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तकनीक से पस्त होती दुनिया

डेविड ब्रूक्स Updated Thu, 23 Nov 2017 08:44 AM IST
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बच्चे
कुछ समय पहले तकनीक सबसे अच्छा उद्योग था। हर कोई गूगल, फेसबुक और ऐपल जैसी कंपनियों में काम करना चाहता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से लोगों की मानसिकता बदल गई है। कुछ लोग प्रौद्योगिकी उद्योग को तंबाकू उद्योग जैसा मानने लगे हैं-ऐसे निगम जो अरबों डॉलर की विनाशकारी लत लगाते हैं।


निश्चित रूप से प्रौद्योगिकी उद्योग से जुड़े लोग, जो वास्तव में इस दुनिया को बेहतर बनाना चाहते हैं, इस रास्ते पर जाना नहीं चाहते। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे अपनी कंपनियों को समाज से खारिज होने से बचाने के लिए कोई जरूरी कदम उठा सकते हैं।


बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को लेकर मुख्यतः तीन आलोचनाएं हैं। पहला तो यही कि ये युवाओं को बर्बाद करती हैं। सोशल मीडिया अकेलेपन को खत्म करने का वायदा करता है, पर वास्तव में यह एकांत में वृद्धि करता है। इसके कारण सामाजिक बहिष्कार को लेकर एक तीव्र जागरूकता पैदा होती है। संदेश भेजने वाली तकनीक और अन्य प्रौद्योगिकियां आपको अपने सामाजिक संबंधों पर ज्यादा नियंत्रण प्रदान करती हैं, लेकिन दुनिया के साथ वास्तव में बहुत कम संलग्नता और बहुत कम बातचीत की तरफ प्रवृत्त करती हैं।


जैसा कि जीन ट्विज ने अपनी किताब और आलेखों में दर्शाया है, जबसे स्मार्टफोन का प्रसार बढ़ा है, किशोर उम्र के बच्चों में दोस्तों के साथ बाहर निकलने या डेट पर जाने या फिर कुछ काम करने की दिलचस्पी कम हो गई है। आठवीं क्लास का बच्चा, जो सोशल मीडिया पर हफ्ते में दस घंटे से ज्यादा समय बिताता है, उसके उन बच्चों के मुकाबले 56 फीसदी ज्यादा नाखुश रहने की संभावना होती है, जो कम समय व्यतीत करते हैं। आठवीं क्लास का वह बच्चा, जो सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा समय बिताता है, उसके अवसादग्रस्त होने का खतरा 27 फीसदी बढ़ जाता है। जो किशोर दिन में तीन घंटे या उससे ज्यादा समय इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ बिताता है, उसके आत्महत्या करने का 35 फीसदी ज्यादा जोखिम होता है, संभवतः वह यह योजना बनाता है कि इसे कैसे करना है। तकनीक से बहुत ज्यादा प्रभावित लड़कियों ने अवसादग्रस्त लक्षणों में 50 फीसदी वृद्धि का अनुभव किया है।


तकनीक उद्योग की दूसरी खामी यह है कि यह पैसा कमाने की लत पैदा कर रहा है। तकनीकी कंपनियां समझती हैं कि कौन-सी चीज मस्तिष्क में डोपेमीन (आनंददायी रसायन, जो बड़ी संख्या में शारीरिक व मानसिक प्रक्रियाओं में शामिल रहता है) बनने का कारण बनती हैं और वे अपने उत्पादों को ऐसी तकनीक से लैस करती है, जो हमें आकर्षित कर अपनी गिरफ्त में कस लेता है।


स्नैपचैट में स्नैपट्रैक है, जो हर दिन एक दूसरे को स्नैप करने वाले दोस्तों को पुरस्कृत करता है और इस प्रकार नशे की लत को प्रोत्साहित करता है। खबरों को बिना सिर-पैर के तैयार किया जाता है, ताकि एक पेज देखने के बाद आप दूसरा पेज खोलें और इसी तरह अगला पेज, इस तरह यह लत व्यवहार का हिस्सा बन जाती है।


