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हलीमा याकूब श्रम आंदोलनों से संसद अध्यक्ष तक

Fri, 18 Jan 2013 09:08 PM IST
हेमेन्द्र मिश्र
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सिंगापुर में एक महिला हलीमा याकूब को संसद की कमान सौंपे जाने का इसलिए भी प्रतीकात्मक अर्थ है, क्योंकि वहां की राजनीति में औरतें कम हैं। भारतीय मूल की इस महिला को सभापति चुने जाने के बाद राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि सत्तारूढ़ पीपुल्स ऐक्शन पार्टी ने 'महिलाओं की बेहतरी की दिशा में पहला कदम' उठाया है।
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लेकिन याकूब की नियुक्ति की वजह उनका महिला होना ही नहीं है। दरअसल सियासत में पांव रखने से पहले याकूब 30 वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय श्रम आंदोलनों से जुड़ी रही हैं। आर्थिक उदारीकरण के कारण रोजगार के लिए जूझ रहे लोगों को उनका हक दिलाने के लिए उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी है। यही कारण है कि उनके पद संभालने के बाद प्रधानमंत्री ली सेन लूंग ने कहा कि व्यावहारिक और 'सहानुभूति की मूर्ति' याकूब के निर्वाचन के बाद देश की राजनीति का मानवीय पक्ष और उभरकर सामने आएगा।

कानून में मास्टर डिग्री हासिल करने वाली याकूब दोस्तों के बीच 'श्रम कानूनों का चलता-फिरता शब्दकोश' के रूप में चर्चित हैं। राजनीति में आने के बाद भी यह पुराना ज्ञान और अनुभव उनके काम आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी याकूब को जब राज्य मंत्री बनाया गया था, तब आईएलओ द्वारा घरेलू श्रमिकों की स्थिति में सुधार के लिए लाए जाने वाले कन्वेंशन में उनसे मदद मांगी गई और उन्हें वापस बुलाने की पेशकश भी की गई। शायद उनका यही अनुभव आज भी उन्हें श्रमिक-नेत्री की मान्यता दिलाता है।
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अल्पसंख्यक मलय जाति से वास्ता रखने वाली हलीमा पश्चिमी क्षेत्र की पांच सदस्यीय जुरोंग समूह का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनका राजनीतिक सफर भले छोटा है, लेकिन उपलब्धियां बहुत बड़ी हैं। करीब दशक भर पहले जब वह सियासत में उतरीं, तब तुदुंग (मलयेशिया की मुस्लिम औरतों द्वारा सिर ढकने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला स्कार्फ) पहनने वाली वह अकेली महिला थीं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा है, जब मैं लोगों से मिलती थी, तब मुझे लगता था कि वे यह सोचते होंगे कि मेरे स्कार्फ के नीचे क्या है? लेकिन मैं उन्हें यह दिखाने की कोशिश करती थी कि उनके प्रति मेरे दिल में क्या है? और आज उनकी यही कोशिश बुजुर्गों की तेजी से बढ़ती आबादी वाले इस देश में लीक से हटकर स्वतंत्र रूप से काम करने वाली नेत्री के रूप में उन्हें पहचान दिला रही है।
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