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टाइम मशीन: सौ साल पहले 1926 में लोग भविष्य के बारे में कैसी चर्चा करते थे? वास्तव में हुआ क्या

आर्मंडो एरिएटा, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: लव गौर Updated Sun, 28 Dec 2025 06:38 AM IST

सार

सौ साल पहले, वर्ष 1926 में दुनिया जिन विषयों पर बात कर रही थी, वे दिलचस्प थे, पर अगर उन्हीं विषयों को 2026 के संदर्भ में देखा जाए, तो यह भी कोई कम रोचक नहीं होगा। इसके लिए मैंने सौ साल पहले के अखबारों की सुर्खियों पर नजर डाली, तो मुझे आश्चर्य हुआ कि तब लोग भविष्य के बारे में कैसी चर्चा करते थे और वास्तव में हुआ क्या।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट


इसी तरह सौ साल पहले, एएम लो की किताब द फ्यूचर में थोड़ी अजीब, पर सच होने वाली भविष्यवाणी की गई थी : ‘भूमिगत ट्रेनों में बैठने की जगह आरामदायक कुर्सियां होंगी, किताबें आसानी से मिल जाएंगी, जबकि दुनिया भर से वायरलेस से मिली ताजा खबरें और तस्वीरें एक स्क्रीन पर दिखाई जाएंगी।’ आइए, देखते हैं कि सौ साल पहले दुनिया और किन चीजों के बारे में बात कर रही थी-


स्क्रीन पर रेडियो: दिसंबर 1926 में जनरल इलेक्ट्रिक के एक इंजीनियर ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की एक सभा में बताया था कि एक शानदार आविष्कार होने वाला है। टेलीविजन (जिसे रोशनी की किरणों से बनी चलती-फिरती तस्वीरें कहा गया था) अब दूर की कौड़ी नहीं रही। शोधकर्ताओं को पूरा भरोसा था कि उनके पास वह सब कुछ है, जिससे वे एक ऐसी तकनीक बना सकते हैं, जिसमें तस्वीरें आवाज के साथ पर्दे पर चल सकें। वैज्ञानिक यह भविष्यवाणी भी कर रहे थे कि टेलीविजन के साथ अंततः ‘टेलीफोन करते समय देखने’ की संभावना भी होगी।

इंसुलिन का वादा : डायबिटीज के इलाज के तौर पर इंसुलिन थेरेपी शुरू होने के चार साल बाद, 1926 में बताया गया कि सही तरीके से इलाज करवाने वालों में इस बीमारी से होने वाली मौतें घट गई थीं। डॉ. जॉन राल्स्टन विलियम्स ने न्यूयॉर्क प्रांत की मेडिकल सोसाइटी को बताया, ‘जीवन की अवधि अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दी गई है।’ एक सदी बाद, आज भी इंसुलिन डायबिटीज से पीड़ित करोड़ों लोगों का सहारा बनी हुई है।


एक सिंथेटिक भविष्य: 1926 में ऐसी खबरें आईं कि अब सिंथेटिक युग आने वाला है और वह दिन दूर नहीं, जब दुनिया कच्चे माल के जुल्म से आजाद हो जाएगी। कहा जा रहा था कि तांबा, सीसा और टिन कुछ दशकों में खत्म हो जाएंगे और परमाणु ऊर्जा दुनिया की ऊर्जा समस्याओं का एक दूरगामी समाधान होगा। लोगों को आश्वस्त किया गया कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि वैज्ञानिक यह पता लगा रहे थे कि वे किसी भी चीज के लिए सिंथेटिक समाधान निकाल सकते हैं, जैसे कि निर्माण में लकड़ी का उपयोग या पेट्रोलियम से रबर उत्पादन। लेकिन तब भी कोई यह मानने को तैयार नहीं था कि एक ऐसा समय आएगा, जब इन्सान तीन बार खाना खाने के बदले तीन गोलियां खाएगा।


नींद की छुट्टी: सितंबर, 1926 में एक उद्योगपति इरेनी डू पोंट ने इस संभावना पर चर्चा की कि एक सिंथेटिक दवा बनाई जा सकती है, जो अंततः नींद की जरूरत को खत्म कर देगी। ऐसी दवा ‘थकान पैदा करने वाले जहर को तुरंत बेअसर कर सकती है, जिसे अभी सिर्फ सोकर ही खत्म किया जाता है, जिसमें चौबीस घंटे में से सात या आठ घंटे बर्बाद हो जाते हैं।’ लेकिन आज स्थिति यह है कि दुनिया भर में लोग अनिद्रा की बीमारी का इलाज ढंूढ रहे हैं।


