पिछले सप्ताह पहली बार मैं गोरखपुर गई। वहां जाने का एक ही मकसद था। मैं योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता का राज समझना चाहती थी। जब योगी जी को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री घोषित किया गया था, तब मैं भी उन लोगों में से थी, जिन्हें लगा था कि भाजपा ने गलत फैसला लिया है। इस राज्य में भाजपा की शानदार जीत के पीछे विकास और परिवर्तन की आशाएं थीं। हिंदुत्व के नाम पर वोट नहीं पड़ा था। योगी जी हिंदुत्व के कट्टर सिपाही होने के लिए ज्यादा जाने जाते हैं, विकास के लिए कम। ऊपर से उत्तर प्रदेश सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता है। योगी आदित्यनाथ राम जन्मभूमि आंदोलन में आगे रहे हैं और इनके कई बयान ऐसे आए हैं, जो साबित करते हैं कि राजनीति में आने का उनका मुख्य उद्देश्य हिंदुओं को संगठित और सशक्त करना है।
यह बात जब मैंने अपने कुछ पत्रकार दोस्तों को कही, तो उन्होंने मुझे गोरखपुर जाने का सुझाव दिया, ‘योगी जी इस चुनाव क्षेत्र से पांच बार जीत चुके हैं। ऐसा करना आसान नहीं है। उन्होंने जरूर अपने चुनाव क्षेत्र में अच्छा काम किया होगा।' पत्रकार दोस्तों की ये बातें जेहन में रखकर मैं गोरखपुर गई। वहां का हवाई अड्डा इतना पुराना था कि लगा, किसी सरकारी दफ्तर के आंगन में उसे बनाया गया हो। एक स्थानीय व्यक्ति ने मुझे बताया कि नया हवाई अड्डा बन गया है, पर उसका उद्घाटन अभी नहीं हुआ है। न भी बना होता, तो इसका दोष योगी जी का नहीं, क्योंकि किसी सांसद के कहने पर नया हवाई अड्डा नहीं बनता।
जिस सड़क से हम शहर के अंदर गए, उसके दोनों तरफ गंदा पानी था। पर यह जानकर, कि उस दिन बारिश हुई थी, मैंने इसकी अनदेखी की। गोरखपुर के अंदरूनी हिस्से में पहुंच कर मैंने पाया कि शहर इतना गंदा, इतना बेहाल था कि दशकों से सांसद होने के नाते योगी अगर चाहते, तो इन चीजों में सुधार ला सकते थे। उत्तर प्रदेश के तमाम शहर बेहाल हैं, पर गोरखपुर की हालत उनसे भी ज्यादा खराब लगती है। गोरखनाथ पीठ के आसपास इतनी सफाई दिखती है कि ऐसा लगता है कि हम किसी दूसरे शहर में पहुंच गए हों।
मंदिर में दर्शन करने के बाद मैंने योगी जी की साफ-सुथरी गौशाला देखी, हिंदू युवा वहिनी का दफ्तर देखा और योगी जी की अन्य संस्थाओं का दौरा किया। यह सब देख दिल खुश हुआ। पर मैं जब गोरखपुर शहर के अंदर लौटी, तो फिर से निराश हुई। गंदी नालियां और सड़ते कूड़े के पहाड़ देखकर याद आया कि गोरखपुर जापानी इंसेफ्लाइटिस के लिए जाना जाता है। इस बीमारी से हर वर्ष अनेक बच्चे मरते हैं। इस रोग से जूझने के लिए योगी जी ने अपना भी अस्पताल खोला है। पर जब तक गोरखपुर की गंदगी कम नहीं होती, तब तक हजारों अस्पताल खुल जाने का कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। योगी जी ने अपनी हिंदू युवा वहिनी को ही यह काम सौंपा होता, तो आम नागरिक भी इस नेक कार्य से जरूर जुड़ जाते। पर अभी तक हिंदू युवा वहिनी का ध्यान लव जेहाद और घर वापसी के कामों में लग रहा है।
गोरखपुर के सांसद अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए हैं, सो राज्य के सारे शहरों को स्वच्छ बनाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। आगरा, लखनऊ और बनारस जैसे शहर अगर थोड़ा साफ दिखने लगें, तो विदेशी पर्यटक इतनी तादाद में आने लगेंगे कि इन शहरों की गरीबी काफी हद तक दूर हो सकती है। योगी आदित्यनाथ ऐसा कुछ चमत्कार करके दिखाएंगे या हिंदुत्व से जुड़े कार्यों में उलझे रहेंगे, इसी पर उत्तर प्रदेश का भविष्य निर्भर है।