न्यूजक्लिक विवाद में कथित आरोप लगे कि इसे चीन से जुड़े स्रोतों से धन प्राप्त हुआ, जिसका उद्देश्य देश में सरकार विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देना था। लोकसभा चुनाव के वक्त माइक्रोसॉफ्ट ने डीपफेक व एआई के गलत उपयोग के जरिये चीन की तरफ से भारतीय चुनावों को लेकर खतरों के प्रति सचेत भी किया था। इस तथ्य को अलक्षित नहीं किया जा सकता कि अमेरिका ने चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के नाम पर जो अनुदान रोका है, वह अब तक किसी न किसी के हाथ में तो जाता रहा ही होगा और किसी न किसी तरह यह खर्च भी होता रहा होगा। विदेशी हस्तक्षेप का अदृश्य हाथ न केवल चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करता है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर खतरा है। लिहाजा जब तक विवरणों की जांच न हो, तब तक आशंकाएं तो बनी ही रहेंगी। इसमें संदेह नहीं कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की पवित्रता की रक्षा करके ही भारत यह सुनिश्चित कर सकता है कि विकास और तरक्की की उसकी राह विदेशी चालों के बजाय अपने ही लोगों की इच्छा से निर्देशित हो। ऐसे में जरूरी है कि सभी राजनीतिक दल देश की संप्रभुता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की रक्षा के लिए एकजुट हों। सरकार व चुनाव आयोग साइबर सुरक्षा व डिजिटल निगरानी बढ़ाएं और आम नागरिक इतने जागरूक तो बनें ही कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं के जाल में न फंसें।