अभी हाल ही में प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 18वीं किस्त जारी की। किसानों की आमदनी बढ़ाने और मध्यम वर्ग के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का फैसला लेते हुए केंद्र सरकार ने कृषि से संबंधित दो योजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें से पीएम-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) का लक्ष्य सतत कृषि को प्रोत्साहित करना है, जबकि कृषोन्नति योजना (केवाई) के तहत खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर आत्मनिर्भरता हासिल की जाएगी। राज्यों के साथ मिलकर केंद्र सरकार इन दो योजनाओं पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करेगी। इन दोनों योजनाओं को एक अंब्रेला स्कीम के रूप में लागू किया जाएगा, जिसके तहत कृषि मंत्रालय की सभी योजनाओं का पुनर्गठन किया जाएगा। इससे देश में खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी, जिससे आने वाले वर्षों में कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, सरकार ने खाद्य तेलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन को भी मंजूरी दी है, जो वित्तीय वर्ष 2031 तक चलेगा। इसका उद्देश्य देश में खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
कृषि मंत्री के मुताबिक, कृषि क्षेत्र में दिखाई दे रही बुनियादी ढांचा, भंडारण, प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक सुविधाओं के लिए सरकार रणनीतिक रूप से आगे बढ़ रही है। कृषि बुनियादी ढांचा कोष (एआईएफ) के तहत कई परियोजनाएं तेजी से पूरी हो रही हैं। पिछले 100 दिनों में, देश में 10,066 से अधिक कृषि-बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनके लिए 6,541 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये अवसंरचनाएं एफपीओ को परिचालन बढ़ाने में सक्षम बना रही हैं, जिससे किसानों और कृषि क्षेत्र को काफी लाभ हो रहा है। एक मजबूत मूल्य आपूर्ति शृंखला स्थापित करने और छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों का समर्थन करने के लिए केंद्र सरकार ने देश के हर ब्लॉक को कवर करते हुए 10,000 एफपीओ के गठन और संवर्धन के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना (सीएसएस) शुरू की है। अब तक, लगभग 9,200 एफपीओ का गठन किया जा चुका है, जिससे 24 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।
इनके साथ-साथ पिछले दिनों सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र की सात बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिन पर कुल 14,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विगत अगस्त में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली के खेतों में जाकर 61 फसलों की 109 नई एवं उन्नत किस्में जारी की गई हैं, उनसे देश में कम जमीन में अधिक पैदावार लेने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकेगी।
निस्संदेह सरकार ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया है और देश में कृषि उन्नयन, खेती में नवाचार को प्रोत्साहन देने, लागत कम करते हुए उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आय बढ़ाने का अभियान चलाया है। सरकार को इस वर्ष बेहतर मानसून का भी फायदा मिला है। लेकिन अभी सरकार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संवारने के लिए कई अहम बातों का ध्यान रखना होगा। सरकार के द्वारा कृषि प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल, कृषि में मशीनीकरण को बढ़ाए जाने, जलवायु अनुकूल कृषि-खाद्य प्रणाली अपनाने, ग्रामीण कच्ची सड़कों को मंडियों से जोड़ने जैसी नीतिगत प्राथमिकताओं के साथ-साथ आपूर्ति शृंखला में सुधार कर महंगाई को नियंत्रित करना होगा। सब्जी और फलों की बर्बादी रोकने के लिए खाद्य भंडारण और वेयरहाउसिंग ऋणों की राशि दोगुनी सुनिश्चित की गई है, पर उसके कारगर उपयोग पर ध्यान देना होगा। हम उम्मीद करें कि सरकार के द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा मजबूत करने के साथ-साथ कृषि एवं ग्रामीण विकास उन्नयन के लिए जो कदम उठाए गए हैं, उससे जहां किसान लाभान्वित होंगे, वहीं कृषि तथा ग्रामीण विकास का नया अध्याय लिखा जाएगा।