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उनका हाथ उनका निजी मामला

Wed, 26 Nov 2014 08:33 PM IST
राजेंद्र शर्मा
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इस्तीफा मांगने वालों को इस्तीफा मांगने का बहाना चाहिए। भाई लोगों ने अब मानव संसाधन विकास मंत्री के इस्तीफे की मांग कर दी है। आखिर क्यों? उन्होंने राजस्थान जाकर एक ज्योतिषी से अपना भाग्य जो बंचवाया है! कह रहे हैं कि जिस शिक्षा मंत्री के हाथों में करोड़ों बच्चों का भाग्य है, जब वह खुद ही ज्योतिषियों से अपना भाग्य बंचवा रही हैं, तो बच्चों के भाग्य का क्या होगा?
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वैसे हमें पक्का भरोसा है कि मंत्री जी की कुर्सी कहीं जाने वाली नहीं है। उनकी पार्टी को इस्तीफा मांगने का खूब अनुभव है। अपनी पारी में उसने खूब इस्तीफे मांग रखे हैं। उससे बेहतर कौन जानेगा कि इस्तीफा सिर्फ मांगने के लिए होता है, लेने-देने के लिए नहीं! पर इस्तीफा मांगने वालों ने तो अपनी तरफ से बेचारे ज्योतिषी के पेट पर लात मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उधर बेचारे ज्योतिषी जी ने आगे और उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य पढ़कर सुनाया और इधर भाई लोग मंत्री जी के मौजूदा करियर में ही पलीता लगाने पर उतर आए!

लोगों को प्रॉब्लम किस चीज से है? शिक्षा मंत्री का अपना हाथ बंचवाने से या उनका ज्योतिषी से हाथ बंचवाने से? मंत्री जी ने सही कहा, उनका हाथ उनका निजी मामला है, चाहें तो हर रोज ज्योतिषी से पढ़वाएं या फिर बिना पढ़ा ही छोड़ दें। रही बात ज्योतिषी से हाथ पढ़वाने की, तो इसके लिए शिक्षा मंत्री की तारीफ की जानी चाहिए कि वह सिर्फ साक्षरता को बढ़ावा देने का नाटक नहीं कर रहीं।
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कहीं इस्तीफे का शोर इसलिए तो नहीं मच रहा है कि भाग्य बांचने को अंधविश्वास का मामला मान लिया गया है। सिर्फ हस्तरेखाएं पढ़ने का मामला होने से इसे वैज्ञानिक सोच का विरोधी कैसे मान लिया जाएगा? इस तरह के विवादों को खत्म करने के लिए बहुत जरूरी है कि मंत्री जी अपने पूर्ववर्ती द्वारा शुरू किए गए ज्योतिष के विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रमों में नए प्राण फूंकें। तब हम भी यह देखेंगे कि कौन इसे बच्चों का भविष्य बिगाड़ना कहने की हिम्मत करता है!
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