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निवेश: बाजार तो ऐसे ही चलता है, इसलिए जरूरी है दीर्घकालीन दृष्टिकोण

नारायण कृष्णमूर्ति
Updated Wed, 12 Jun 2024 07:04 AM IST

सार

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण यह है कि वे बाजार के दीर्घकालीन दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर निवेश करना जारी रखें। अल्पावधि में उतार-चढ़ाव तो होंगे, लेकिन ये सभी निवेश का हिस्सा हैं। शेयर बाजार न केवल चार जून की गिरावट से उबर गया है, बल्कि यह तीन जून के उच्चतम स्तर को भी पार कर गया है।
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शेयर मार्केट - फोटो : Agency


शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के कई कारक होते हैं, जिनमें स्थानीय एवं वैश्विक समाचार से लेकर राजनीतिक नतीजे, व्यापार चक्र और डर इत्यादि शामिल रहते हैं। फिर भी कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनके कारण शेयर बाजार चरम स्थिति में पहुंच जाता है। विगत चार जून को जब लोकसभा चुनाव के परिणाम आने शुरू हुए थे, तब जिस तरह की चरम स्थितियां देखी गई थीं, वैसी घटना हाल के समय में वर्ष 2021 में कोविड लॉकडाउन की घोषणा के समय देखी गई थी। उस दिन यानी चार जून को, एस ऐंड पी बीएसई सेंसेक्स में 4,000 से अधिक अंकों और लगभग छह फीसदी की भारी गिरावट देखी गई, जो अभूतपूर्व थी। ऐसा लग रहा था, मानो घरेलू और विदेशी, दोनों निवेशक भारतीय बाजारों से बाहर निकलना चाहते थे।


चुनाव परिणाम के दिन भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट पर बात करने से पहले हमें विगत 19 मई की ओर लौटना चाहिए, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक टेलीविजन चैनल से बात करते हुए कहा था कि चार जून को शेयर बाजार रिकॉर्ड तोड़ देगा। ऐसा नहीं है कि सिर्फ उन्होंने ही ऐसा कहा था, बल्कि लोकसभा चुनाव के विभिन्न चरणों के दौरान उनके मंत्रिमंडल के कई प्रमुख सदस्यों ने इस तरह की टिप्पणी की थी। सत्तारूढ़ पार्टी के इस आत्मविश्वास को निवेशकों ने बाजार में निवेश करने के संकेत के रूप में समझा। नतीजतन मई के अधिकांश दिनों में, चुनावों के अंतिम चरण तक बीएसई सेंसेक्स ज्यादातर दिनों में बढ़ता ही रहा।


इसे इस बात का संकेत माना गया कि बाजार सरकार की वापसी और उसकी नीतियों की निरंतरता में यकीन रखती है। बाजार के लिए जनता के मूड से संकेत लेना और भी दिलचस्प हो गया, क्योंकि एक जून को आए एग्जिट पोल में भाजपा की स्पष्ट और बड़ी जीत की भविष्यवाणी की गई थी। स्वाभाविक रूप से तीन जून को जब बाजार खुले, तो बाजार में भारी खरीदारी देखी गई। एग्जिट पोल के नतीजों के बाद सेंसेक्स में 2,600 अंकों की बढ़ोतरी देखी गई।


दरअसल, तीन जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 6,851 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने, जिनमें बैंक, बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड और अन्य भारतीय संस्थान शामिल हैं, 1,914 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। हालांकि अगले ही दिन जब मतगणना शुरू हुई, तो चीजें उम्मीद के मुताबिक नहीं हुईं, खासकर शुरुआती रुझानों में। सरकार गठन को लेकर निवेशकों की चिंता के कारण शेयर बाजार के सेंसेक्स में दिन भर उतार-चढ़ाव देखा गया और यह 4,300 अंक से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ। विदेशी निवेशकों ने करीब 1.5 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेचे, जबकि घरेलू निवेशकों ने भी 3,300 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की।


बहुत से ऐसे सट्टेबाज थे, जिन्होंने सिर्फ ट्रेंड्स और सुनी गई खबरों के आधार पर ही बाजार में अपना पैसा लगाया था। यह भी संभव है कि इनमें कुछ नए निवेशक भी हों, जो बाजार के जोखिमों को नहीं समझते हों और सिर्फ अटकलों पर ही भरोसा करते हों। उन्होंने भी पैसे गंवाए, क्योंकि उन्होंने बाजार में गिरावट शुरू होते ही डर के मारे अपने पैसे निकाल लिए। अब एक ही दिन में 30 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा बताया जा रहा है। यह जरूरी नहीं कि इनमें से सारा पैसा निवेशकों का ही हो, क्योंकि नुकसान उठाने वालों में कई व्यापारी भी थे, जो बाजार के खिलाफ दांव लगाकर पैसे बनाने के लिए जाने जाते हैं।


अन्य चर्चाओं के विपरीत, शेयर बाजार हर दिन को अलग-अलग तरह से देखता है, लेकिन यह भविष्य की संभावनाओं पर भी निगाहें रखता है। इसलिए बाजार की चाल से अवगत होने के कुछ ही दिनों के भीतर सेंसेक्स न केवल चार जून की गिरावट से उबर गया है, बल्कि यह तीन जून के उच्चतम स्तर को भी पार कर गया है। असल में इसने 10 जून को एक नई ऊंचाई को छुआ और उम्मीद है कि भविष्य में यह और आगे जाएगा। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे बाजार के दीर्घकालीन दृष्टिकोण को ध्यान में रखें और बाजार में निवेश करना जारी रखें। शेयर बाजार में अल्पावधि में उतार-चढ़ाव तो होंगे, लेकिन ये सभी निवेश का हिस्सा हैं।
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एक निवेशक के तौर पर आपको इस बात का पता होना चाहिए कि अल्पावधि में बाजार कैसे काम करता है और दीर्घकाल में यह निवेशकों को कैसे फायदा पहुंचाता है। जिस तरह से गर्मी से बचने की तैयारी के लिए बाहर के तापमान के बारे में जानकारी होनी चाहिए, उसी तरह से निवेश करने वाले व्यक्ति या संस्थाओं के लिए बाजार की चाल से अवगत होना जरूरी है। आपको उन कारकों के बारे में पता होना चाहिए, जो शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही ऐसे निवेशों पर अपना भरोसा बनाए रखकर दांव लगाना चाहिए, जो अस्थायी उतार-चढ़ाव के बावजूद बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

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