पिछले दो वर्षों में भारतीय उड्डयन क्षेत्र में लगातार तकनीकी खराबियां, स्मोक डिटेक्टर की गलत सूचनाएं, इमरजेंसी लैंडिंग और गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। हाल ही में, एअर इंडिया के एक विमान में स्मोक डिटेक्टर बजने की घटना ने एक बार फिर यात्रियों के मन में भय और सरकार की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 2024-2025 के दौरान देशभर में 18 से अधिक इमरजेंसी लैंडिंग दर्ज की गईं, जबकि तकनीकी खराबी की संख्या 1,200 से ऊपर पहुंच गई। एअर इंडिया समूह अकेले ही इनमें सबसे बड़ा हिस्सा रखता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2023 से जून 2026 के बीच तकनीकी खामियों से जुड़े कुल 2,420 गंभीर मामले दर्ज किए गए। एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस में 963 गंभीर तकनीकी दोष दर्ज हुए, जो कुल मामलों का करीब 40 फीसदी हैं। इनमें अकेले एअर इंडिया के 844 मामले हैं। 2026 के पहले छह महीनों में समूह में 99 मामले दर्ज हुए। इंडिगो, जो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है, ने 2023-2026 के बीच 306 गंभीर दोष दर्ज कराए। स्पाइसजेट, अकासा एयर और अन्य कंपनियों में भी वृद्धि देखी गई।
नागर विमान महानिदेशालय (डीजीसीए) के आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2025 तक भारत में 65 इन-फ्लाइट इंजन शटडाउन की घटनाएं हुईं। इनके कारण मुख्यतः ईंधन प्रदूषण, फिल्टर ब्लॉकेज और यांत्रिक खराबी रहे। जनवरी 2024 से मई 2025 तक 11 मेडे कॉल्स (एक अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन रेडियो संदेश) दर्ज किए गए, जिनमें से कई इमरजेंसी लैंडिंग से जुड़े थे। 2024-25 की डीजीसीए वार्षिक रिपोर्ट में 104 दुर्घटनाओं और 123 गंभीर घटनाओं का जिक्र है। इनमें से अधिकांश की जांच पूरी हो चुकी है, पर रिपोर्ट्स से साफ है कि तकनीकी रखरखाव की कमी और पुराने बेड़े का बोझ बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तेजी से बढ़ते यात्री ट्रैफिक के मुकाबले रखरखाव सुविधाएं, प्रशिक्षित इंजीनियर और पार्ट्स की उपलब्धता अपर्याप्त हैं। डीजीसीए ने निगरानी बढ़ा दी है। फिर भी, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सजा से ज्यादा सक्रिय रखरखाव और आधुनिक तकनीक की जरूरत है।
पायलट एसोसिएशन के प्रतिनिधि कैप्टन सीएस रंधावा कहते हैं कि ईंधन फिल्टर, कंटेमिनेशन और इलेक्ट्रॉनिक फेल्योर जैसी समस्याएं बार-बार आ रही हैं। हमें सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत है। वहीं, नागरिक उड्डयन मंत्रालय का दावा है कि दुर्घटना दर शून्य है, पर गंभीर घटनाओं की संख्या चिंताजनक है। इसलिए, डीजीसीए को चाहिए कि वह सभी एयरलाइंस के लिए अनिवार्य रखरखाव ऑडिट बढ़ाए। पायलट व इंजीनियरों का बेहतर प्रशिक्षण हो, तथा पुराने विमानों को चरणबद्ध तरीके से रिटायर किया जाए। एयरलाइंस को पारदर्शी रिपोर्टिंग भी अनिवार्य करनी चाहिए।
भारतीय उड्डयन क्षेत्र दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है, लेकिन अगर सुरक्षा से समझौता हुआ, तो यह विकास टिकाऊ नहीं रहेगा। सरकार, नियामक और एयरलाइंस को मिलकर यात्रियों का विश्वास बहाल करना होगा, वरना हवाई यात्रा परेशानी ही बनी रहेगी।