तीसरी आलोचना यह है कि ऐपल, अमेजन, गूगल और फेसबुक लगभग एकाधिकार रखते हैं और अपने उपयोगकर्ताओं के निजी जीवन पर हमले के लिए अपनी बाजार शक्ति का इस्तेमाल करते हैं और सामग्री निर्माता और छोटे प्रतिस्पर्धियों पर अनुचित शर्तें थोपते हैं। इस मोर्चे पर राजनीतिक हमला बढ़ रहा है। वामपंथी विचारधारा के लोग तकनीकी कंपनियों पर इसलिए आक्रमण करते हैं, क्योंकि ये बड़े निगम हैं, जबकि दक्षिणपंथी लोग इन पर इसलिए हमला कर रहे हैं, क्योंकि ये सांस्कृतिक रूप से प्रगतिशील हैं। राष्ट्रीय परिदृश्य पर तकनीकी कंपनियों के रक्षक बहुत कम होंगे।
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जाहिर है, तकनीकी कंपनियों के लिए सबसे बेहतर उपाय है कि वे आगे आएं और अपने प्रदूषण को साफ करें। टाइम वेल स्पेंट के त्रिस्टान हैरिस जैसे कार्यकर्ता हैं, जो तकनीकी दुनिया को सही दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।


बड़ी सफलता तभी मिलेगी, जब तकनीकी अधिकारी अपनी असली सच्चाई को स्वीकार करेंगेः उनकी तकनीक काम और खुशी के लिए बेहद उपयोगी है, जिसे सामान्य चेतना की जरूरत है, लेकिन वे अक्सर सामाजिक बहिष्कार को जन्म देते हैं और चेतना के गहरे स्वरूपों को नष्ट करते हैं, जो लोगों के जरूरी है।


'ऑनलाइन' (इंटरनेट) मानव संपर्क के लिए एक जगह है, अंतरंगता के लिए नहीं। यह सूचना की जगह है, प्रतिबिंब के लिए नहीं। यह किसी व्यक्ति या स्थिति के बारे में आपको पहले रूढ़िवादी विचार देता है, लेकिन तीसरे, पंद्रहवें या तैंतालीसवें विचार के लिए यहां समय और जगह निकालना मुश्किल है। ऑनलाइन खोज की जगह है, लेकिन यह एकजुटता को हतोत्साहित करता है। यह आपका ध्यान खींचता है, लेकिन चीजों को हटाने के लिए उसे विशाल क्षेत्र में फैला देता है। लेकिन हम तब बहुत खुश होते हैं, जब हम पूरे दिल से अपनी तमाम शक्तियों के साथ किसी एक बात पर ध्यान केंद्रित करते हैं।


रब्बी अब्राहम जोशुआ हेचल लिखते हैं कि हम दुनियावी कामकाज से इसलिए अवकाश नहीं लेते हैं कि ज्यादा ताकत के साथ फिर से वापसी करें, बल्कि हम जीवन के निर्णायक क्षणों को जीना चाहते हैं। वह कहते हैं, काल में सातवां दिन वह महल है, जो हम बनाते हैं। यह आत्मा, आनंद और मितव्ययिता से बना है। काम और प्रौद्योगिकी से अलग हम चेतना की एक भिन्न स्थिति में प्रवेश करते हैं, समय और वातावरण के एक अलग आयाम में, एक खान, जहां आत्मा का कीमती धातु पाया जा सकता है।


कल्पना कीजिए कि हमें जीवन की बेहतर चीजें देने का दावा करने के बजाय तकनीक ने खुद को दक्षतापूर्ण उपकरणों के रूप में पेश किया। इसके नवाचार छोटे स्तर के काम में हमारा समय बचा सकते हैं, इसलिए हम ऑफलाइन हो सकते हैं और जीवन में बेहतर चीजों का अनुभव कर सकते हैं। 
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