पहली बार आम बजट फरवरी के आखिरी दिन के बजाय एक फरवरी को पेश किया जा रहा है। नोटबंदी के दर्द पर मरहम लगाने के परिप्रेक्ष्य में पिछले बजटों की तुलना में यह बजट कुछ उदार हो सकता है। इसमें नोटबंदी के प्रमुख लक्ष्यों-कालेधन की रोकथाम, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने और आर्थिक गतिविधियों में नकदी का चलन कम करने के प्रयास दिख सकते हैं। योजनागत और गैर योजनागत की अपेक्षा केंद्र का व्यय राजस्व और पूंजीगत व्यय में वर्गीकृत किया जा सकता है।
अर्थव्यस्था कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है। उद्योग-कारोबार, निर्यात और निजी निवेश के मोर्चे पर सबसे ज्यादा मुश्किलें हैं। बड़े मूल्य के नोटों को वापस लेने के चलते उद्योग-कारोबार पर असर पड़ा है, लिहाजा ब्याज दरों में कटौती की अपेक्षा है। चूंकि एक ओर बाजार मांग की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। लोगों के पास चीजें और सेवाएं खरीदने के लिए पर्याप्त रुपये नहीं है। वहीं दूसरी ओर निवेश और मांग की कमी के कारण उद्योग-कारोबार की रफ्तार नहीं बढ़ने से नौकरियां घटी हैं। नए बजट में कौशल विकास, ढांचागत विकास, श्रम कानून और भूमि अधिग्रहण के लिए व्यापक सुधार दिखाई दे सकते हैं।
बजट में नोटबंदी के दर्द पर मरहम लगाने के मद्देनजर किसान, निम्न-मध्यम वर्ग और युवा वर्ग के लिए विशेष राहतकारी योजनाएं हो सकती हैं। इसके साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पेयजल जैसे क्षेत्रों पर भी निवेश में वृद्धि अपेक्षित है। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए तीन गुना बजट आवंटित किया जा सकता है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के लिए भी एक नई योजना की घोषणा की जा सकती है। वहीं किसानों के लिए कर्ज भुगतान अवधि और ब्याज दर में ढील भी अपेक्षित है। नए बजट के तहत मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए आवंटन बढ़ाया जा सकता है। इस बार रेल बजट भी आम बजट का ही हिस्सा होगा, ऐसे में बजट में रेलवे के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के लिए विशेष बढ़ा हुआ आवंटन दिखाई दे सकता है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च रिपोर्ट ईकोरैप में कहा गया है कि सरकार नए बजट में प्रत्यक्ष करों में फेरबदल कर सकती है। छोटे आयकरदाताओं की क्रय शक्ति बढ़ाकर मांग में वृद्धि करने के मद्देनजर आयकर छूट की सीमा बढ़ाए जाने की अपेक्षा की जा रही है। वित्त मंत्री से अपेक्षा की जा रही है कि ढाई लाख रुपये की जो छूट सीमा है, उसे बढ़ाकर तीन लाख रुपये किया जाए तथा धारा 80 सी के तहत मिलने वाली डेढ़ लाख रुपये की छूट को बढ़ाकर दो लाख रुपये किया जाए। नए बजट में या तो टैक्स स्लैब बढ़ाई जा सकती है या फिर सबसे निचले स्लैब के लिए टैक्स रेट घटाई जा सकती है। इससे अधिक लोग टैक्स चुकाने के दायरे में आएंगे।
मौजूदा दौर में वैश्विक मंदी को मात देने के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में नरमी बरती जा सकती है। ऐसे समय जब प्रमुख विकसित और विकासशील देश सरकारी खर्च बढ़ा रहे हैं, तब भारत के लिए भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ना सही होगा। नए बजट के तहत सरकार राजकोषीय घाटे की चिंता छोड़कर ग्रामीण विकास, बुनियादी ढांचा और सामाजिक क्षेत्र पर व्यय और पूंजीगत व्यय बढ़ाने के मद्देनजर राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.5 फीसदी तक रख सकती है। उम्मीद है वित्त मंत्री अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाए रखेंगे और आम आदमी की मुश्किलें कम करेंगे।