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अर्थ-शास्त्र: निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल, भारतीय अर्थव्यवस्था जल्द हो सकती है गुलाबी

सतीश सिंह
Updated Tue, 11 Jul 2023 07:40 AM IST

सार

अभी विदेशी निवेशक चीन की जगह भारत में निवेश करना बेहतर मान रहे हैं, क्योंकि फिलहाल, भारत की अर्थव्यवस्था चीन से अधिक मजबूत है।
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शेयर मार्केट - फोटो : सोशल मीडिया


इसके ठीक उलट भारतीय शेयर बाजार में विगत कुछ महीनों से उछाल की स्थिति बनी हुई है। चार जुलाई को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 274 अंकों की बढ़त के साथ 65,479 पर बंद हुआ। बजाज फाइनेंस, बजाज फिंसर्व, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की लिवाली से सेंसेक्स में उछाल की स्थिति बनी हुई थी। अपने शुरुआती कारोबार में बीएसई 381.55 अंकों की बढ़ोतरी के साथ 65,586.60 अंकों के स्तर पर पहुंच गया। इसके पहले 21 जून को यह 261 अंकों की बढ़त के साथ 63,588 की रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ था।


जानकारों के अनुसार, इस साल के अंत तक सेंसेक्स 70,000 के स्तर पर पहुंच सकता है। शेयर बाजार जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उससे इस अनुमान में कोई अतिश्योक्ति नहीं दिखती है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) या निफ्टी 28 जून को 19,000 के स्तर को पार कर गया। चार जुलाई को यह 90.95 अंकों की बढ़ोतरी के साथ 19,413.50 अंकों पर पहुंच गया। जानकारों के अनुसार, निफ्टी इस साल के अंत तक 21,000 के स्तर पर पहुंच सकता है।


शेयर बाजार में लगातार उछाल की स्थिति बने रहने की वजह से पिछले तीन महीनों में शेयर बाजार के निवेशकों की संपत्ति में 40 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। शेयर बाजार में उछाल का कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) द्वारा ज्यादा निवेश करना है। इसमें अमेरिका और यूरोप के निवेशकों की संख्या अधिक है। जून में विदेशी निवेशकों ने भारत में 47 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया था। इससे चीन की परेशानी बढ़ रही है, क्योंकि चीन का बाजार कम निवेश होने से ठंडा पड़ता जा रहा है। विदेशी निवेशक चीन के बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं, जिसका कारण चीन का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों का नरम तथा निर्माण एवं विनिर्माण क्षेत्र का सुस्त रहना है। इसके कारण चीन की अर्थव्यवस्था पहले से कुछ कमजोर हो गई है। चीन में इस साल जनवरी और फरवरी में विदेशी निवेशकों ने अच्छा-खासा निवेश किया था, लेकिन बाद के महीनों में निवेशकों ने 34 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि निकाल ली।


अभी विदेशी निवेशक चीन की जगह भारत में निवेश करना बेहतर मान रहे हैं, क्योंकि फिलहाल, भारत की अर्थव्यवस्था चीन से अधिक मजबूत है। विदेशी निवेशक तो इसका फायदा उठा ही रहे हैं, घरेलू निवेशक भी इसका फायदा उठा सकते हैं। इतना ही नहीं, वर्ष 2025 तक भारतीय अर्थव्यवस्था के 30 खरब डॉलर से 50 खरब डॉलर होने की बात कही जा रही है। एचएसबीसी की हालिया रिपोर्ट में तो भारतीय अर्थव्यवस्था के पांच से दस वर्षों में 70 खरब डॉलर होने की बात कही गई है।


आमतौर पर ज्यादा प्रतिफल मिलने की आस में घरेलू एवं विदेशी निवेशक शेयर के रूप में कंपनियों में निवेश करते हैं, लेकिन अर्थतंत्र की समझ नहीं होने या फिर कंपनियों के तुलनपत्र या वित्तीय परिणाम का सही विश्लेषण नहीं करने या फिर आर्थिक, राजनीतिक कारणों का शेयर बाजार पर क्या या कैसा प्रभाव पड़ेगा की समझ न होने की वजह से निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए, अगर कोई निवेशक शेयर बाजार में निवेश करना चाहता है, तो उसे सतर्क और शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों की हरकतों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।


शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव से सिर्फ निवेशकों को नुकसान नहीं होता है, इससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। हालांकि, अभी शेयर बाजार में निवेश का अनुकूल माहौल है, जिसका फायदा सभी देसी एवं विदेशी निवेशकों को उठाना चाहिए। अधिक निवेश से भारतीय अर्थव्यवस्था जल्द से जल्द गुलाबी हो सकती है।

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