फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

नई ऊंचाई की ओर इसरो: कामयाबी से आत्मविश्वास, लेकिन जश्न का समय कम; अंतरिक्ष में हर सफलता अगली चुनौती की जमीन

अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: न्यूज डेस्क Updated Sat, 05 Sep 2026 08:59 AM IST

सार

जीएसएलवी-एफ17 का सफल प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए सामान्य उपलब्धि नहीं। इसरो की ताजा कामयाबी निश्चित ही आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है, लेकिन जश्न मनाने का समय कम है, क्योंकि अंतरिक्ष में हर सफलता अगली चुनौती की जमीन तैयार करती है
विज्ञापन
विज्ञापन
इसरो के उपग्रह का प्रक्षेपण - फोटो : इसरो-अमर उजाला ग्राफिक्स-एआई


यह कामयाबी ऐसे वक्त में मिली है, जब 2025 और जनवरी, 2026 में इसरो के प्रमुख प्रक्षेपण रॉकेट पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल, यानी पीएसएलवी को विफलताओं का सामना करने के बाद भारत की प्रक्षेपण क्षमता पर सवाल उठाए जा रहे थे। ऐसे में, सारी जिम्मेदारी जीएसएलवी मार्क-2 पर आ गई, जिसे इसरो का ‘नॉटी बॉय’ कहा जाता है।


दरअसल, इसे यह नाम इसके मिश्रित प्रदर्शन को देखते हुए मिला है। हालांकि यही रॉकेट भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के सबसे महत्वपूर्ण प्रतीकों में से भी एक है। ईओएस-05 का सफल प्रक्षेपण इसलिए भी अहम है, क्योंकि पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह अब भारत की विकास जरूरतों का हिस्सा बन चुके हैं।


कृषि से लेकर जल संसाधन प्रबंधन, मौसम की निगरानी से लेकर आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक, अंतरिक्ष से मिलने वाले आंकड़ों का उपयोग बढ़ रहा है। प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति व जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच यह क्षमता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।


पृथ्वी से करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित ईओएस-05 किसी निश्चित क्षेत्र की लगातार निगरानी कर डाटा उपलब्ध कराने में सक्षम होगा। यानी जहां सामान्य पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह समय-समय पर किसी क्षेत्र की तस्वीर देते हैं, यह लगातार निगरानी की क्षमता बढ़ाएगा। यही नहीं, इससे पाकिस्तान व चीन सहित संवदेनशील और रणनीतिक क्षेत्रों पर नजर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।


हाल के वर्षों में भारत ने अपनी अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं का दायरा भी बढ़ाया है। चंद्रयान और मंगलयान जैसे अभियानों ने भारतीय वैज्ञानिक क्षमता की वैश्विक पहचान मजबूत की है। इसरो के सामने चालू वित्त वर्ष में छह और मिशन हैं। मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भी आगे बढ़ रही हैं।


ऐसे में, प्रक्षेपण प्रणालियों की विश्वसनीयता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसरो की ताजा कामयाबी निश्चित ही आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है, लेकिन यह जश्न मनाने का समय कम है, क्योंकि अंतरिक्ष में हर सफलता अगली चुनौती की जमीन तैयार करती है और हर विफलता उससे सीखने का अवसर देती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next