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जरा लेट हैं अच्छे दिन

Mon, 01 Jun 2015 07:42 PM IST
राजेंद्र शर्मा
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अफवाहों पर ध्यान न दें। अच्छे दिन आ रहे हैं और बहुत जल्दी आ रहे हैं। बस थोड़ा-सा लेट चल रहे हैं। एक जरा-सा सालगिरह का फंक्शन क्या मिस हो गया, भाई लोगों ने न जाने कैसी-कैसी अफवाहें फैलानी शुरू कर दीं। कोई कह रहा है कि अच्छे दिनों के आने का प्रोग्राम कैंसिल हो गया है, तो कोई कह रहा है कि जिनके अच्छे दिन आने थे, आ चुके। बुरे दिन आने की शिकायतें भी सुनाई देने लगी हैं। कुछ लोगों ने तो बाकायदा अच्छे दिनों की बरसी भी मना डाली है। पर ये सब विरोधियों की फैलाई गई अफवाहें हैं। अच्छे दिन स्वस्थ और सानंद हैं। वे आ रहे हैं। बस, गाड़ी जरा-सी लेट हो गई है। बुलेट ट्रेन चलने में अभी टैम जो है।
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यह भी अफवाह ही है कि अच्छे दिनों के मामले में सरकार पल्टी मार गई है। आलोचक कह रहे हैं कि पहले तो खुद प्रधानमंत्री हाथ उठवा-उठवाकर लोगों से कहलवाते थे कि अच्छे दिन आ गए, लेकिन अब साल भर बाद कह रहे हैं कि अच्छे दिन अभी अग्रसर ही हैं। यह भी तो खुदरा व्यापार में एफडीआई जैसी ही पल्टी है। देखिए साहब, यह पल्टी-वल्टी कुछ नहीं, भ्रम फैलाने की विरोधियों की सोची-समझी कोशिश है। वर्ना कौन नहीं जानता है कि साल भर पहले तो नई सरकार के अच्छे दिन आए थे। पब्लिक के अच्छे दिन तो उसके बाद ही आने थे। इसमें पल्टी मारने की क्या बात है?

हद यह है कि प्रधानमंत्री ने बर्थडे के मौके पर बुरे दिनों के खत्म होने की बात क्या कही, उसमें भी भाई लोगों ने अच्छे दिनों के न आने का इशारा खोज लिया। बुरे दिन खत्म होने में लगने वाला टैम भी तो अच्छे दिनों की यात्रा के टैम में जुड़ना है। ऐसे में कुछ डिले तो बनता है। मोदी जी ने बस डिले की सफाई दी है। जब बुरे दिन खत्म हो गए, तो अच्छे दिनों को आने से कौन रोक सकता है? साठ बरस इंतजार किया है, तो थोड़ा और धीरज रखें। बल्कि प्रधानमंत्री ने अब सीधे-सीधे कह डाला है कि अच्छे दिन आ गए हैं। फिर भी कोई यकीन न करे, तो कोई क्या कर सकता है!
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