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कॉप-16: थोथे सम्मेलनों से तो पृथ्वी बचने से रही, संरक्षण की ठोस पहल का दिखा अभाव

हेरिएट बुल्केले Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 09 Nov 2024 07:43 AM IST

सार

जैव विविधता शिखर सम्मेलन, कॉप-16 में दो हफ्ते तक चर्चा तो कई विषयों पर की गई, लेकिन प्रकृति संरक्षण को लेकर जिस ठोस पहल की उम्मीद थी, वह पूरी होती नहीं दिखी।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI


इस सम्मेलन की शुरुआत इस चिंताजनक खबर से हुई कि खतरे में पड़ी प्रजातियों के आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि एक तिहाई से अधिक वृक्ष प्रजातियां जंगल में विलुप्त होने के कगार पर हैं। यह संख्या खतरे में पड़े पक्षियों, स्तनधारियों, सरीसृपों और उभयचरों की कुल संख्या से भी अधिक है। शहर के बीचों-बीच, कॉप-16 के ग्रीन जोन में जीवंत संगीत, फिल्म स्क्रीनिंग, स्वदेशी कला और शिल्प का आयोजन किया गया। स्थानीय लोगों, व्यवसायों और सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने प्रकृति संकट से निपटने के लिए रचनात्मक और सहयोगात्मक तरीकों पर चर्चा की। इस सम्मेलन में जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंधों तथा जल व खाद्य सुरक्षा के लिए प्रकृति के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।


 यह सुनिश्चित करने के लिए एक नए कोष पर सहमति बनी कि इन समूहों को देसी पौधों और जानवरों की आनुवंशिक जानकारी के वाणिज्यिक उपयोग से लाभ का एक हिस्सा प्राप्त होगा, यह एक और जीत थी। आर्थिक लचीलेपन पर पहले से कहीं ज्यादा ध्यान दिया गया, जिसमें दो दिन व्यापार और वित्त के लिए समर्पित थे। 2018 में मिस्र में सिर्फ 300 व्यवसायों ने कॉप-14 में भाग लिया था, लेकिन कैली में इनकी संख्या 3,000 थी। निजी निवेशकों, पेंशन फंड, बीमा उद्योग और सार्वजनिक बैंकों ने जैव विविधता में सुधार के लिए मजबूत उपाय करने पर जोर दिया।


प्रकृति के तकनीक क्षेत्र में 2024 के अंत तक स्टार्ट-अप द्वारा दो अरब डॉलर तक के निवेश को आकर्षित करने की उम्मीद है। जैव विविधता की रक्षा के लिए 196 राष्ट्रीय योजनाओं में से मात्र 44 को ही नए लक्ष्यों को दर्शाने के लिए अपडेट किया गया। इसलिए हैरानी नहीं कि मौजूदा वास्तविकता और 23 लक्ष्यों के महत्वाकांक्षी समूह के बीच अंतर बढ़ रहा है, जिसे सरकारों को 2030 तक हासिल करना होगा। हालांकि सभी देश 2026 में प्रगति की समीक्षा के लिए सहमत हुए हैं, लेकिन संकेतकों पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई। कई विकासशील देशों को चिंता थी कि जलवायु संकट और जैव विविधता के बीच अधिक एकीकरण से वित्तपोषण की जिम्मेदारी दोहरी हो जाएगी, जिससे विकसित देश अपने वादों से पीछे हट सकते हैं। कॉप-16 के अंतिम क्षणों में वार्ताकार एक समझौते पर पहुंचे, जो जलवायु और प्रकृति पर एक साथ कार्रवाई करने के लिए एक अधिक एकीकृत मार्ग निर्धारित करता है। प्रकृति-आधारित समाधान (पीटलैंड और वेटलैंड्स को बहाल करने, पेड़ और मैंग्रोव लगाने जैसे उपाय) उस लचीलेपन का निर्माण करने में मदद करते हैं।


कई राष्ट्राध्यक्षों और मंत्रियों ने इस पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि प्रकृति को न केवल अपने लिए, बल्कि उन समुदायों के लिए भी संरक्षित किया जाए, जो अपनी आजीविका और कल्याण के लिए स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्रों पर निर्भर हैं। लेकिन अंततः इसको लेकर न तो कोई ठोस कार्ययोजना थी और न ही प्रकृति संरक्षण के भुगतान को लेकर वित्तीय प्रतिबद्धताएं थीं, जिसकी सम्मेलन में उपस्थित कई लोगों को उम्मीद थी।

(द कन्वर्सेशन से)

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