आरबीआई के बुलेटिन में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी छमाही के उच्च आवृत्ति संकेतक मसलन, वाहन की बिक्री, हवाई यातायात, इस्पात खपत आदि देश की गतिविधियों में छमाही आधार पर वृद्धि का संकेत दे रहे हैं और इन गतिविधियों में आगे भी तेजी की संभावना है। कहा गया है कि विकास के चार इंजन कृषि, एमएसएमई, निवेश और निर्यात को बढ़ावा देने को लेकर आगामी वर्ष 2025-26 बजट में किए उपायों से भारतीय अर्थव्यवस्था की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह भी कहा गया है कि यद्यपि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती और व्यापार नीति से डॉलर मजबूत हो रहा है। इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पूंजी की निकासी बढ़ सकती है, लेकिन इन सबके बीच आर्थिक गतिविधियों की गति बरकरार रहने की उम्मीद है। कृषि क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन से ग्रामीण मांग को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में घोषित आयकर राहत के बीच मुद्रास्फीति में गिरावट के साथ खर्च योग्य आय में वृद्धि को देखते हुए शहरी मांग में भी बड़े सुधार की उम्मीद है।
इसी तरह एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पास्परिक टैरिफ लगाने से निर्मित विपरीत वैश्विक आर्थिक हालात के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की नई मजबूत आर्थिक संभावनाएं हैं। ग्रामीण इलाकों में कृषि मजदूरी लगातार बढ़ रही है। ट्रैक्टरों की बिक्री और रबी फसलों की बुआई में तेजी आई है। देश भर में अक्तूबर से दिसंबर 2024 के बीच पूंजीगत खर्च तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में जुलाई से सितंबर 2024 की तिमाही में जो विकास दर महज 5.4 फीसदी ही थी, वह अक्तूबर से दिसंबर 2024 के बीच बढ़कर 6.3 फीसदी अनुमानित है।
एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, जबकि एलएंडटी के अनुसार, यह वृद्धि दर 6.7 फीसदी रह सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने 6.2 फीसदी वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। निस्संदेह देश में महंगाई दर घटने से भी विकास दर को गति मिल रही है। यह कोई छोटी बात नहीं है कि जब इस समय दुनिया के कई देशों में महंगाई बेकाबू बनी हुई है, तब भारत में महंगाई घट रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने स्वीकार किया है कि हम दुनिया में वर्ष 2024 तक महंगाई पर काबू पाने में कामयाब नहीं हुए हैं। इसलिए अब हम दुनिया में बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए हरसंभव नए प्रयास करेंगे। ज्ञातव्य है कि भारत में जनवरी 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति (सीपीआई) घटकर 4.3 फीसदी के स्तर पर आ गई है, जो पिछले पांच महीनों में सबसे निचला स्तर है। इसी तरह जनवरी 2025 में थोक मुद्रास्फीति 2.31 फीसदी रही है। इस तरह महंगाई घटना विकास के लिए लाभप्रद और सुकूनदेह परिदृश्य है।
इसके अलावा, आरबीआई द्वारा रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती और केंद्रीय बजट में करदाताओं को टैक्स में मिली राहत से अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। इस समय इस बात के भी संकेत उभरकर दिखाई दे रहे हैं कि अर्थव्यवस्था में मांग और खपत बढ़ाने के लिए वित्त मंत्रालय इसी वर्ष 2025 में अप्रैल-जून तिमाही में लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों को घटा सकता है। बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती से लोग धन खर्च करने के लिए आगे बढ़ेंगे। इसमें कोई दो राय नहीं है कि ब्याज दरें अधिक होने से उपभोक्ता कर्ज लेने से पीछे हट रहे थे और कर्ज की अधिक लागत से उद्यमी भी विस्तार की योजनाओं के लिए तत्परता नहीं दिखा रहे थे। ऐसे में नए फैसलों से लोगों की क्रयशक्ति और खपत बढ़ने से विकास दर को गति दी जा सकेगी।