फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

बाढ़ और सूखा: जलवायु परिवर्तन के कारण हालात अधिक चिंताजनक, तत्काल उपाय नहीं होने पर देश के सामने गंभीर संकट

अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 19 Dec 2024 06:21 AM IST

सार

सीएसटीईपी की ताजा रिपोर्ट कहती है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से देश के विभिन्न जिलों में बाढ़ व सूखे का खतरा मंडरा रहा है। जोखिम वाले जिलों को लक्षित कर समय रहते तत्काल और समग्र उपाय तो करने ही होंगे, पर नागरिकों की भागीदारी और जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सूखा - फोटो : अमर उजाला


दरअसल, मानसून की अस्थिरता और मौसम चक्र में बदलाव के चलते चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी ही है और पिछले एक वर्ष से तो ये घटनाएं ज्यादा स्पष्ट रूप से सामने आई हैं। धरती के तापमान बढ़ने की बात तो पिछले एक दशक से की जा रही है, लेकिन 2024 ने जिस तरह से गर्मी के पिछले रिकॉर्ड तोड़े, देश में असामान्य बारिश और अब दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की जहरीली हवा से खतरे के दरवाजे तक पहुंचने की आशंका ही पैदा होती है। हालांकि ताजा रिपोर्ट के अध्ययन में दो पैटर्न साफ दिखते हैं, जिसमें पहला तो यह है कि बाढ़ व सूखा जलवायु परिवर्तन से पैदा हो रहे संकटों में सबसे गंभीर हैं, क्योंकि ये मनुष्य को पूरी तीव्रता के साथ सीधे प्रभावित करते हैं। जबकि दूसरा यह कि इन संकटों की भयावहता जिले की आबादी पर निर्भर है, यानी जिन जिलों की आबादी कम है, वहां जोखिम भी कम होगा।


संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट कहती है कि 2050 तक देश की आधी से ज्यादा आबादी शहरों में निवास कर रही होगी। ऐसे में चिंता की बात तो अलबत्ता यह है कि औद्योगीकरण, वनों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ते शहरीकरण ने पर्यावरणीय संतुलन को जिस तरह से बिगाड़ा है, उसमें निकट भविष्य में भी सुधार के कोई संकेत नहीं दिखते। बाढ़ के दौरान शहरों में जल निकासी व्यवस्थाओं की दुर्दशा से विकास के दावों की जैसी पोल खुलती है, वह भी छिपी नहीं है। ऐसे में, जरूरी है कि जोखिम वाले जिलों को लक्षित कर उनके लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की जाए, क्योंकि समय रहते अगर तत्काल और समग्र उपाय नहीं किए गए, तो इन जिलों का संकट पूरे देश के लिए गंभीर साबित हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next