सबसे कटु और विवादास्पद राष्ट्रपति चुनाव में विजयी हुए जो बाइडन इस समय ध्रुवीकृत और विभाजित अमेरिकी समाज में मरहम लगाने वाले सही व्यक्ति प्रतीत होते हैं, जो सबको सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं। बाइडन ने जो कुछ कहा है, वह भारत समेत पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक है। अमेरिका में कोविड-19 से करीब 2.35 लाख अमेरिकियों की मौत हो गई और अब भी रोज करीब एक लाख लोग संक्रमित हो रहे हैं, लिहाजा महामारी से लड़ना बाइडन की शीर्ष चुनौती होगा। उम्मीद के अनुरूप उन्होंने अपने कोविड-19 टास्क फोर्स की घोषणा की, जिसमें भारतीय-अमेरिकी विवेक मूर्ति की अध्यक्षता में दर्जन भर से ज्यादा शीर्ष वैज्ञानिक शामिल हैं।
संभावना है कि बाइडन ओबामा हेल्थ केयर को लागू करेंगे, जिसके वह अभिन्न अंग थे और जिससे वैक्सीन लाने में मदद मिलेगी। कोविड-19 से अमेरिकी अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। वह 1930 के दशक के बाद सबसे बदतर मंदी का सामना कर रही है और 3.2 करोड़ अमेरिकी बेरोजगार हैं। बाइडन के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है। उन्हें पूरी अर्थव्यवस्था को खोलना होगा और कोविड संक्रमितों की संख्या को न्यूनतम रखने के लिए सभी प्रोटोकॉल का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
भारत के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने के प्रति वहां डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों दलों की सहमति है, पर दोनों दल चीन के खिलाफ हैं। करीब 65 फीसदी अमेरिकी कोविड-19 के कारण चीन के प्रति नकारात्मक धारणा रखते हैं। ट्रंप का आरोप था कि चीनी तकनीकी कंपनियों ने गोपनीय जानकारियां चुराई और चीन दक्षिण चीन सागर में आक्रामकता दिखा रहा है। ऐसे में, बाइडन चीन के साथ व्यापार असंतुलन कम करने के लिए बीजिंग पर दबाव बनाए रख सकते हैं। राष्ट्रपति का पदभार संभालते ही बाइडन चुनावी वादे के मुताबिक पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते में फिर से शामिल होंगे। अगर बराक ओबामा ने नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के साथ मिलकर काम नहीं किया होता, वह समझौता अस्तित्व में नहीं आता।
यथार्थवादी बाइडन को एहसास होगा कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन के मोर्चे पर प्रगति तब तक नहीं होगी, जब तक कि अमेरिका नेतृत्व की जिम्मेदारी नहीं लेता और दूसरे सबसे बड़े प्रदूषक चीन के साथ कुछ हद तक समझौते नहीं करता। बाइडन विश्व स्वास्थ्य संगठन में फिर से शामिल होने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। बाइडन और कमला हैरिस के भाषणों के बाद उनके परिवार उनके साथ जा मिले, जो बताता है कि बाइडन के लिए परिवार कितना महत्वपूर्ण है। यह आव्रजन संबंधी उनकी नीति को प्रभावित करेगा। सिलिकॉन वैली से आने वाली कमला हैरिस जानती हैं कि अमेरिकी टेक दिग्गजों के लिए तकनीकी विशेषज्ञ कितने महत्वपूर्ण हैं, इसलिए एच-1 बी वीजा के मुद्दे पर कुछ लचीलेपन की उम्मीद की जानी चाहिए।
भारत के लिए बाइडन अजनबी नहीं हैं; उन्होंने 2013 में आधिकारिक तौर पर उपराष्ट्रपति के रूप में भारत का दौरा किया था और 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के लिए दोपहर के भोजन की मेजबानी की थी। इससे पहले विदेशी मामलों की सीनेट समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को भारत पर लगे प्रतिबंधों को खत्म करने के लिए लिखा था, तथा 2008 में सीनेट द्वारा भारत अमेरिकी असैन्य परमाणु समझौते को मंजूरी दिलाने में भी उनकी अहम भूमिका थी। वर्ष 2013 की शुरुआत में उपराष्ट्रपति बाइडन ने कहा था, 'वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में भारत का उदय 21 वीं सदी की सबसे शक्तिशाली कहानियों में से एक है। हमारी सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग
वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। भारत दक्षिण एशिया का आर्थिक केंद्र है। हम अफगानिस्तान में भारत की भूमिका का दृढ़ता से समर्थन करते हैं। हम भारत की पूर्व की नीति को क्षेत्रीय सहयोग में एक महत्वपूर्ण तत्व के रूप में देखते हैं।'
ट्रंप ने एशियाई प्रशांत क्षेत्र को भारत-प्रशांत में बदल दिया, ताकि भारत के महत्व पर जोर दिया जा सके और चीन को विरोधी करार दिया जा सके। वर्ष 2013 में बाइडन ने कहा था, 'एशियाई प्रशांत क्षेत्र में भारत, चीन और अमेरिका सभी महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। हमें हमारे सामान्य आर्थिक और सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।' इसलिए अगर बाइडन भारत-प्रशांत मुद्दे पर चीन विरोधी बयानबाजी को कुछ हद तक नरम करें, तो आश्चर्य नहीं। भले ही वह ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को तुरंत न हटाएं, पर वह ईरान के साथ परमाणु समझौते, जॉइंट कंप्रिहेंसिव ऐक्शन प्लान को पुनर्जीवित कर सकते हैं। वह ईरान-अमेरिका संबंधों में जमी बर्फ को पिघलाने के पक्ष में भी होंगे। बाइडन की विदेश नीति में ‘तत्व’ की तुलना में ‘शैली’ में बदलाव अधिक होगा।
जब ट्रंप ने कहा था कि भारत की हवा बहुत गंदी है, तब बाइडन ने कहा था कि यह मित्रों से बात करने का सही तरीका नहीं है। इसलिए वह अपने समकक्षों के बयान को नहीं काटेंगे, बल्कि दूसरे देशों के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिए ट्विटर के बजाय पारंपरिक कूटनीतिक चैनल का इस्तेमाल करेंगे। बौद्धिक संपदा अधिकार, आयात शुल्क, डाटा संरक्षण और स्थानीयकरण, डिजिटल सेवा कर, डब्ल्यूटीओ और जीएसपी जैसे मुद्दों पर बाइडन द्वारा ट्रंप की नीतियों को पलटने की संभावना नहीं है। अगर बाइडन ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप में फिर से शामिल होते हैं और भारत पर उसके अनुपालन का दबाव बनाते हैं, तो भारत को अपनी टैरिफ व्यवस्था बदलनी होगी।
कमला हैरिस बाइडन प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जो भारत-अमेरिकी संबंधों के लिए अच्छा संकेत है। और जो लोग सोचते हैं कि बाइडन एलएसी पर चीन की आक्रामकता के खिलाफ भारत के पक्ष में कुछ नहीं बोलेंगे, वे गलत हैं। अपने प्रचार के दौरान उन्होंने सीमा पर चीन की आक्रमकता की कड़ी निंदा की थी। सौभाग्य से भारत में अभी नेतृत्व परिवर्तन की संभावना नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी की जादू की झप्पी जब ओबामा और ट्रंप के साथ काम कर गई, तो निस्संदेह बाइडन के साथ भी काम करेगी।