फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

लड़ाई लंबी चलेगी: गूगल को तोड़ना बड़ी गलती होगी... इन अहम और सही सवालों पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी

हर्बर्ट हॉवनकैंप, लॉ व व्हार्टन प्रोफेसर Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 30 Nov 2024 06:16 AM IST

सार

90 फीसदी से ज्यादा ऑनलाइन सर्च पर दबदबा रखने वाले गूगल के एकाधिकार पर अंकुश लगाते हुए बाजार में प्रतिस्पर्धा पैदा करना एक बात है, लेकिन बाजार को विकसित होने का समय दिए बगैर इसे कमजोर करने की बड़ी कीमत इंटरनेट की विशाल व समृद्ध दुनिया से जुड़े उद्यम व उपभोक्ताओं को ही चुकानी पड़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
गूगल को तोड़ना बड़ी गलती - फोटो : अमर उजाला


अमेरिकी अदालत का फैसला

अमेरिका की एक स्थानीय अदालत ने इस साल की शुरुआत में फैसला सुनाया था कि गूगल ने, जिसका 90 फीसदी से ज्यादा ऑनलाइन सर्च पर एकाधिकार है, उत्पादों पर डिफॉल्ट सर्च इंजन बनाने के लिए एपल जैसे निर्माताओं को भुगतान करके अवैध रूप से एकाधिकार बना रखा है। हाल ही में इस मामले में कुछ प्रस्ताव रखे गए, जिनके अनुसार, गूगल को न केवल डिफॉल्ट (कंप्यूटर में पड़ा पहले का कार्यक्रम, जो तब तक सक्रिय रहता है, जब तक कि उसे निर्देश देकर बदला नहीं जाए) स्टेटस के लिए दूसरों को भुगतान करना बंद करना होगा, बल्कि उसे अपने लोकप्रिय वेब ब्राउजर क्रोम को भी बेचना होगा। साथ ही गूगल को उत्पादों पर डिफॉल्ट सर्च इंजन बनाने से भी रोक दिया जाएगा और सर्च परिणामों में अपने उत्पादों को प्राथमिकता देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


अविश्वास कानून के प्रावधान

अविश्वास कानून के इन प्रावधानों का मकसद प्रतिस्पर्धी बाजार को बढ़ावा देना है। ये प्रावधान गलती करने वाले को दंडित करने के लिए नहीं, बल्कि एकाधिकार के प्रभावों को दुरुस्त करने के लिए लाए जा रहे हैं। याद रहे कि किसी सफल कानून की परीक्षा यह है कि क्या इससे बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाता है, उत्पादन बढ़ जाता है या उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव मिलता है। इस मुद्दे पर न्याय विभाग ने इन कानूनों का औचित्य पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं किया है। दरअसल, गूगल मुकदमे में कुछ प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा नहीं की गई। पूरक उत्पादों को विभाजित करने से अक्सर खराब गुणवत्ता वाले परिणाम और उच्च समन्वय लागतें सामने आती हैं, इन दोनों का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा।


कैसे हो सकते है नतीजे..

यदि सरकार को इच्छित चीजें मिल जाती हैं, तो वह कुछ ऐसी विशेषताओं को हटा सकती है, जिन्होंने गूगल उत्पादों को इतना सफल बनाया है और इसका परिणाम एक दोषपूर्ण प्रणाली के रूप में सामने आ सकता है, जिसमें नतीजे तो घटिया आएंगे ही, उपयोगकर्ताओं को भी सामान्य से ज्यादा मशक्कत करनी पड़ेगी। इतिहास हमें बताता है कि सामान्यत: अदालतें किसी उद्योग के पुनर्गठन को लेकर कमजोर साबित हुई हैं। अक्सर वे कंपनियों को कम प्रतिस्पर्धी बना देती हैं।


सफलता का रिकॉर्ड 

सफलता का रिकॉर्ड विशेष रूप से उन अत्यधिक नवोन्मेषी कंपनियों के मामले में खराब है, जो गूगल की तरह अधिग्रहण के बजाय मुख्य रूप से आंतरिक विकास के माध्यम से विकसित हुई हैं। वर्ष 1911 में स्टैंडर्ड ऑयल के टूटने पर इतनी छोटी-छोटी कंपनियां बनीं कि वे अपनी पूर्ववर्ती कंपनी की तरह कुशलता से काम नहीं कर सकीं, जो मुख्य रूप से बढ़ती मांग के कारण गैसोलीन की कीमत में वृद्धि से मेल खाती थीं। वर्ष 1968 में यूनाइटेड शू मशीनरी को विभाजित करने के तत्काल बाद उसे एक स्वतंत्र इकाई के रूप में बंद कर दिया गया।


