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आर्थिकी: टैरिफ युद्ध के समय में म्यूचुअल फंड... दीर्घकालिक निवेश के कारण सुरक्षित है यह विकल्प

मधुरेंद्र सिन्हा
Updated Wed, 26 Mar 2025 10:08 PM IST

सार

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शेयर बाजार में भले सनसनी मची हो, लेकिन म्यूचुअल फंड सुरक्षित है, क्योंकि इनमें निवेश दीर्घकालिक होता है।
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Share Market - फोटो : ANI


इन सब से भारत भी अछूता नहीं रहा है और हमने देखा कि शेयर बाजार धड़ाम हो गए। निवेशकों में खलबली मच गई और बड़ी तादाद में लोग बिकवाली पर उतर आए। बगैर समझे-बूझे वे अपने स्टॉक बेचने लगे। सितंबर 2024 से जनवरी 2025 तक बीएसई सूचकांक में लगभग 12 फीसदी की गिरावट देखी गई। एक सर्वे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 की समाप्ति के समय सूचीबद्ध 1,231 कंपनियों में 50 फीसदी से भी ज्यादा की गिरावट रही। मिडकैप के कुछ शेयर तो 71 फीसदी तक गिरे हैं और स्मॉलकैप के शेयरों में भी तबाही आई। इसके पीछे मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक चिंता, घरेलू आर्थिक समस्याएं और कुछ हद तक कई कंपनियों का लचर प्रदर्शन रहा है। यह भी एक सच्चाई है कि शेयर बाजार सेंटीमेंट यानी अवधारणा पर चलते हैं। अगर सेंटीमेंट उच्च हों, तो परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, बाजार ऊपर जाता ही है। निवेशक उस समय तार्किक बातें नहीं करता है और धन लगाने को तैयार रहता है। ठीक इसके विपरीत की स्थिति में वह निवेश से कतराता है। 


इस समय परिस्थितियां उलट हैं। बार-बार पूछा जा रहा है कि शेयर मार्केट के बाद क्या म्यूचुअल फंड भी उतने ही उठापटक वाले हैं? सवाल वाजिब है, क्योंकि म्यूचुअल फंड भी तो आखिर शेयर बाजार में निवेश करते हैं।  इसका जवाब है कि इनमें उतना खतरा नहीं रहता, जितना शेयर बाजार में है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि निवेशक म्यूचुअल फंडों में निवेश दीर्घकालिक आधार पर करते हैं। समझदार निवेशक अपनी आने वाली जरूरतों के हिसाब से इनमें पैसा लगाते हैं, क्योंकि इसमें पारदर्शिता बहुत है और हर दिन का लेखा-जोखा निवेशक को मिलता रहता है। समझदार निवेशक उतावलापन नहीं दिखाते। वे इससे लाभान्वित होते हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि बढ़ती अनिश्चितता के बीच व्यक्तिगत वित्त के पारंपरिक नियम अब भी कायम हैं। 


अपनी हर तरह की जरूरतों के लिए एक वित्तीय योजना बनाने वाले कभी भी नुकसान नहीं उठाते हैं। आप अपने छह महीने के आपातकालीन फंड को रखें या यदि आप सेवानिवृत्त हैं, तो तीन से पांच साल के खर्चों के बराबर। साथ ही अगले साल की योजनाओं के लिए आपको जो पैसे चाहिए, उन्हें नकद और नकद समकक्ष जैसे कि अल्पकालिक ट्रेजरी और सीडी में रखें। उदाहरण के लिए, अगले साल आप जो घर या कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, उसके लिए फंड को अधिक रिटर्न वाले बचत कोष में रखा जा सकता है। म्यूचुअल फंडों में निवेश कहीं बेहतर और वैज्ञानिक तरीके से होता है। इसलिए दीर्घकाल में इनमें लाभ ही होता है।


म्यूचुअल फंडों में एक खास श्रेणी है सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी)। शेयर बाजार के धराशायी होने पर कुछ निवेशकों ने इनमें धन लगाना छोड़ दिया, जो सही रणनीति नहीं है। यह धीमे-धीमे बढ़ने वाला प्लान है, जो सही रिटर्न देता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह समय मजबूती से बैठे रहने का है। उनका कहना है कि जब बाजार में गिरावट आती है, तो म्यूचुअल फंड के यूनिट भी सस्ते हो जाते हैं। लेकिन इसका फायदा उस समय होगा, जब बाजार फिर चढ़ेगा। गिरते हुए बाजार में बेहतर रणनीति यह होती है कि हाइब्रिड फंड या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में निवेश किया जाए,  जिसमें जोखिम कम होते हैं। इनमें इक्विटी और डेट (डीईबीटी), दोनों ही होते हैं। ये ऐसे फंड होते हैं, जो आपके निवेश को संतुलित रखते हैं। यानी बाजार के झटकों से बचाते हैं। यहां पर एक बात ध्यान रखने की है कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इतिहास बताता है कि गिरना और उठना बाजार की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। ऐसा नहीं है कि बाजार में अभी हमने जो गिरावट देखी, वह कोई असामान्य घटना है। ऐसा अतीत में कई बार हुआ है और आगे ऐसा नहीं होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए अपने मन के बजाय दिमाग का इस्तेमाल करके म्यूचुअल फंडों में निवेश बनाए रखें।

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