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सियासत: चुनावों में चुनौती बन रहा चीन... भारत के साथ US पर भी है ड्रैगन की तिरछी नजर, सोशल मीडिया का दुरुपयोग

प्रशांत माली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 18 Apr 2024 05:06 AM IST

सार

चीन मतदाताओं को सबसे ज्यादा किस चीज से विभाजित किया जा सकता है, इस पर मतदान कराने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि मतभेद पैदा हो सकें। आशंका है कि वह भारत में लोकसभा चुनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को भी प्रभावित कर सकता है।
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साइबर माध्यमों से चुनाव प्रभावित करने की ताक में चीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया


माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि चीन सोशल मीडिया के जरिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा बनाई गई राजनीतिक सामग्री वितरित करेगा, जो 'इन हाई-प्रोफाइल चुनावों में उसके हितों को लाभ पहुंचा सकता है', क्योंकि एआई से तेजी से मीम्स, वीडियो और ऑडियो सामग्रियां बन रही हैं। कंपनी ने जून, 2023  से चीन और उत्तर कोरिया में ‘कुछ उल्लेखनीय साइबर रुझान देखे हैं, जो न केवल अपने परिचित लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, बल्कि अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अधिक जटिल प्रभावी तकनीकों का उपयोग करने का भी प्रयास करते हैं।' माइक्रोसॉफ्ट ने दावा किया है कि चीनी साइबर हमलावरों ने तीन लक्ष्य क्षेत्रों को चुना है- दक्षिण प्रशांत द्वीप समूह के देश, दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में उसके क्षेत्रीय विरोधी और अमेरिकी रक्षा औद्योगिक आधार। चीनी अभियान एआई-जेनरेटेड या

एआई-समर्थित सामग्री को परिष्कृत करना जारी रखते हैं। इन अभियानों के पीछे के खिलाड़ियों ने एआई-जनरेटेड मीडिया को बढ़ाने की इच्छा दर्शाई है, जो उनके रणनीतिक आख्यानों को लाभ पहुंचाता है, साथ ही वे वीडियो, मीम्स और ऑडियो सामग्री भी बनाते हैं।


चीन, मतदाताओं को सबसे ज्यादा किस चीज से विभाजित किया जा सकता है, इस पर मतदान कराने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि मतभेद पैदा हो सकें। वह संभवत: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे को भी अपने पक्ष में प्रभावित कर सकता है। उत्तर कोरिया ने अपने सैन्य लक्ष्यों और गुप्तचर जानकारी संग्रह को वित्तपोषित करने और आगे बढ़ाने के लिए क्रिप्टोकरंसी लूट और आपूर्ति शृंखला को बाधित करने वाले हमलों को बढ़ा दिया है। इसने अपने कार्यों को अधिक प्रभावी और कुशल बनाने के लिए एआई का उपयोग करना भी शुरू कर दिया है।


सॉफ्टवेयर दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने चीन द्वारा एआई का इस्तेमाल कर भारत, अमेरिका और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों में चुनावों को बाधित करने की आशंका से संबंधित जो चेतावनी जारी की है, वह चिंताजनक है। माइक्रोसॉफ्ट थ्रेट इंटेलिजेंस से मिली जानकारी के अनुसार, चीन आगामी प्रमुख चुनावों में विशेष रूप से अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए एआई द्वारा बनाई गई सामग्री का इस्तेमाल कर सकता है। माइक्रोसॉफ्ट थ्रेट एनालिसिस सेंटर (एमटीएसी) की रिपोर्ट इस आसन्न खतरे को रेखांकित करती है कि 'इस साल दुनिया भर में होने वाले प्रमुख चुनावों को देखते हुए, खासकर भारत, दक्षिण कोरिया और अमेरिका में, चीन अपने हितों को लाभ पहुंचाने के लिए एआई जनरेटेड सामग्री बनाएगा और उसका प्रचार करेगा।'


माइक्रोसॉफ्ट की चेतावनी ताइवान में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान चीन के कथित ट्रायल रन की खबरों के बाद आई है, जहां उसने जनवरी में एआई द्वारा बनाई सामग्री के जरिये दुष्प्रचार का प्रयास किया था। रिपोर्ट में स्टॉर्म 1376 नामक एक बीजिंग समर्थित समूह का उल्लेख है, जिसे स्पैमोफ्लाज या ड्रैगनब्रिज के नाम से भी जाना जाता है, जो ताइवानी चुनाव के दौरान अत्यधिक सक्रिय था। यह राजनीतिक परिणामों को प्रभावित करने के लिए चीन द्वारा प्रौद्योगिकी के उपयोग के मामले का अध्ययन करता है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में तकनीकी हस्तक्षेप की क्षमता को रेखांकित करता है।


कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा बनाई गई सामग्री जनमत को प्रभावित करने के लिए संज्ञानात्मक पूर्वाग्रहों और मनोवैज्ञानिक कमजोरियों का फायदा उठा सकती है। माइक्रो टार्गेटिंग और भावनात्मक संदेश जैसी तकनीकों का लाभ उठाकर, एआई एल्गोरिदम इको चैंबर्स बना सकता है, जो मौजूदा विश्वासों को मजबूत करता है और समाज को ध्रुवीकृत करता है। इसके अलावा, 'डीपफेक' तकनीक का उदय सूचना के पारंपरिक स्रोतों में विश्वास को कम करते हुए, तथ्य और कल्पना के बीच की बारीक रेखा को धुंधला कर एक महत्वपूर्ण खतरा बन गया है।
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सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए एआई सामग्री के दुरुपयोग को रोकने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सबसे पहले, इंटरनेट की सीमाहीन प्रकृति क्षेत्राधिकार संबंधी मुद्दों को जटिल बनाती है, जिससे दुर्भावनापूर्ण लोग अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार बिना किसी दंड के काम कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, तकनीकी नवाचार की तीव्र गति विनियामक प्रयासों से आगे निकल जाती है, जिससे नीति निर्माताओं के लिए उभरते खतरों का सामना करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, एआई सामग्री निर्माण और प्रसार का विकेंद्रीकृत स्वरूप पारंपरिक प्रवर्तन रणनीतियों में बाधा डालता है, जिसके लिए सरकारों, तकनीकी कंपनियों और नागरिक समाज के बीच सहयोग की आवश्यकता होती है।


डिजिटल युग में लोकसभा चुनावों को प्रभावित करने के लिए चीन द्वारा एआई-जनरेटेड सामग्री के संभावित उपयोग से प्रौद्योगिकी और राजनीति के बीच जटिलता स्पष्ट होती है। ताइवान जैसे अन्य देशों के अनुभवों से यह स्पष्ट है कि तकनीकी हस्तक्षेप दुनिया भर में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा बन गया है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकारों, तकनीकी कंपनियों और नागरिक समाज को मजबूत विनियामक ढांचा विकसित करने, डिजिटल साक्षरता बढ़ाने और चुनावों की सत्यनिष्ठा की रक्षा करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। ऐसा करने में विफलता लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों को कमजोर करेगी और नागरिकों का अपने राजनीतिक संस्थानों पर भरोसा कम हो सकता है।

-लेखक साइबर कानून विशेषज्ञ और बॉम्बे हाईकोर्ट के वकील हैं।

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