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गोल्डन गर्ल ऑफ फिक्शन

Fri, 18 Oct 2013 07:39 PM IST
हेमेन्द्र मिश्र
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न्यूजीलैंड के उत्तरी और दक्षिणी द्वीप में श्रेष्ठता की 'जंग' दिलचस्प है। उत्तरी द्वीप साहित्यिक-सांस्कृतिक रूप से संपन्न है, तो दक्षिणी द्वीप प्राकृतिक सौंदर्य का स्वामी, इसलिए दोनों द्वीपों के बाशिंदे खुद को बीस मानते हैं।
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लेकिन इस बार के मैन बुकर पुरस्कार की घोषणा होते ही विश्लेषकों के लिए इस जंग का फैसला करना आसान हो गया है! केरी हुलमे (1985 में द बोन पीपल के लिए मैन बुकर पुरस्कार) के बाद न्यूजीलैंड की जिस एलिनोर कैटन को साहित्य का यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है, वह भी संयोग से दक्षिणी द्वीप से ही आती हैं।

हालांकि कैटन दक्षिणी द्वीप की पैदाइश नहीं हैं। करीब दो दशक पहले जब एक अनिवासी अमेरिकी परिवार यहां बसने के लिए आया था, तो उसकी सबसे छोटी सदस्य एलिनोर खुश नहीं थी। उसे टेलीविजन और कार के बिना जीवन सूना लगता था, लेकिन दर्शनशास्त्र के अध्यापक पिता की 'मजबूरी' भी वह समझती थी।
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ऐसे में, खुशी की तलाश ही कैटन को वेस्ट कोस्ट क्षेत्र के उन खदानों के अवशेषों के करीब ले आई, जो 19वीं सदी में न्यूजीलैंड का स्वर्ण क्षेत्र माना जाता था। उन्हीं अवशेषों को समझने की ललक द लुमिनरीज उपन्यास की शक्ल में सामने आई है, जिसने एलिनोर को मैन बुकर पुरस्कार जीतने वाली सबसे कम उम्र की लेखिका बना दिया है।

हालांकि द लुमिनरीज जब प्रकाशक के हाथों में पहुंची थी, तो उसने इसे 'डरावना सपना' माना था। इसकी वजह थी, किताब की बनावट और उसके कथ्य। लिहाजा इसमें कई तरह के संपादकीय सुझाव दिए गए, लेकिन जैसा कि एलिनोर कहती हैं, वैसा करना संभव नहीं था। नतीजतन यह मैन बुकर के इतिहास में सबसे अधिक पृष्ठ (832 पेज) वाला उपन्यास बन गया।

एलिनोर के दोनों उपन्यासों (स्कूल के सैक्स स्कैंडल पर आधारित पहला उपन्यास द रिहर्सल था) का आधार बचपन की यादें हैं, पर इनमें वह खुद कहीं नहीं है! मसलन, द लुमिनरीज में ही सोने के पीछे भागने वाली एलिनोर असल जिंदगी में रुपये को महत्व नहीं देतीं।

उनके लिए जीवन का अर्थ है, पढ़ना और लिखना, क्योंकि इसी से 'खुद का परिचय' होता है। लेकिन क्या इस आत्म साक्षात्कार में जीवन तलाशा जा सकता है! एलिनोर कहती हैं, अच्छे दोस्तों की फौज और 'गोल्डन गर्ल ऑफ फिक्शन' के रूप में मिली शोहरत आखिर देन तो इसी की है।
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- हेमेन्द्र मिश्र
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