तबाही की भविष्यवाणी: जर्मनी में जन्मे अमेरिकी भविष्यवक्ता रॉबर्ट रीड्ट (जिसे तबाही का पैगंबर कहा जाता था) ने भविष्यवाणी की थी कि मैं न्यूयॉर्क शहर के वूलवर्थ बिल्डिंग के लिए पांच सेंट भी नहीं दूंगा, क्योंकि आसमान से आग का एक गोला गिरेगा, जो न्यूयॉर्क शहर को तबाह कर देगा। लेकिन आधुनिक शहरी नियोजन के अग्रणी थॉमस एडम्स ने कहा कि न्यूयॉर्क शहर और भविष्य के दूसरे शहर आज के बड़े शहरों की तुलना में ‘ज्यादा सुंदर और आरामदायक होंगे।’ एडम्स ने बड़े पैमाने पर उपनगरीकरण की जो भविष्यवाणी की थी, वह आज काफी हद तक सही दिख रही है।
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गगनचुंबी इमारतें: 1926 में मैनहट्टन में दुनिया की सबसे ऊंची इमारत, 108-मंजिला लार्किन टॉवर की योजनाओं की घोषणा के बाद, उसके निर्माण और नुकसान के बारे में सवाल उठाया गया था कि क्या इतनी ऊंची, भीड़भाड़ वाली इमारत परिवहन व्यवस्था पर बहुत ज्यादा दबाव नहीं डालेगी? मशहूर वैज्ञानिक थॉमस एडिसन ने भी एक इंटरव्यू में कहा कि ऐसी ऊंची इमारतों के कारण होने वाली भयानक भीड़ आखिरकार नीचे सड़कों पर ट्रैफिक को जाम कर देगी, जो आज के समय में भी सही साबित हो रहा है।


एयरलाइन की शुरुआत: 1926 तक दुनिया भर में व्यावसायिक उड़ानों का एक नया दौर शुरू हो गया था। कहा जाने लगा था कि उड़ने की कोई सीमा नहीं होती और एयरलाइंस की वजह से अमेरिका, यूरोप, रूस, भारत और ऑस्ट्रेलिया सभी एक-दूसरे के करीब महसूस कर रहे थे। पहली दैनिक एक्सप्रेस फ्लाइट में लंदन और पेरिस के बीच एक पायलट और दो यात्रियों को ले जाने के लगभग सात साल बाद, 1926 में इस रूट पर एयरलाइंस 20 यात्रियों तक को ले जा सकती थीं। उड़ान इतनी तेजी से आधुनिक हो रही थी कि कहा जाने लगा कि आने वाले समय में, यात्री 10 दिन से भी कम समय में पूरी दुनिया का चक्कर लगा पाएंगे।


हर गैरेज में एक विमान: सितंबर 1926 में कहा जाने लगा कि विमान सुरक्षा में तरक्की से एक दिन हवाई यात्रा पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगी। एक विमान निर्माता कंपनी ने तो यहां तक दावा किया कि हवाई जहाज इतने सुरक्षित और इतनी सही कीमत पर बनाए जाएंगे कि जिसके पास कार है, वह विमान खरीद पाएगा। अभी इसकी संभावना तो कम ही है, लेकिन यह तो है कि हवाई यात्रा अब आम आदमी की पहुंच में आ ही गई है।


सौ साल पहले की इन भविष्यवाणियों को देखते हुए हम सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि दुनिया कितनी बदल गई है। यह अलग बात है कि भोजन का कोई सिंथेटिक विकल्प आज भी हमारे पास नहीं है और लोग अब नींद से छुटकारा नहीं पाना चाहते, बल्कि अनिद्रा की बीमारी का इलाज तलाश रहे हैं। सौ साल पहले की तरह, 2026 को लेकर आज भी लोग उसी तरह भविष्य को लेकर बहसें कर रहे हैं और उम्मीदें जता रहे हैं। जैसे, अगली पीढ़ी युद्ध के सबक सीखेगी व शांति में विश्वास करेगी। कुछ जानलेवा बीमारियां खत्म हो जाएंगी। अर्थव्यवस्थाएं समृद्ध हो सकती हैं। नया साल भू-राजनीतिक तनाव कम करे और युद्धों से सबक लेकर शांति, सद्भाव और सहयोग को बढ़ावा दे।
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