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गुजरात बहुत कुछ तय करेगा

तवलीन सिंह Updated Mon, 18 Dec 2017 11:42 AM IST
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चुनाव तो केवल गुजरात विधानसभा के थे, लेकिन ऐसा लगा, जैसे लोकसभा चुनाव हो रहा था। ऐसा लगा, जैसे प्रधानमंत्री स्वयं चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे थे। पिछले तीन वर्षों में शायद ही किसी दूसरे विधानसभा चुनाव में उन्होंने इतना प्रचार किया हो। आज जब गुजरात के परिणाम आएंगे, तो एक तरह से वह नरेंद्र मोदी के राजनीत्क भविष्य का ही फैसला होगा।


जिस प्रदेश में भाजपा बाईस साल से सत्ता में है, वहां अगर वह शानदार जीत हासिल करती है, तो साबित हो जाएगा कि मोदी की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। लेकिन अगर कांग्रेस उसकी बीस सीटें भी कम कर पाती है, तो कांग्रेस के मुख्यालय में ढोल-नगाड़े बजने लगेंगे। ऐसा इसलिए कि पहली बार ऐसा लगने लगेगा कि 2019 में नरेंद्र मोदी की जीत तय नहीं है।


यह चुनाव इतना महत्वपूर्ण था कि प्रचार के अंतिम दिनों में प्रधानमंत्री के भाषणों में  एक अजीब कड़वाहट आ गई थी। विकास और परिवर्तन के मुद्दे ताक पर रखकर प्रचार में पाकिस्तान को घसीटा गया। बिना यह सोचे कि ऐसा कर अपने इस दुश्मन देश को बेकार में अहमियत दी जा रही है प्रधानमंत्री ने खुद कहा कि पाकिस्तान इस चुनाव में हस्तक्षेप कर रहा है। इसको साबित करने में कांग्रेस के उसी वरिष्ठ नेता ने सहायता की, जिसने 2014 में कहा था कि 21वीं सदी में मोदी कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकेंगे, है, कांग्रेस के दफ्तर में अगर वह चाय बेचना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है। मणिशंकर अय्यर के मुंह से ये शब्द निकले ही थे कि मोदी ने चाय पे चर्चा अभियान शुरू किया, जिससे उनकी लोकप्रियता दोगनी हो गई थी।  इस बार मणिशंकर अय्यर ने न सिर्फ प्रधानमंत्री के लिए नीच शब्द बोला, बल्कि अपने घर में एक भोज रखा, जिसमें एक पूर्व पाकिस्तानी विदेश मंत्री से मिलने हमारे एक पूर्व प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति और पूर्व सेनाध्यक्ष पहुंचे।


नरेंद्र मोदी ने यह बेबुनियाद इल्जाम लगाया कि उस डिनर पार्टी में उनको गुजरात में हराने का षड्यंत्र रचा गया था। यह इल्जाम इतना गंभीर था कि मनमोहन सिंह इतने क्रोधित हुए कि उन्होंने नरेंद्र मोदी से क्षमा मांगने के लिए कहा। इन सब घटनाओं के बीच राहुल गांधी ने याद दिलाया कि चुनाव गुजरात का था, सो मुद्दे गुजरात के उठने चाहिए। तब तक चुनाव की शक्ल बदल चुकी थी। सो अब क्या होगा? सीधी-सी बात है। भाजपा की अगर फिर शानदार जीत होती है, तो मोदी और शक्तिशाली हो जाएंगे और अगले दो वर्षों में आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में परिवर्तन और विकास लाने की रफ्तार बढ़ जाएगी। अभी तक सुधार लाने में जो कमी रही है, प्रधानमंत्री उसे पूरा करके दिखाएंगे। देश के लिए इससे अच्छी बात नहीं हो सकती।


लेकिन आज के परिणाम से अगर कांग्रेस पार्टी फिर से जीवित होती है, जैसी कि कई राजनीतिक पंडितों की भविष्यवाणी है, तो अगले दो वर्षों में संभव है कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, वहां राम मंदिर, गोरक्षा और लव जेहाद जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए।


सो जहां 2014 का लोकसभा चुनाव परिवर्तन और विकास के मुद्दों को लेकर लड़ा गया था,  वहीं यकीन के साथ कहा जा सकता है कि 2019 में हिंदुत्व के भगवा झंडे को हाथ में लेकर मोदी अपनी पार्टी को चुनावी मैदान में उतारेंगे।


हो सकता है कि भाजपा को हिंदुत्व के आधार पर पूर्ण बहुमत दोबारा न मिले, लेकिन देश को बहुत नुकसान होगा। इस लिहाज से गुजरात का चुनाव इतना महत्वपूर्ण है कि हम भूल ही गए हैं कि चुनाव हिमाचल प्रदेश में भी था।
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