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G20: जम्मू-कश्मीर को मिली वैश्विक पहचान, पर्यटन से बढ़ेगा खुशियों का कारवां

मनोज सिन्हा
Updated Sat, 27 May 2023 07:30 AM IST

सार

प्रधानमंत्री ने चार साल पहले बदलाव की जो पटकथा लिखनी शुरू की थी, उसका वास्तविक स्वरूप जी-20 की ऐतिहासिक बैठक में नजर आया। श्रीनगर में हुई विदेशी प्रतिनिधियों की इस बैठक ने साबित कर दिया कि जम्मू-कश्मीर का दुखद अतीत बीत गया है और उसकी यात्रा में खुशियों का कारवां जुड़ गया है।
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G20 Meet in Srinagar - फोटो : संवाद


मुझे स्मरण है, अगस्त 2020 में प्रधानमंत्री जी ने जब मुझे जम्मू-कश्मीर का कार्यभार सौंपा था, तब बदलाव की बयार परिधि पर थी और उसके केंद्र पर जड़ता हावी थी। हमने जम्मू-कश्मीर के नव-निर्माण के लिए हर क्षेत्र में बदलाव को केंद्र बनाया। तब से लेकर आज तक सतत और सजग प्रयासों ने अवाम की सुप्त आशा और आकांक्षा को जगाने का काम किया है। जी-20 की मीटिंग के दौरान पूरे केंद्र शासित क्षेत्र में दिवाली एवं ईद जैसा माहौल इस बात का गवाह है कि जम्मू-कश्मीर की कई पीढ़ियों को इस बदलाव का इंतजार करना पड़ा। इस पूरे आयोजन में आम नागरिकों की उत्कंठा, वैश्विक आकांक्षाओं से जुड़ने की अभिलाषा साफ झलक रही थी। जी-20 प्रतिनिधिमंडल के आगमन के साथ नागरिकों, समाज के प्रबुद्ध वर्गों की आपसी सहज मित्रता एवं अपनेपन की गहराई में सिर्फ आध्यात्मिक रिश्ते एवं सांस्कृतिक मूल्यों का आदान-प्रदान नहीं था, बल्कि तरक्की की ऊंचाइयों को छू रहे विश्व के साथ एक होने की प्रबल एवं प्रगाढ़ इच्छा भी थी।


यह भावना तीन दिवसीय उत्सव के दौरान अलग-अलग रूपों में प्रकट हुई। जम्मू-कश्मीर की नई पीढ़ी के नौजवानों ने श्रीनगर शहर में नाइट लाइफ का आनंद उठाते हुए वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं और उन्होंने लिखा कि कई पीढ़ियां बदलाव के इस दृश्य से महरूम रह गई थीं। उनके शब्दों में सपने और अरमान थे। उनकी बातों से एक संदेश साफ था कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के सबसे प्रमुख और ताकतवर मंच का जम्मू-कश्मीर में आगमन उनके जीवन में बदलाव की आहट है।


एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य के विजन पर आधारित जी-20 की भारत की अध्यक्षता में देश के अलग-अलग हिस्सों में अब तक हुई बैठकों में जहां व्यापक सामाजिक-आर्थिक मुद्दे एवं एजेंडा केंद्र में थे, वहीं जम्मू-कश्मीर में सतत, ग्रीन तथा फिल्म पर्यटन के अलावा अवाम के अंदर वैश्विक मंच पर अंतरंग संबंध तथा नई आकांक्षाओं के साथ तालमेल बनाने की प्रबल इच्छा भी साफ दिखाई दे रही थी। वर्षों तक जम्मू-कश्मीर में पड़ोसी मुल्क द्वारा प्रायोजित आतंकवाद ने अवाम की इन आकांक्षाओं को दबाकर रखा था। लेकिन प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में पिछले तीन वर्षों के निरंतर प्रयासों की वजह से एक ऐसा परिवेश तैयार किया गया है, जहां एक सामान्य नागरिक पड़ोसी मुल्क के दुष्प्रचारों से प्रभावित हुए बिना और भय-मुक्त होकर न सिर्फ अपनी ख्वाहिशों को जाहिर कर रहा है, बल्कि शांति, समृद्धि और सम्मान का जीवन आज उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।


मात्र आंकड़े जमीनी हकीकत का मापदंड नहीं हो सकते। झेलम रिवरफ्रंट पर रात के वक्त बेखौफ सैर करना और पोलो व्यू हाई स्ट्रीट पर संगीत कार्यक्रम भी जमीनी बदलाव एवं विकास को प्रतिबिंबित करते हैं। जी-20 देशों के प्रतिनिधियों के सम्मान में अवाम का स्वयं आगे आकर स्वागत करना और अपने हुनर के मुताबिक शहर के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रमों का आयोजन जम्मू कश्मीर के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है। तारीख इस बात की गवाह है कि छोटे से छोटे आयोजनों के दौरान भी पूरे जम्मू-कश्मीर में कर्फ्यू का माहौल हो जाता था। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि इतने बड़े आयोजन के बावजूद न सिर्फ जन-जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, बल्कि शैक्षणिक और व्यापारिक गतिविधियां भी पूरे जोशो-खरोश पर थीं। पड़ोसी मुल्क ने इस आयोजन के खिलाफ तमाम साजिशें कीं, लेकिन वे सफल नहीं हो सकीं और न ही जनता बहकावे में आई। अब जन सामान्य आतंक की इंडस्ट्री चलाने वाले पड़ोसी मुल्क के मंसूबों को भली-भांति समझने लगा है।  


पिछले तीन वर्षों में जम्मू कश्मीर में सामाजिक-आर्थिक बदलाव और तरक्की की ऐतिहासिक रफ्तार ने आम आदमी के भीतर नया आत्म-विश्वास पैदा किया है। प्रशासन के संकल्पों में उनका विश्वास जुड़ गया है। इसलिए जी-20 के इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के साथ अवाम के सभी वर्गों एवं प्रशासन के बीच नए रिश्ते की एक नई यात्रा की शुरुआत हुई है। विश्वास पर आधारित प्रशासनिक प्रणाली द्वारा सभी सेक्टर्स में हो रहे अभूतपूर्व बदलाव का असर है कि आज कमजोर से कमजोर वर्ग भी अपने आप को विकास की मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस कर रहा है। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते नेटवर्क और उद्योगों के रचनात्मक विस्तार द्वारा जम्मू-कश्मीर में अवसरों की मजबूत नींव तैयार की गई है।


आतंकवाद की ताबूत में कील ठोककर नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण, सुरक्षित और शांतियुक्त भविष्य की स्थापना की गई है। कृषि, हस्तशिल्प और हॉर्टिकल्चर जैसे क्षेत्रों में जम्मू-कश्मीर परंपरागत ज्ञान के उपयोग से सफलता के शिखर छूने का प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर तथा ग्राम स्वराज के माध्यम से शहरी और ग्रामीण आबादी को एक-दूसरे के नजदीक लाया गया है। जी-20 की बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर के आम नागरिकों ने इस बात को भी महसूस किया कि वसुधैव कुटुंबकम का मूल-मंत्र ही बहुविध समाज की समस्याओं का समाधान कर सकता है। अतुल्य भारत का ताज जम्मू-कश्मीर आज नई दिशा एवं नई संभावनाओं के साथ 21वीं सदी की विश्व व्यवस्था में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन में योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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-लेखक जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल हैं

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