते हैं। हर तरफ उत्साह था। कई तरह की गणनाएं चल रही थीं, लेकिन पूरे देश का ध्यान खींचा साजिशों के तले पनप रही हत्या की गणित ने।
टीवी, सोशल मीडिया इत्यादि को देखकर अमूमन यह माना जाता है कि एक खतरनाक व्यक्ति खतरनाक ही दिखता है। लेकिन, सोशल मीडिया पर अपनी परीकथा जैसी जिंदगी दिखाने वाली, मुस्कुराती और खुश नजर आने वाली 20 वर्षीय लड़की को देखकर शायद ही कोई उसे खतरनाक मानता। केतन और सिया के वीडियो में, दर्शक एक ऐसी युवा महिला को देखते हैं, जो प्यार में डूबी हुई है। वह खुशी से झूमती है, शर्माती है और अपने होने वाले दूल्हे के प्यार में खोई हुई लगती है। जबकि, इन सबके बीच, सिया अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर अपने मंगेतर की हत्या की योजना बना रही थी।
यह एक ऐसा धोखा था, जिसने पूरे देश को चौंका दिया है। एक तरफ सबके सामने सपनों जैसी जिंदगी का दिखावा करना और असल में मन ही मन किसी की हत्या करने के ख्यालों में डूबे रहना-20 वर्ष की होने वाली दुल्हन के रूप में सामने आई सिया की कहानी इन्हीं दो पहलुओं के इर्द-गिर्द घूमती है। सिया की हरकतों से ऐसी सनकी मानसिकता (सोशियोपैथी) झलकती है, जो आमतौर पर खूंखार अपराधियों में देखी जाती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि केतन की मौत के बाद भी उसके व्यवहार में न तो किसी तरह का पछतावा दिखाई दिया और न ही दुख का एहसास। उल्टा, उसने सामान्य दिखने का नाटक किया। यही बात इस पूरे मामले को और भी बेचैन करने वाली बना देती है।
यह मामला बच्चों को मिल रही सुख-सुविधाओं को लेकर भी कुछ असहज सवाल खड़े करता है। अमीर परिवारों के पास अक्सर ऐसी जिंदगी बनाने के साधन होते हैं, जो बेहद आरामदायक हों। लेकिन, पैसा किसी को भावनात्मक मजबूती, झगड़ों को सुलझाने की समझ या मुश्किल फैसले लेने का साहस नहीं सिखा सकता। ऐसे मामलों से यह भी पता चलता है कि ऐसी पीढ़ी, जिसे एक परफेक्ट जिंदगी जीने के लिए तैयार किया गया है, कमियों, नाकाम रिश्तों, अस्वीकार किए जाने, माता-पिता की नाराजगी और सामाजिक शर्मिंदगी का सामना करने में किस तरह जूझती दिखती है?
ये सवाल केवल एक परिवार या एक शहर तक सीमित नहीं हैं। दरअसल, ये आज के तेजी से बदलते शहरी भारत से जुड़े अहम सवाल हैं। हर भारतीय परिवार बच्चों को शादी के बारे में तो सिखाता है, लेकिन बहुत कम परिवार ही उन्हें यह सिखाते हैं कि अगर रिश्ता सही न लगे, तो सहजता से उससे पीछे कैसे हटें। हम वादों को तो अच्छा मानते हैं, पर किसी गलत फैसले से समय रहते पीछे हटने को कमजोरी या शर्म की तरह देखते हैं। जहां हम समारोहों पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, वहीं भावनात्मक समझ पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते।
इस मामले से मिलने वाला सबक शायद अपराध से कम और एक साधारण वाक्य न कह पाने की अक्षमता से ज्यादा जुड़ा है और वह वाक्य है-‘मैं यह शादी नहीं करना चाहती।’ बेशक, यह कहना आसान नहीं होता। इससे किसी का दिल टूट सकता है, परिवारों को शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है और भारी आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। लेकिन, यह दर्द उस झूठ और धोखे पर टिके रिश्ते की तुलना में तो कम ही है, जो अंततः सब कुछ बर्बाद कर दे।
शायद केतन अग्रवाल मामले की सबसे बड़ी सीख यही है कि यह सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि उस शादी के तमाशे की कहानी है, जो कभी शुरू ही नहीं होनी चाहिए थी।
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