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आईपीएल नीलामी की पहेली

मनोज चतुर्वेदी Published by: Raman Singh Updated Mon, 24 Dec 2018 07:06 PM IST
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मनोज चतुर्वेदी

दुनिया की सबसे ज्यादा कमाई वाली क्रिकेट लीग में हर साल नीलामी में कुछ ऐसा होता है कि वह सभी को चौंका जाता है। इस लीग की फ्रेंचाइजी टीमें किस आधार पर खिलाड़ियों को खरीदती हैं, यह समझना हमेशा खासा मुश्किल होता है। आमतौर पर टीम की जरूरतों के हिसाब से नीलामी में खरीदारी की जाती है। कई बार असाधारण प्रतिभा वाले खिलाड़ियों को भारी-भरकम रकम पर खरीद लिया जाता है। लेकिन कई बार टीमों के किसी खिलाड़ी विशेष पर बड़ी धनराशि लगाने के सभी कारक नदारद नजर आते हैं। इस तरह की खरीदारी से यह साफ हो जाता है कि आईपीएल में खिलाड़ियों की खरीदारी में तर्क के कोई मायने नहीं हैं। आईपीएल नीलामी का यह अचरज में डालने वाला फैक्टर इस बार भी नजर आया है। इस बार भी वरुण चक्रवर्ती और शिवम दुबे जैसे अनुभवहीन युवा खिलाड़ियों को आईपीएल ने नया करोड़पति बना दिया है। वरुण को किंग्स इलेवन पंजाब ने 8.40 करोड़ रुपये में और शिवम दुबे को रॉयल चैलेंजर्स बंगलूरू ने पांच करोड़ रुपये में खरीदा है। पर ऐसा होना आम है।



खास बात यह है कि इस तरह ऊंची बोली से करोड़ों कमाने वाले ज्यादातर खिलाड़ी बहुत आगे तक नहीं जा पाते हैं। अचरज होता है, जयदेव उनादकट जैसे गेंदबाज को ऊंची कीमत मिलने से। बाएं हाथ के पेस गेंदबाज को राजस्थान रॉयल्स ने 8.40 करोड़ रुपये में खरीदा है और यह खरीद अचरज में डालने वाली जरूर है। इसकी वजह यह है कि वह पिछले साल इसी टीम में शामिल थे और पिछले सीजन में 15 मैचों में सिर्फ 11 विकेट निकालने पर इस टीम ने उसे छोड़ दिया था और फिर नीलामी में खरीद लिया।


पिछले साल इशांत शर्मा को किसी फ्रेंचाइजी के नहीं खरीदने पर कहा गया था कि वह एक तो टी-20 क्रिकेट में खेलते नहीं हैं और उन्होंने अपना बेस प्राइज दो करोड़ रुपये रख दिया था, इसलिए उन्हें किसी ने नहीं खरीदा। खैर इस बार इशांत टी-20 क्रिकेट में खेले बगैर भी खरीद लिए गए हैं।


कई बार नीलामी खरीदे जाने वाले खिलाड़ी तक को हैरान कर देती है। ऐसा ही कुछ रहस्यमयी स्पिनर वरुण चक्रवर्ती के साथ हुआ है। इस युवा गेंदबाज को किंग्स इलेवन पंजाब के 8.40 करोड़ रुपये में खरीदने पर खुद वरुण की प्रतिक्रिया थी, 'सच कहूं तो मैं सोच रहा था कि 20 लाख के बेस प्राइज पर खरीद लिया जाऊंगा पर मुझे जो रकम मिली है, उससे मैं खुद हैरत में हूं।' उन्होंने शुरुआत पेस गेंदबाज ऑलराउंडर के तौर पर की, पर ज्यादा सफलता नहीं मिली। इस बीच 2017 में उनके घुटने में चोट लग गई और उन्होंने अनिल कुंबले के वीडियो देखकर स्पिन गेंदबाज बनने का फैसला कर लिया और यह फैसला कॅरियर को नई दिशा देने वाला साबित हुआ है। वह इस साल विजय हजारे ट्रॉफी में नौ मैचों में 22 विकेट लेकर अपनी क्षमता दिखा चुके हैं। उन्होंने ये सफलताएं अपनी गेंदबाजी में आधा दर्जन से ज्यादा वेरिएशन इस्तेमाल करके हासिल की हैं और नीलामी में इससे ही लॉटरी लगी है।


आईपीएल में इतना जरूर है कि वह जिन युवाओं को प्रतिभाशाली समझकर आगे बढ़ाता है, उनके प्रदर्शन खराब होते ही भुलाने में भी पीछे नहीं रहता है। अब आप पवन नेगी को ही लें। इस खिलाड़ी को 2016 में दिल्ली डेयर डेविल्स ने 8.5 करोड़ रुपये में खरीदकर रातों-रात स्टार बना दिया था। लेकिन आठ मैचों में 57 रन बनाने और एक विकेट लेने पर टीम द्वारा उन्हें डंप कर दिया गया। सौरभ तिवारी और केसी करियप्पा भी ऐसे क्रिकेटर हैं, जिन्हें आईपीएल ने आसमान पर चढ़ाने के बाद जमीन पर पटक दिया। इसलिए आईपीएल में टिकने के लिए भाग्य के साथ प्रदर्शन भी किसी हद तक जरूरी है।

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