फ्रेडरिक विल्सन नामक व्यक्ति मूल रूप से यॉर्कशायर, इंग्लैंड का था। ईस्ट इंडिया कंपनी की फौज में अफसरी हासिल कर हिंदुस्तान आया था। हालात कुछ ऐसे बने कि अपने ही उच्च अधिकारी की हत्या कर दी। छिपते-छिपाते वह टिहरी के दुर्गम और अनजाने इलाकों में जा पहुंचा, लेकिन उसे इंग्लैंड वापस जाना पड़ा। हालांकि, उसके जुनून ने हिलोर मारी और वह जल्द ही लौट आया। यहां उसने नए सहयोगी तलाशे। माइकल जॉन के नाम से एक बुजुर्ग के घर में शरण ली। बाद में उसकी बेटी राईमत्ता से शादी कर ली। राईमत्ता के निधन के बाद विल्सन ने उसकी ही रिश्तेदार गुलाबो से ब्याह रचाया। उसने वन्यजीवों के शिकार और उनकी खाल का व्यापार शुरू किया। इसके बाद गंग नहर और रेलवे की परियोजनाओं के लिए देवदार की लकड़ी के ठेके लिए।
इतिहास के गुमनाम किरदारों के ख्यात लेखक राजगोपाल सिंह वर्मा ने अपनी किताब फिरंगी राजा में इस अंग्रेज की रोचक दास्तान प्रस्तुत की है। वक्त के साथ विल्सन की सफलता तो दर्ज हो रही थी, उसकी विफलता की इबारत भी लिखी जा रही थी। उसने धन के लालच में टिहरी के समृद्ध जंगलों को नष्ट कर दिया। वहां का प्राकृतिक संतुलन तहस-नहस कर दिया। सबसे अमीर आदमी बनने की राह में आने वालों को तबाह कर दिया। अपने मनमाने व्यवहार की वजह से आज लोग उसे शापित इन्सान के रूप में ज्यादा जानते हैं। तभी तो कहा जाता है कि पहाड़ पर एक गलत कदम इन्सान को गर्त में पहुंचा देता है। स्थानीय लोग कहते हैं- किंवदंतियों और किस्सों में हुलसन (विल्सन) आज भी जिंदा है, लेकिन देवदारों के हत्यारे के रूप में।