साधो, इस जमाने में आदमियों के मुकाबले उल्लुओं की कीमत बढ़ती जा रही है। हमें पता था कि कभी उल्लुओं के भी दिन बहुरेंगे। बचपन में मेरे पिता अकसर ताना मारते हुए मुझसे कहते थे कि कब तक उल्लू बने रहोगे। उनके सुझाव पर मैंने उल्लू की स्थिति से थोड़ा उबरने की कोशिश की। लेकिन आज मुझे पछतावा हो रहा है कि मैंने ऐसा क्यों किया। उल्लू बना रहता, तो लाखों में खेलता। मैंने पहले भी कभी उल्लुओं से नफरत नहीं की, बल्कि वे मुझे हमेशा सहोदर प्रतीत हुए। मेरे शहर में उल्लुओं की संख्या पर्याप्त है, पर वे सब बड़े ओहदों पर विराजमान हैं, और मैं उनके सामने उल्लू साबित हो रहा हूं।
उल्लू और लक्ष्मी का संग-साथ कुछ सोच-समझकर ही बना होगा। कई वर्ष पहले एक उल्लू ने मुझसे कहा था कि तरक्की करनी है, तो हमारी जमात में आ जाओ। निरे आदमी बने रहोगे, तो कुछ हासिल नहीं होगा। उल्लू के मुंह से समझदारी की बात सुनकर पहले तो मुझे उसके उल्लू होने पर संदेह हुआ। फिर मैंने गौर से उसका चेहरा देखा, जो एक तरफ से आदमी और दूसरी ओर से उल्लू का दिखाई पड़ता था। वह जब चाहे अपनी किसी शक्ल का इस्तेमाल कर सकता था।
वह हाई कमान के सामने जाता, तो उल्लू बन जाता। उल्लू दिखने के कई फायदे थे। एक तो लक्ष्मी का वरदहस्त और दूसरे, हाई कमान उल्लुओं को ही पसंद करता था। आदमियों की संख्या वहां बहुत कम थी। जो थे, वे भी उल्लू होने की प्रक्रिया से गुजर रहे थे। हमारे एक मित्र का आकलन है कि उल्लू सरकार चलाने का ज्यादा माद्दा रखते हैं। वे संसद और विधानसभाओं में ज्यादा मीन-मेख नहीं करेंगे और बिना बहस के प्रस्ताव पारित कर लेंगे।
यदि वे सरकार में होंगे, तो जनता को उल्लू नहीं बनाएंगे। मेरे एक दूसरे मित्र को राजनेताओं के चित्र बनाने का बहुत शौक है। पर दुर्भाग्य से वह जिस भी नेता का चित्र बनाते हैं, उसकी शक्ल उल्लुओं सी बन जाती है। मैंने उसे सुझाया कि तुम उल्लू की तस्वीर बनाओ, तो शायद ऐसा न हो। जमाना इतना बदल गया है कि मेरे पड़ोसी ने एक नेता की उल्लू से तुलना कर दी, तो इलाके के सारे उल्लुओं ने एक होकर उसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया। तब से वह भी मेरी तरह जमाने भर के उल्लुओं को सम्मान देने लगे हैं। उल्लुओं को उल्लू कहने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। उल्लुओं की सरकार गठित होने पर सबसे पहले इसी प्रस्ताव पर ध्यान दिया जाएगा।