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ऑपरेशन सिंदूर: एक तीर और कई निशाने, भारत की सटीक कार्रवाई से बौखला गया था पाकिस्तान

रवींद्र दुबे
Updated Thu, 24 Jul 2025 06:50 AM IST

सार

ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान की बौखलाहट अकारण नहीं थी। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ डेमियन साइमन के अनुसार, भारत ने जिस सटीकता से किराना हिल्स पर और उसके पहले मियां चन्नू में हमले किए, उससे पाकिस्तान समझ गया कि भारतीय मिसाइलों को रोकना उसके बस का नहीं।
 
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ऑपरेशन सिंदूर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक


लेकिन ओपन सोर्स इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ डेमियन साइमन भारत के इस दावे को नकारते हैं। उनका कहना है कि सेटेलाइट इमेजरी के अनुसार भारत ने पाकिस्तान की किराना हिल्स पर हमला किया था। हालांकि, उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि चित्र दर्शाता है कि हमले का उद्देश्य सिर्फ चेतावनी देना था और उसमें कोई भूमिगत या भेद्य प्रभाव नहीं हुआ। ज्ञातव्य है कि इस मिनी-युद्ध के दौरान पाकिस्तान के चकलाला में नूर खान एयरबेस पर भारत के जवाबी हमले के बाद ही पाकिस्तान ने युद्धविराम की गुहार लगाई थी।


जियो-इंटेलिजेंस रिसर्चर और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस विशेषज्ञ साइमन इंटेल लैब पर अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पाकिस्तान के सरगोधा क्षेत्र का एक फोटो जारी किया है, जो कि उनके दावे के अनुसार पिछले महीने ही अपडेट किया गया है। यह चित्र मई 2025 में किराना हिल्स पर भारत के हमले की इंपैक्ट लोकेशन दिखाता है। बहरहाल, यह काफी दिलचस्प और दिमाग को झकझोरने वाली बात है कि किस तरह आधुनिक संघर्षों का विच्छेदन न सिर्फ सरकारों, बल्कि की-बोर्ड के पीछे बैठे कुछ लोगों द्वारा भी किया जाता है। लेकिन क्या यही एक चेतावनी थी, जो पाकिस्तान को दी गई थी?


9 मार्च, 2022 को शाम के सात बजे भारत से चली हुई ब्रह्मोस मिसाइल पाकिस्तानी सीमा के 120 किलोमीटर अंदर मियां चन्नू नामक स्थान पर गिरी। चूंकि मिसाइल के सर पर कोई वारहेड नहीं था, लिहाजा जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ। इसके लगभग 24 घंटे बाद, पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने कहा कि ‘एक तेज गति से उड़ने वाली वस्तु’ भारत से आई और स्थानीय समयानुसार शाम सात बजे से थोड़ा पहले पाकिस्तानी क्षेत्र में उतरी। एक और 24 घंटे बाद-मिसाइल के पाकिस्तान से टकराने के दो दिन बाद-भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की कि उसकी एक मिसाइल ‘नियमित रखरखाव’ के दौरान गलती से लॉन्च होकर पाकिस्तान में चली गई थी।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में ‘नियमित रखरखाव और निरीक्षण के दौरान एक मिसाइल का अनजाने में छोड़ा जाना’ स्वीकार किया। भारत ने इस घटना पर गहरा खेद व्यक्त किया। साथ ही यह राहत भी व्यक्त की कि किसी की जान नहीं गई। उक्त घटना के अन्य कूटनीतिक आयाम चाहे जो हों, लेकिन मिसाइल टेक्नोलॉजी को जानने वाले अच्छी तरह जानते हैं कि सतह से सतह तक या सरफेस टू सरफेस मिसाइल दुर्घटनावश चल ही नहीं सकती। उक्त मिसाइल ध्वनि की गति से चलने वाली यानी सुपरसोनिक थी। किसी भी मिसाइल का परीक्षण तब होता है, जब उसमें कई तरह के कोड फीड किए जाते हैं। उसका लक्ष्य निर्धारित किया जाता है कि वह कहां जाकर गिरेगी। इसके अलावा सुरक्षा और सावधानी के भी कई चरण होते हैं। इन बातों के मद्देनजर उक्त मिसाइल का दुर्घटनावश चल जाना संदेहास्पद नजर आता है। इसके अलावा, पाकिस्तान पर बालाकोट हवाई हमला ताजा-ताजा ही था। क्या भारत ने इस ‘दुर्घटना’ के जरिये पाकिस्तान को कोई संदेश देने की कोशिश की थी कि वक्ते जरूरत उसे घर में घुसकर भी मारा जा सकता है।


बात सिर्फ मिसाइल के चल जाने की नहीं है। दरअसल, पाकिस्तान को पता ही नहीं चला कि उक्त मिसाइल कब उसकी सीमा में घुस गई। पाकिस्तान के पास चीन से खरीदा हुआ हवाई प्रतिरक्षा सिस्टम एचक्यू9 है। अक्तूबर 2021 में अच्छे-खासे पैमाने पर की गई इस खरीदी पर इस दुर्घटनावश चली मिसाइल ने पूरी तरह पानी फेर दिया। पाकिस्तानी सेना में एचक्यू9 हाई-टू-मीडियम एयर डिफेंस सिस्टम  के रूप में संदर्भित सतह से हवा में मार करने वाली (सरफेस टू एयर) मिसाइल प्रणाली के तहत यह सिस्टम एक भव्य समारोह में शामिल किया गया था। लेकिन चीन द्वारा पाकिस्तान को बेचा गया यह सिस्टम पूरी तरह नाकामयाब साबित हुआ।


क्रूज मिसाइल वस्तुत: एक मानवरहित स्व-चालित वाहन है, जो वायुगतिज माध्यम से उड़ान भरकर लक्ष्य विशेष पर विस्फोटक या विशेष पेलोड गिराता है। यह जेट इंजन की मदद से काफी तेज गति से उड़ता है। क्रूज मिसाइल-सबसोनिक, सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक-तीन प्रकार की होती हैं। सबसोनिक यानी जिनकी स्पीड आवाज से कम होती है। दूसरी सुपरसोनिक, जो आवाज से तीन गुना तेज स्पीड से चलती हैं। तीसरी हाइपरसोनिक, जिनकी स्पीड आवाज से पांच गुना अधिक होती है। भारत ने तीसरी किस्म यानी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल 2024 में ही विकसित कर ली है, जिसकी मारक क्षमता 800 से 1000 किलोमीटर तक है।
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ब्रह्मोस भारत और रूस के एक संयुक्त उद्यम का परिणाम है, जिसके कारण रूसी पी-800 ओनिक्स एंटी-शिप क्रूज मिसाइल का संशोधन हुआ। ब्रह्मोस कार्यक्रम भारत के लिए सफल रहा है और तीनों भारतीय सैन्य सेवाओं के पास ये मिसाइलें हैं। ये दुनिया की सबसे तेज रफ्तार मिसाइलों में शामिल हैं। ये जमीन से कम ऊंचाई पर बहुत तेज स्पीड से उड़ान भरती हैं, जिसकी वजह से इन्हें एंटी-मिसाइल सिस्टम से पकड़ना आसान नहीं होता। यही वजह है कि ये मिसाइल कम समय में लंबी दूरी तक परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। बहरहाल, भारत एक तीर से कई निशाने साधने में सफल रहा है। अब तक वह अपने दूरस्थ पड़ोसी को यह संदेश देने में सफल रहा है कि उसे अब हलके में लेना आत्मघाती साबित होगा।

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