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सेना पर तंज नहीं, गर्व कीजिए: सीडीएस के बयान की सियासी हितों से प्रेरित आलोचना गलत; राजनीति के कई अवसर मिलेंगे

शेखर अय्यर, वरिष्ठ पत्रकार। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 06 Jun 2025 06:33 AM IST

सार

अमेरिका और चीन के उलट भारत ने युद्ध में हुए अपने नुकसान की बात कभी नहीं छिपाई है। राजनीतिक हितों से प्रेरित होकर सीडीएस जनरल अनिल चौहान के बयान की आलोचना करना अनुचित है। विपक्ष को राजनीति करने के कई अवसर मिलेंगे, लेकिन सैन्य अभियान पर तंज करना वांछनीय नहीं है।
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सीडीएस जनरल अनिल चौहान। - फोटो : PTI


संघर्ष विराम लागू होने के बाद जनरल चौहान की टिप्पणी पहली बार आधिकारिक स्वीकारोक्ति थी कि ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती चरण में हवा में लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचा। सिंगापुर मीटिंग क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों, चुनौतियों और नीतिगत प्रतिक्रियाओं पर चर्चा करने के लिए एक अंतर-सरकारी सुरक्षा सम्मेलन है। विभिन्न देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने अपने-अपने विचारों और दृष्टिकोणों का स्वतंत्र रूप से और सम्मानपूर्वक आदान-प्रदान किया, तब जनरल चौहान की टिप्पणी को इसी संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। 


हालांकि, जब ब्लूमबर्ग समाचार एजेंसी द्वारा उनसे पूछा गया कि पाकिस्तान का दावा है कि उसने छह भारतीय विमानों को मार गिराया था, तब इस पर सीडीएस चौहान ने स्पष्ट करते हुए कहा कि यह ‘बिल्कुल झूठा और खोखला’ दावा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जरूरी यह नहीं है कि क्या विमान गिरे, परंतु आवश्यक यह है कि ये गिरे ही क्यों? भारत ने भी अपनी ‘रणनीतिक गलतियों’ में तत्काल सुधार किया और पाकिस्तान के भीतरी इलाकों में सटीक हमले पुनः शुरू कर दिए। 


सीडीएस जनरल चौहान की यह टिप्पणी भारत और पाकिस्तान द्वारा एक-दूसरे के विरुद्ध सैन्य हमले बंद करने पर सहमति जताए जाने के ठीक तीन सप्ताह बाद आई। यहां यह स्पष्ट कर देना उचित रहेगा कि वैसे तो युद्धों में विमानों को नुकसान पहुंचना आम बात है। फिर, संघर्ष के दौरान या उसके बाद भारतीय वायुसेना ने कभी भी किसी विमान के नुकसान की बात से इन्कार भी नहीं किया। भारत और पाकिस्तान, दोनों सेनाओं के बीच संघर्ष विराम को लेकर समझौते के एक दिन बाद 11 मई को वायु अभियानों के निदेशक एयर मार्शल एके भारती ने मीडिया ब्रीफिंग में एक सवाल के जवाब में कहा कि वह इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे कि भारत ने कोई विमान खोया है अथवा नहीं और उन्होंने संघर्ष की मौजूदा स्थिति का हवाला दिया। 


उन्होंने कहा, ‘नुकसान होना प्रत्येक संघर्ष का एक स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन भारतीय सेना ने अपने सभी लक्षित लक्ष्यों को हासिल कर लिया है और भारतीय वायुसेना के सभी पायलट घर लौट आए हैं।’ एयर मार्शल भारती ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किए गए उच्च और सटीक जवाबी हमलों के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना ने अपने कुछ विमान गंवा दिए तथा उसकी संपत्तियों और हवाई ठिकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा। 


सबसे अच्छी बात यह है कि ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए हमारी वायुसेना शुरुआती विमानों को हुए नुकसान से बिल्कुल भी घबराई नहीं। यह हमारे लिए गर्व का विषय है। यह एक पेशेवर बल के आत्मविश्वास को दर्शाता है। वास्तविकता यह है कि 10 मई को भारतीय वायुसेना ने विभिन्न बमों के साथ सभी प्रकार के विमान उड़ाए थे और पाकिस्तान के भीतरी इलाकों में स्थित वायुसैनिक ठिकानों पर हमला किया था, जिसमें रावलपिंडी का नूर खान वायुसैनिक अड्डा भी शामिल था। 


जैसा कि सीडीएस जनरल चौहान ने कहा, ‘अच्छी बात यह है कि हम अपनी सामरिक गलती को समझ पाए, हमने उसका समाधान किया, उसे सुधारा और दो दिन बाद उसे फिर से लागू किया। हमने अपने सभी जेट विमानों को फिर से उड़ाया तथा लंबी दूरी पर निशाना साधा।’
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सवाल यह है कि सीडीएस जनरल अनिल चौहान के बयान पर इतनी ज्यादा राजनीति क्यों और किस लिए हो रही है? आखिर इतना हंगामा क्यों बरपाया जा रहा है? कोई भी देश अपने सैन्य अभियानों के ब्यौरे का खुलासा तब तक नहीं करता है, जब तक कि वे खत्म नहीं हो जाते। संघर्षों के दौरान होने वाले किसी भी नुकसान का हमेशा गलतियों को सुधारने के लिए गहराई से विश्लेषण किया जाता है और भारत ने भी यही किया। अब भारत के पास रक्षात्मक होने के लिए कोई कारण ही नहीं बचता है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर ने अपने सभी उद्देश्यों को हासिल कर लिया है।

 

विडंबना यह है कि भारतीय सेना पर गर्व महसूस करने के बजाय कुछ दलों और उनके राजनेताओं द्वारा ऐसा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि सरकार द्वारा राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का निर्णय लेने की वजह से कुछ गलती हो गई है? राष्ट्रीय हित में सवाल उठाने के लिए विपक्ष के पास निश्चित रूप से अपने कारण हैं, लेकिन इसे राजनीतिक हितों से प्रेरित नहीं होना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर के अलावा ऐसे अनेक मुद्दे हो सकते हैं, जिनके जरिये विपक्ष सरकार की कमियां निकालकर अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति कर सकता है, किंतु सेना के गौरव पर सवाल उठाना, उसके सैन्य अभियानों की प्रशंसा करने के बजाय कमियां खोजना, निश्चित रूप से उसके अदूरदर्शी दृष्टिकोण को ही दर्शाता है। 


हमारे लोग मोटे तौर पर यह मानते हैं कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पर्यटन केंद्र पहलगाम में हुए आतंकी हमले के दौरान जिस बर्बरता से पर्यटकों की हत्या की गई, उस पर भारत की प्रतिक्रिया बिल्कुल उचित थी। हमारी सेना ने जिस साहस और दृढ़ता के साथ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान में आतंकी अड्डों को नष्ट किया, वह बहुत ही सराहनीय और प्रत्येक देशवासी को गौरवान्वित करने वाला है। 


राजनीति करने के लिए विपक्षी दलों और उनके नेताओं को आने वाले समय में काफी मौके मिलेंगे, लेकिन किसी को भी भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का अधिकार नहीं है, खासकर तब, जब हमारे विपक्षी नेता एक स्वर में अपने देश का पक्ष रखने का सराहनीय कार्य कर रहे हों।

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