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विपक्ष की गैरजिम्मेदारी

तवलीन सिंह Published by: Raman Singh Updated Sun, 10 Mar 2019 07:09 PM IST
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तवलीन सिंह

पाकिस्तान के साथ युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है, लेकिन देश के अंदर हमारे विपक्षी नेता गृहयुद्ध पर विराम लगाने को तैयार नहीं हैं। पाकिस्तान से जवाब मांगने के बदले नरेंद्र मोदी से जवाब मांग रहे हैं। ये कैसे राजनेता हैं, जो देश के हित से ऊपर अपने राजनीतिक हित रखते हैं? क्या यह समय गलत बयान देकर पाकिस्तान का साथ देने का है? क्या यह समय हमारे वीर जवानों का मनोबल कमजोर  करने का है? एक फौजी अफसर की बेटी होने के नाते विपक्ष के राजनेताओं के बयान सुनकर मुझे निजी तौर पर दुख हुआ। ऐसा इसलिए कि मैं जानती हूं कि हमारी सेना और पाकिस्तान की सेना में सबसे बड़ा अंतर यही है कि हम अपने सेनाध्यक्ष के वक्तव्यों पर पूरा विश्वास कर सकते हैं, क्योंकि उनके बयानों में राजनीति की बू तक नहीं है। सो पिछले सप्ताह वायुसेना अध्यक्ष ने जब स्पष्ट किया कि बालाकोट में उनके बम निशाने पर गिरे, तो उनके इस बयान पर हम सबको पूरा विश्वास होना चाहिए।



सो तब बहुत बुरा लगा, जब विपक्ष के वरिष्ठ राजनेताओं ने फिर भी अपने प्रश्नों का सिलसिला एक क्षण के लिए भी बंद नहीं किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने सुबूत मांगा और कांग्रेस अध्यक्ष ने तो मोदी पर एफआईआर दर्ज करने की मांग रखी। राफेल सौदे को लेकर राहुल गांधी के बयान इतने बचकाने रहे हैं कि वह कहते आए हैं कि इस सौदे का आधा हिस्सा यानी तीस हजार करोड़ रुपये प्रधानमंत्री ने ‘चोरी करके’ अनिल अंबानी को दे दिए हैं। क्या वह जानते नहीं हैं कि ऐसा करना संभव ही नहीं है? क्या वह जानते नहीं कि इतनी बड़ी रकम अनिल अंबानी को मिली होती, तो वह कंगाली के कगार पर खड़े नहीं होते? लेकिन राहुल गांधी यह मानकर चल रहे हैं कि किसी झूठ को बार-बार बोला जाए, तो वह सत्य में कभी न कभी परिवर्तित हो जाएगा।


माना कि आने वाले चुनाव में मोदी को हराना उनका मुख्य मकसद है। माना कि यह राजनीति है। लेकिन क्या यह ऐसी राजनीति करने का समय है? मोदी की निजी छवि इतनी साफ है कि इस देश का आम नागरिक मान ही नहीं सकता कि रक्षा सौदे में वह पैसा खा सकते हैं। सो हाल में हुए सर्वेक्षण बताते हैं कि सीमा पार अपने लड़ाकू विमानों की स्ट्राइक के बाद मोदी के चुनाव जीतने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या संकट की इस घड़ी में जब सीमा पर रोज फायरिंग हो रही है, जब पाकिस्तान स्वीकार करने को तैयार ही नहीं है कि जैश-ए-मोहम्मद नाम का जेहादी संगठन उसकी भूमि से भारत पर आतंकवादी हमले कर रहा है, तब क्या इस समय देश के हर राजनेता का कर्तव्य यह नहीं बनता कि वह ऐसे वक्तव्य न दें, जो देश को कमजोर करते हों?


प्रधानमंत्री ने ठीक ही कहा कि विपक्ष के नेताओं को मोदी से इतनी नफरत है कि वह उनको कलंकित करने के प्रयास में देश को कलंकित करने से भी अपने आपको नहीं रोक सकते हैं। इसका परिणाम यह है कि विदेशी मीडिया ने भी भारत की वायुसेना का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया है। जो सवाल हमारे विपक्ष के राजनेता ऊंचे स्वरों में पूछ रहे हैं, अब वही सवाल विदेशी मीडिया में पूछे जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि बालाकोट में हमारे बहादुर वायुसेना के जवानों का निशाना इतना खराब था कि उन्होंने कुछ पेड़-पौधों का नुकसान करने के सिवाय कुछ नहीं किया। सो यह कहना पड़ेगा कि अगर अब भी विपक्ष के राजनेता देश के प्रति अपना दायित्व निभाने के लिए तैयार नहीं हैं, तो उनको चुनाव हारना चाहिए।

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