विराट कोहली की अगुआई में टीम इंडिया चैंपियंस ट्रॉफी में अपने अभियान की शुरुआत चार जून को पाकिस्तान से खेलकर करेगी। भारत के लिए पाकिस्तान के खिलाफ खेलने के हमेशा खास मायने रहे हैं। बेशक पिछले कुछ वर्षो में दोनों देशों की टीमों में व्याप्त कटुता में कमी आई है। इस कारण इन मैचों के प्रति दीवानगी में भी कमी आई है। पर ऐसा भी नहीं है कि अब दोनों टीमों के बीच सामान्य भावना से मैच खेले जाते हैं। विराट कोहली ने चैंपियंस ट्रॉफी में भाग लेने के लिए इंग्लैंड रवाना होने से पहले कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ खेलकर अभियान की शुरुआत करने को लेकर उन पर कोई दवाब नहीं है। पर असलियत कुछ अलग है।
आज भी दोनों देशों के बीच मैचों के दौरान दवाब साफ महसूस किया जा सकता है। दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंध के कारण कोई भी टीम हारना नहीं चाहती। पिछले कुछ दशकों में सिर्फ इतना फर्क आया है कि दोनों टीमों के खिलाड़ियों के आपसी संबंध काफी ठीक हो गए हैं। दरअसल 1965 और 1971 के युद्ध के बाद जब 1978-79 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध स्थापित हुए, तो काफी मैच खेले गए, इससे लोगों की दीवानगी में कमी आ गई। 1978 से 1990 तक भारत और पाकिस्तान के बीच सात टेस्ट सीरीज और छह वनडे सीरीज खेली गई।
फरवरी, 1999 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ अनिल कुंबल ने एक पारी में 10 विकेट लेकर जिम लेकर जिम लेकर का रिकॉर्ड बराबर किया था और भारत को जीत दिलाई थी। उसके बाद बाद ढोल-नगाड़े बजाकर जीत का जो जश्न मनाया गया था, उसे भुलाया नहीं जा सकता था। कभी दूरदर्शन पर महाभारत सीरियल के समय सड़कों पर जिस तरह सन्नाटा छा जाता था, भारत-पाकिस्तान के बीच मैच के दौरान भी कुछ ऐसा ही माहौल बनता था। वह रोमांच तो हालांकि आज भी बना हुआ है। इसी कारण आईसीसी अपने टूर्नामेंटों में प्रयास करता है कि भारत और पाकिस्तान एक ही ग्रुप में रहें और आपस में खेलकर अपना अभियान शुरू करें। टूर्नामेंट की इससे अच्छी शुरुआत हो ही नहीं सकती।
भारत-पाकिस्तान के बीच मैच को जंग का मैदान समझने की कोशिश दोनों देशों के बीच 1952-53 में खेली गई पहली सीरीज में ही शुरू हो गई थी । दिल्ली में खेले गए उस सीरीज का पहला टेस्ट भारत जीत गया। पर लखनऊ में दूसरे टेस्ट में भारत के हारने पर दंगे के जो हालात बने, उससे दोनों ही टीमें काफी समय तक दर्शकों की गुस्से भरी प्रतिक्रिया के खौफ में खेलती रहीं। यही वजह है कि लगातार दो सीरीज में किसी टेस्ट में कोई परिणाम नहीं निकला।
हाल के वर्षों में पाक खिलाड़ियों के भारत में आते रहने से संबंधों में कटुता कम हुई है। वसीम अकरम और शोएब अख्तर सहित कई पाक क्रिकेटर भारत के कार्यक्रमों में नजर आते रहे हैं। पिछले दिनों शोएब अख्तर के यह कहने पर, कि मुझे पाक से ज्यादा भारत में प्यार मिला है, उन्होंने पाकिस्तान में माहौल गरमा दिया था। पर जावेद मियांदाद जैसे कट्टरपंथी क्रिकेटर माहौल को ठीक नहीं रहने देते। सच्चाई यह है कि भारत और पाक, दोनों ने हार को पचाना नहीं सीखा है। भले दोनों देशों के क्रिकेटरों के आपसी रिश्ते सुधरे हों और लोगों में पहले जैसी दीवानगी न देखी जाए, पर इन दोनों में से कोई भी टीम हार अब भी बर्दाश्त नहीं कर सकती।