फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

तकनीकी: एआई अनुसंधान में भारत का बढ़ता कद, कुछ वर्षों में महाशक्ति बनकर उभर सकता है

मुकुल श्रीवास्तव
Updated Mon, 18 Nov 2024 05:33 AM IST

सार

डिजिटल विकास और एआई में निवेश यह भरपूर संकेत देता है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत एआई के क्षेत्र में एक महाशक्ति बनकर उभर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एआई - फोटो : अमर उजाला


ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा

2023 में प्रकाशित ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ओपन एआई के चैटजीपीटी और गूगल के बार्ड जैसे नवाचारों के आने से जेनरेटिव एआई के बाजार में भूचाल आ गया है। अगले 10 वर्षों में जेनरेटिव एआई का बाजार दुनिया भर में 13 खरब डॉलर तक बढ़ने की संभावना है, जिसमें भारत की अहम भूमिका होगी।


रिसर्च संस्था ईवाई की द एआई आइडिया ऑफ इंडिया शीर्षक से छपी रिपोर्ट के मुताबिक, यदि भारत विभिन्न क्षेत्रों में जेनरेटिव एआई तकनीक का पूरी तरह से उपयोग करता है, तो 2030 तक जेन-एआई अर्थव्यवस्था में 359-438 अरब डॉलर का अतिरिक्त योगदान कर सकता है।


दो दशक में आईटी में भारत की प्रगति

पिछले दो दशक में भारत ने आईटी के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी मुहिम से भी देश में तकनीकी नवाचारों का ईको-सिस्टम बनाने की कवायद तेज हो गई है, जिनमें आईटी क्षेत्र, सेमीकंडक्टर निर्माण और एआई से जुड़े उद्योग लगाए जा रहे हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, एआई का इस्तेमाल कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और मीडिया जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जा सकता है, जिससे इन क्षेत्रों में अहम सुधार देखने को मिल सकता है। 


'भारतजेन' की शुरुआत

हाल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और आईआईटी, बॉम्बे द्वारा ‘भारतजेन’ नाम से एक भारतीय जेनरेटिव एआई की शुरुआत की गई, जिससे नागरिकों को विभिन्न भाषाओं में जेनरेटिव एआई उपलब्ध कराया जाएगा। आज देश में जेनरेटिव एआई स्टार्टअप्स की संख्या में भी तीव्र वृद्धि दर्ज की जा रही है। नैसकॉम की इंडियाज जेनरेटिव एआई स्टार्टअप लैंडस्केप, 2024 रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में जेनरेटिव एआई से जुड़े स्टार्टअप्स की संख्या 66 से 240 पहुंच गई है। 


स्टार्टअप का प्रमुख केंद्र बना बंगलूरू

बंगलूरू जेन-आई स्टार्टअप का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जो देश में कुल 43 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। वहीं अहमदाबाद, पुणे, सूरत और कोलकाता जैसे शहर भी तेजी से उभरते हुए केंद्र बन रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एआई रिसर्च में भी भारत का कद लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका, जर्मनी और जापान के साथ मिलकर भारत एआई की चुनौतियों को हल करने और मौकों का फायदा उठाने के लिए काम कर रहा है। 


गूगल की घोषणा

गूगल ने भारत में डायबिटिक रेटिनोपैथी एआई मॉडल उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इसकी मदद से अगले 10 साल में एआई असिस्टेंट स्क्रीनिंग की सुविधा दी जाएगी। वहीं गूगल भारतीय कंपनियों के साथ खेती की उपज बढ़ाने के लिए एआई मॉडल बना रहा है।
विज्ञापन


इसके साथ ही दिग्गज चिप निर्माता एनवीडिया ने भी रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की घोषणा की है। भारत सरकार ने भी देश में एआई स्टार्टअप को सशक्त बनाने के लिए इंडिया एआई मिशन को मंजूरी दी है, जिसके लिए कैबिनेट ने करीब 10 हजार करोड़ रुपये की राशि जारी की। इससे एआई नवाचार में देश को ग्लोबल लीडर बनने में काफी मदद मिलेगी। 


रोजगार पर गहरे संकट का डर

हालांकि इस बात का डर बना हुआ है कि एआई का प्रसार बढ़ने से रोजगार का संकट गहरा सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में, जहां मशीनीकरण कार्यों को आसान बना रहा है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, एआई और ऑटोमेशन के कारण आने वाले वर्षों में लाखों पारंपरिक नौकरियों पर संकट आ सकता है। दूसरी तरफ नए तकनीकी और विश्लेषणात्मक कौशल की मांग बढ़ेगी, जिसके लिए सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर रीस्किलिंग प्रोग्राम्स चलाने पर भी ध्यान देना चाहिए।


कुछ वर्षों में भारत बनेगा महाशक्ति

देश का डिजिटल विकास और एआई में निवेश यह भरपूर संकेत देता है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत एआई के क्षेत्र में एक महाशक्ति बनकर उभर सकता है। यह न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत का कद बढ़ाएगा। भारतीय तकनीकी शिक्षा संस्थान और कई कंपनियां कार्यबल को एआई-सक्षम उद्योगों के लिए तैयार करने का काम कर रही हैं। इसके साथ ही सुरक्षा के मोर्चे पर भी साइबर हमलों, डीपफेक और फेक न्यूज के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए एक तंत्र की आवश्यकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next