राज्यसभा द्वारा पास किया गया रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) बिल, 2015 उपभोक्ताओं के हक में सरकार द्वारा संसद में लाया गया संभवतः अब तक का सबसे महत्वपूर्ण कानून है, जो रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े लाखों उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षित करना चाहता है। इस बिल का विभिन्न बिल्डरों और रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी कंपनियों ने विरोध किया, लेकिन शहरी विकास मंत्री बधाई के पात्र हैं कि वह इस पर मजबूती से अड़े रहे।
रियल एस्टेट सेक्टर पर राज्य एवं केंद्र स्तर पर जरूरी नियामक बनाकर सरकार ने उपभोक्ताओं के संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल की है। यह बिल न केवल उपभोक्ता अधिकारों को मजबूती से स्थापित करता और बिल्डरों को कानूनी तौर पर जवाबदेह बनाता है, बल्कि प्रतिस्पर्धा, क्षमता एवं निवेश ढांचे के निर्माण के जरिये इस उद्योग को बढ़ावा भी देता है।
इस बिल का परीक्षण करने वाली प्रवर समिति में काम करने का मुझे भी अवसर मिला था। इस विधेयक के बारे में इससे जुड़े विभिन्न साझेदारों-विभिन्न शहरों के उपभोक्ता संगठनों, रियल एस्टेट डेवलपर्स और बैंकों से व्यापक परामर्श लिया गया। उन सबके साथ चर्चाओं से साफ था कि रियल एस्टेट सेक्टर में उपभोक्ताओं का सामना कच्चे सौदे से होता है और बड़े पैमाने पर खरीदार बिल्डरों के बेबस शिकार बनकर रह जाते हैं। देर से घर मिलना, खराब गुणवत्ता, अवैध निर्माण और धोखाधड़ी आदि इस क्षेत्र की ऐसी हकीकतें हैं, जो छिपी नहीं हैं। बिल्डरों की चालाकियों से निजात पाने के लिए उपभोक्ताओं को समूहों में इकट्ठा होकर किसी तरह न्याय पाने के लिए पैसे एवं वक्त की बर्बादी के साथ वकीलों के चक्कर काटने पड़ते थे।
इस बिल के पास होने के बाद बिल्डरों के वायदों और करार में दर्ज प्रतिबद्धताओं के आधार पर उनकी जवाबदेही सुनिश्चित कराने के अवसर उपभोक्ताओं के पास बढ़ जाएंगे। इसमें उपभोक्ता अधिकारों की बात की गई है, तो बिल्डरों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की गई है। जो कानून का उल्लंघन करेगा, उन्हें जुर्माने का भुगतान करना होगा। यही नहीं, स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाले रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण का नया संस्थागत ढांचा भी तैयार किया जाएगा, जो बिल्डरों एवं उपभोक्ताओं के बीच हुए विवादों का तेजी से निपटारा करेगा। यह बिल निवेशकों के लिए भी बेहतर होगा, क्योंकि इससे अस्त-व्यस्त रियल एस्टेट सेक्टर में स्थिरता आएगी एवं नियमों की बहाली में मदद मिलेगी। इस विधेयक से यह भी सुनिश्चित होता है कि बिल्डरों को अब गुणवत्ता के जरिये उपभोक्ताओं के प्रति अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करना होगा, न कि स्थानीय अधिकारियों को रिश्वत देकर रियल एस्टेट प्लान की मंजूरी लेने पर। इस बिल के अनुसार बिल्डरों का दायित्व होगा कि वे प्रोजेक्ट की मार्केटिंग की शुरुआत तभी करें, जब हर तरह की अनुमति उन्हें मिल जाए, ताकि उपभोक्ताओं का जोखिम कम हो।
अभी कोई व्यक्ति निर्माणाधीन प्रॉपर्टी खरीदता है, तो रजिस्ट्रेशन के एक से दो साल बाद फ्लैट डिलिवरी का वायदा किया जाता है। आमतौर पर निर्धारित समय के भीतर फ्लैट की डिलिवरी नहीं दी जाती। यह बिल इस समस्या से निजात दिलाने में भी कारगर साबित हो सकता है। फ्लैट की डिलिवरी में ज्यादा देरी होने पर बिल्डरों को पूरी रकम की वापसी ब्याज के साथ करनी होगी। बिल्डर अब किसी प्रोजेक्ट से जुड़ी गलत अथवा तथ्यहीन जानकारियां प्रचार सामग्री में देकर उपभोक्ताओं को गुमराह नहीं कर सकेंगे। इसको भी ध्यान में रखकर मजबूत तंत्र तैयार किया जा रहा है। नियमों की अनदेखी करने पर विधेयक में प्रोजेक्ट लागत का 10 प्रतिशत जुर्माना और तीन साल तक जेल का प्रावधान है।
अब बिल्डर्स को कुछ जरूरी सूचनाएं अपने उपभोक्ताओं को मुहैया करानी होंगी, जैसे वास्तविक कार्पेट एरिया बताना होगा। अब तक डेवलपर्स सुपर बिल्ट एरिया दिखाकर फ्लैट बेचते रहे हैं। इसमें कॉमन रास्ता, सीढ़ियां और अन्य एरिया शामिल होते हैं, जो बेची जा रही संपत्ति का 30 प्रतिशत हिस्सा होता है। उपभोक्ताओं को आमतौर पर वास्तविक कार्पेट एरिया नहीं बताया जाता। बिल में इस संबंध में स्पष्ट निर्देश है, ताकि किसी सामान्य व्यक्ति को भी वास्तविक कार्पेट एरिया के बारे में जानकारी मिल सके।
इसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रोजेक्ट लॉन्च होने से पहले बिल्डर को सभी तरह की मंजूरी लेनी होगी। बहुत से बिल्डर खरीदारों को लुभाने के लिए फ्लैट्स की लॉन्चिंग से पहले मोटे डिस्काउंट का लालच देते हैं। जबकि उपभोक्ताओं को प्रोजेक्ट से जुड़ी कानूनी मंजूरियों और डिलिवरी में होने वाली देरी के बारे में नहीं बताया जाता। फ्लैट डिलिवरी के बाद अगर उसमें कोई खामी पाई जाती है, तो बिल्डर का दायित्व है कि वह बिना अतिरिक्त चार्ज लिए सर्विस मुहैया कराए। बिल के प्रावधानों के मुताबिक, खरीदारों को एक साल के भीतर कमियों के बारे में डेवलपर्स को सूचना देनी होगी।
रियल एस्टेट सेक्टर में सुधारों की दिशा में यह बिल बेहतर शुरुआत है, जिसके बाद धीरे-धीरे निवेशकों और उपभोक्ताओं के बीच अधिकारों एवं दायित्वों को संतुलित आधार मिलेगा, जो इस क्षेत्र के टिकाऊ विकास को गति प्रदान करने में मददगार होगा। राज्य सरकारों को भी इस दिशा में अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। राज्य सरकारों को जटिल एवं भ्रष्ट तंत्र में सुधार करना होगा, ताकि पूरी प्रक्रिया को सरल तथा पारदर्शी बनाया जा सके। इसके लिए सरकार को बेहतर एवं साफ-सुथरे नियामक नियुक्त करने होंगे और अच्छे व प्रभावशाली संस्थागत ढांचे के विकास एवं क्षमता निर्माण पर जोर देना होगा। जैसा कि ज्यादातर कानूनों के साथ होता है, सिर्फ कानून बनाकर भूल जाने से काम नहीं चलेगा।
लेखक रियल एस्टेट विनियमन एवं विकास बिल से जुड़ी संसदीय प्रवर समिति के सदस्य रहे हैं।