अरविंद केजरीवाल राजनीति में ‘गंदगी’ साफ करने आए थे। वह सफाई का मसीहा बनकर आए थे। पहली बार जब वह दिल्ली के मुख्यमंत्री बने, तो जल्दी भाग गए, लेकिन दूसरी बार अपनी छवि का प्रचार करने में इतने सफल रहे कि पिछले वर्ष दिल्ली विधानसभा में उन्होंने ऐसी ताकत हासिल की कि तीन छोड़ सारी सीटें आम आदमी पार्टी की झोली में गईं। इस शानदार जीत के बावजूद शुरू से उनकी नीयत पर संदेह होने लगा। पहले तो इसलिए कि उन्होंने अपनी पार्टी से ऐसे पुराने साथियों को बेदखल किया, जो अन्ना हजारे के आंदोलन के समय से उनके साथ कदम मिलाकर चल रहे थे। आप इस आंदोलन से ही पैदा हुई थी और पैदा होते ही अन्ना का साथ छूट गया, क्योंकि वह अपने आंदोलन को राजनीतिक दल में तब्दील होने देने के खिलाफ थे। केजरीवाल ने इस आधार पर पार्टी बनाई कि राजनीति से बाहर रहकर राजनीति में व्याप्त गंदगी साफ करना असंभव है।
पिछले सप्ताह कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की एक रिपोर्ट में दिल्ली के मुख्यमंत्री पर यह आरोप लगाया गया है कि गंदगी साफ करने के बदले उन्होंने साबित करके दिखाया है कि जनता के पैसों से वह अपना और अपनी पार्टी का प्रचार करने में कितने चतुर निकले। रिपोर्ट के मुताबिक, आप सरकार के प्रचार में 33.4 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जिसका 85 फीसदी हिस्सा दिल्ली से बाहर प्रचार करने में लगा। ऊपर से इस प्रचार में आप का झाड़ू हर जगह दिखा।
इस रिपोर्ट में यह आरोप भी है कि 526 करोड़ रुपयों में से 100 करोड़ रुपये का हिसाब दिल्ली सरकार नहीं दे पाई है। कैग के मुताबिक, केजरीवाल के कई दावे भी झूठे साबित हुए हैं। मसलन, दिल्ली सरकार का दावा था और आप के इश्तहारों में भी इसका प्रचार था कि तीन पुल समय से पहले बन चुके हैं और इन पर खर्च भी 350 करोड़ रुपये से कम आया है। कैग के अनुसार, इन पुलों पर काम अभी चल रहा है। उसने आप के इस दावे को भी झूठा माना है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र 20 लाख रुपयों में बने हैं। रिपोर्ट यह भी कहती है कि दिल्ली सरकार ने 70 लाख रुपये केंद्र सरकार को बदनाम करने में भी लगाए। ये गंभीर आरोप हैं, पर शायद केजरीवाल की छवि पर इनका कोई असर नहीं होगा, क्योंकि वह दूसरों को बदनाम करने और अपना प्रचार करने की कला में माहिर हैं। पंजाब से सूचनाएं हैं कि चुनावी दौड़ में आप सबसे आगे है, क्योंकि अकाली दल के लौटने की उम्मीद कम है। अकाली दल के साथ भाजपा भी डूबेगी।
हाल में मुझसे पंजाब के कुछ लोग मिले थे, जिन्होंने बताया कि आप को मौका देने के लिए पंजाब के मतदाता इसलिए तैयार हैं, क्योंकि उन्हें कोई विकल्प ही नहीं दिख रहा। मैंने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने कुछ खास करके नहीं दिखाया है, लेकिन आप का प्रचार इतना सफल रहा है कि उन्हें मेरी बातों पर यकीन ही नहीं आया। उन्होंने वे सारी उपलब्धियां गिनवाईं, जो उन्होंने दिल्ली सरकार के इश्तहारों में देखी हैं। क्या हर मोहल्ले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हुई हैं? क्या दिल्ली के स्कूल अच्छे नहीं हुए हैं? क्या विकास के कार्यों में तेजी नहीं आई है? यथार्थ सामने रखने की मैंने बहुत कोशिश की, पर हार मान गई। सो जो राजनीति से गंदगी हटाने आए थे, वे अपनी खामियां छिपाने लग गए हैं। यह भी एक किस्म की उपलब्धि है, पर ऐसी उपलब्धियों से देश को भगवान बचाए।