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चर्चा: एक गंभीर शोध ग्रंथ है नीरजा चौधरी की पुस्तक- प्रधानमंत्री कैसे फैसले लेते हैं

आनंद कुमार
Updated Sun, 03 Sep 2023 06:54 AM IST

सार

नीरजा चौधरी की उल्लेखनीय किताब - चालीस बरस की पत्रकारिता के अनुभवों के आधार पर छह प्रधानमंत्रियों के फ़ैसलों की अंदरुनी कहानियों के पीछे की कहानियां...
 
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How Prime Ministers Decide - फोटो : सोशल मीडिया


नीरजा चौधरी की पत्रकारिता में न फतवा रहा न विलाप। वह ऐसी पत्रकार रहीं, जिसका सत्ता संसार में बड़े-छोटे सबसे घनिष्ठ संबंध था और वो लगातार बना रहा। इस किताब में भी यही रंग निखरा है -

कबीरा खड़ा बाज़ार में

मांगे सबकी खैर।

ना काहू से दोस्ती

ना काहू से बैर।


लेकिन इस गुण के बावजूद, उन्होंने किसी भी प्रधानमंत्री के मूल्यांकन से परहेज़ नहीं किया है। इसलिए अगर इंदिरा गांधी की कहानी में उनका साम-दाम-दंड-भेद से सत्ता में 1980 में वापसी सबसे उल्लेखनीय सच दिखा, तो राजीव राज में सांप्रदायिकता का जड़ें जमाना, सबसे भारी भूल लगी। इसके समानांतर विश्वनाथ प्रताप सिंह दूरगामी निर्णयों के लिए और नरसिंह राव आत्मघाती निर्णय के लिए चिन्हित किए गए हैं। एक ने सिर्फ तात्कालिक चुनौतियां पहचानी, तो दूसरे की आंखों में सिर्फ दीर्घकालिक सरोकार थे। इस अनूठी किताब में अटल बिहारी वाजपेयी का बम विस्फोट का निर्णय बेमेल दिखता है और मनमोहन सिंह का अमेरिका के साथ पारमाणविक ऊर्जा समझौता अप्रत्याशित हिम्मत के उदाहरण के रूप में गिना गया है।


ढेर सारे स्रोत और अनेकों टिप्पणियां इस रचना को एक जानकार पत्रकार की नोटबुक की बजाय एक गंभीर शोध ग्रंथ के जैसे पढ़े जाने की मांग करती हैं। लेकिन इसमें एक प्रवाह है जो बिना पूरी किताब को पढ़े आपको चैन नहीं लेने देगा।

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