न्यायाधीश का निष्कर्ष

अपने पहले के फैसले में न्यायाधीश ने निष्कर्ष निकाला कि गूगल का बाजार पर एकाधिकार कुछ हद तक इस कारण है कि वह हार्डवेयर निर्माताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए बड़ी रकम का भुगतान करता है कि उनके उत्पादों पर उसके उत्पाद का डिफॉल्ट विकल्प हो। अगर लोग चुनने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र होते, तो गूगल संभवतः यूरोपीय संघ में सबसे लोकप्रिय विकल्प होता। यहां के देशों में गूगल के एंड्रॉइड सिस्टम में उपयोगकर्ताओं को ब्राउजरों में से चुनने के लिए कहना जरूरी होता है। हालांकि मजे की बात यह है कि उनमें से ज्यादातर गूगल सर्च को ही चुनते हैं।


किसी कंपनी को बलपूर्वक तोड़ने के बजाय आम तौर पर सबसे ज्यादा सुरक्षात्मक उपाय गैरकानूनी आचरण के खिलाफ निषेधाज्ञा है। इस मामले में अदालत अपने उत्पाद को डिफॉल्ट बनाने के लिए गूगल की ओर से हार्डवेयर निर्माताओं को किए जाने वाले बड़े भुगतान पर रोक लगा सकती है। यह वैसा ही होगा, जैसा दो दशक पहले माइक्रोसॉफ्ट मामले में हुआ था। इस मामले में एक साधारण निषेधाज्ञा की समस्या यह है कि गूगल की बड़ी बाजार हिस्सेदारी के कारण यह अनिश्चित है कि कोई प्रतिद्वंद्वी कभी उसकी बराबरी कर पाएगा या नहीं।
विज्ञापन


इसके अलावा, सरकार एक अतिरिक्त निषेधाज्ञा चाहती है, जिसके तहत गूगल को अपने सर्च डाटा के भंडार को प्रतिद्वंद्वियों को 10 साल के लिए लाइसेंस देने की आवश्यकता होगी। ऐसा डाटा सर्च के लिए महत्वपूर्ण है और बताता है कि उपयोगकर्ता वास्तव में क्या ढूंढ रहे हैं। एक ही डाटाबेस से कई फर्मों द्वारा सर्च की पेशकश करना कुछ हद तक ज्यादा ट्रैवल एजेंट बनाकर एयरलाइन प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने जैसा है। बेशक इससे टिकट बिक्री में प्रतिस्पर्धा पैदा होती है, लेकिन एयरलाइनों को प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद नहीं मिलती। इस तरह की व्यवस्था से अन्य सर्च फर्मों को उभरने में मदद मिल सकती है, हालांकि अभी वे अपना खुद का बुनियादी ढांचा ही तैयार कर रही हैं।


इन कंपनियों को होगा लाभ

गूगल के विशेष अनुबंधों पर रोक लगाने के लिए तैयार कानून का लाभ एपल और खासकर माइक्रोसॉफ्ट को अपने बीमार सर्च इंजन बिंग को उभारने में मिल सकता है। फिर बिंग को भी माइक्रोसॉफ्ट के कई उपकरणों और ब्राउजरों पर डिफॉल्ट के रूप में रखा जा सकता है, जिससे उसे सर्च इंजन राजस्व मिलेगा, जो अन्यथा गूगल को प्राप्त होता। विशिष्टता को खत्म करने से भविष्य में प्रतिस्पर्धा के लिए कई रास्ते खुलते हैं, खासकर तेजी से विकसित हो रहे बाजारों में, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी नई तकनीकों को अपना रहे हैं। बेहद नवोन्मेषी बाजारों में बने-बनाए ब्रांड का टूटना खतरनाक होता है, क्योंकि इसके परिणामों का पूर्वानुमान लगाना बहुत कठिन होता है। खैर, यह लड़ाई लंबी चलेगी। 2025 की गर्मियों से पहले कोई फैसला आने की संभावना नहीं है और निश्चित रूप से अपील की जाएगी। इस बीच पक्षकारों को सही सवालों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए- कौन-सा उपाय वास्तव में गैरकानूनी आचरण से निपटेगा और अधिक प्रतिस्पर्धी, उपभोक्ता-अनुकूल खोज बाजार की ओर ले जाएगा?
विज्ञापन
विज्ञापन
Next