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रेत पर यह पैरों के निशान किसके हैं, इंसान, शैतान या भगवान के?

Wed, 06 May 2015 12:26 PM IST
जिंद अलामा
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एक यहूदी फकीर रेत पर चला जा रहा था। जब वह काफी आगे तक चला आया, तो सहसा उसकी नजर पीछे की ओर गई। वह देखकर हैरान रह गया कि उसके अकेला चलने के बावजूद पीछे-पीछे चार पैरों के निशान थे। आश्चर्य से फकीर इधर-उधर देखने लगा। उसे जब कोई नहीं दिखा, तो वह सोचने लगा, जब मैं मुसीबत में था, तो कोई बात तक करना पसंद नहीं करता था। तब रेत पर केवल मेरे पैरों की ही छाप होती थी। तब ईश्वर ने भी साथ छोड़ दिया था। आज सुखी और प्रसन्न हूं, तो वह मेरे साथ-साथ चला आ रहा है।
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यह विचार आते ही उसे आकाशवाणी सुनाई दी, नहीं, बेटा। तुम गलत सोच रहे हो। जब तू सुख में होता है, तो मैं तेरे साथ चलता हूं। ऐसे में दो पांव के निशान तुम्हारे और दो मेरे। मुसीबत में जब तुझे सब छोड़ गए थे, पर मैंने नहीं छोड़ा। उस समय मैं तुम्हें अपनी गोद में लेकर चलता रहा। तुम्हें मां जैसा प्यार और वात्सल्य देता रहा। तुम्हें सुख की छांव देता रहा। उस दुख के समय तुम्हारे पांव के निशान तो रेत पर पड़े ही नहीं। मैं तुझसे कभी विमुख नहीं हुआ, छोटी-सी मुसीबत में भी नहीं।

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कुछ ठहरकर फकीर के कानों से फिर से आवाज टकराई, हां, लेकिन इतना अवश्य याद रखना कि मुसीबत और पीड़ा में कभी हिम्मत न हारना। यह न कहना कि मेरे साथ कोई नहीं है। मैं हर पल तुम्हारे साथ हूं। दुख और पीड़ा जीवन का अंग है, यदि तुम उन्हें धैर्य और शांतिपूर्वक हल करोगे, तो जीवन में सफलता पाओगे, और यदि विचलित होकर गलत मार्ग पर बढ़ोगे, तो मेरी गोद से गिर पड़ोगे, और फिर तुम्हें मैं नहीं बचा पाऊंगा। मैं तब तक तुम्हारे साथ हूं, जब तक तुम नेकी, ईमानदारी और मेहनत से अपना काम करते हो।
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