उम्र बढ़ने के साथ लोगों का कम खाना आम बात है। उदाहरण के लिए, शोधकर्ताओं ने पाया कि 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों ने वयस्कों की तुलना में 16 से 20 प्रतिशत कम कैलोरी ली। बड़ा सवाल यह है कि ऐसा क्यों होता है।
ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पिटल की इंटरनिस्ट डॉ. मार्गरेट मैनस का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाले हार्मोनल बदलाव आपकी भूख पर असर डाल सकते हैं। शोध से पता चला है कि युवा लोगों की तुलना में बुजुर्गों में ‘घ्रेलिन’ हार्मोन कम बनता है। यह वही हार्मोन है, जिससे भूख लगती है। एक और शोध से पता चला है कि उम्र बढ़ने के साथ लोग दो और हार्मोन (लेप्टिन और कोलेसिस्टोकिनिन) अधिक बनाते हैं, जिनसे पेट भरा हुआ महसूस होता है। इसी वजह से वे कम खाते हैं।
पेन स्टेट में न्यूट्रिशनल साइंसेज की प्रोफेसर बारबरा रोल्स ने कहा कि इस बात के भी कुछ प्रमाण हैं कि उम्र बढ़ने के साथ पेट धीरे-धीरे खाली होता है। इसकी वजह से, खाने के बाद व्यक्ति को दोबारा भूख लगने में अधिक समय लग सकता है। टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में न्यूट्रिशन के प्रोफेसर रोजर ए फील्डिंग ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ लोगों की मांसपेशियां कम होने लगती हैं, जो वसा की तुलना में ज्यादा कैलोरी बर्न करती हैं, इसलिए उन्हें कम खाना खाने की जरूरत होती है। डॉ. रोल्स ने कहा कि समय के साथ हमारी सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता कम हो सकती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर खाने का स्वाद या महक अच्छी न हो, तो आपका उसे कम खाने का मन करता है।
बुजुर्ग अक्सर अकेले खाना खाते हैं, जिससे हो सकता है कि वे कम खाएं। अध्ययनों से पता चला है कि जब लोग दूसरों, खासकर दोस्तों और अपनों के साथ खाना खाते हैं, तो वे अधिक खाते हैं। भूख जगाने के लिए विशेषज्ञ नियमित रूप से एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं। जब आप कैलोरी बर्न करते हैं, तो आपका शरीर खाने के जरिये उन्हें फिर से पाना चाहता है। अगर आप कम खा रहे हैं और आपको लगता है कि शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, तो संतुलित आहार लें।
डॉ. रोल्स ने कहा कि सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता में कमी को दूर करने के लिए जड़ी-बूटियों और मसालों के साथ नए प्रयोग करने की कोशिश करें। अपने खाने में नींबू का रस निचोड़ें या उसमें हॉट सॉस मिलाएं। खाने में थोड़ा तो नयापन लाएं।