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आशंकाएं बरकरार: टैरिफ पर ट्रंप की धमकी के बीच भारत मिली थोड़ी मोहलत, समय विस्तार से अनिश्चितता बढ़ने का खतरा

अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 09 Jul 2025 08:04 AM IST

सार

ब्रिक्स देशों पर अतिरिक्त टैरिफ की धमकी के बीच अब ट्रंप के टैरिफ की समय-सीमा को बढ़ाने के फैसले से भारत को अंतरिम समझौते के लिए थोड़ी मोहलत बेशक मिल गई हो, लेकिन इससे देशों, बाजारों और निवेशकों में हलचल तो मची ही है। देखने वाली बात यह भी है कि एक महीने से भी कम समय में दर्जनों व्यापार समझौते आखिर पूरे होंगे कैसे?
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टैरिफ पर ट्रंप की नीतियों ने दुनियाभर को परेशानी में डाला - फोटो : अमर उजाला प्रिंट


अब ट्रंप ने एक दर्जन से ज्यादा देशों के साथ व्यापार युद्ध की धमकी को फिर से दोहराते हुए कहा है कि अगर वे एक अगस्त तक व्यापार समझौते पर सहमत नहीं हुए, तो उन्हें अपने निर्यात पर और भी भारी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। दिलचस्प यह है कि विशुद्ध व्यापारी वाले अंदाज में ट्रंप ने अपने दो सबसे करीबी विदेशी सहयोगियों-जापान और दक्षिण कोरिया को भी नहीं बख्शा और उनके आयात पर भी 25 फीसदी का टैरिफ लगा दिया है, जो एक अगस्त से प्रभावी होगा। हालांकि, यह स्थिति भारत के लिए राहत वाली हो सकती है, क्योंकि इससे अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले दोनों देशों के बीच विवाद के मुद्दों को सुलझाने के लिए अधिक समय मिलेगा।


दूसरा फायदा यह होगा कि ब्रिक्स देशों को ट्रंप की धमकी के बाद भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार समझौता वार्ता में अड़चन आने की आशंकाओं से निपटने के लिए भी कुछ अतिरिक्त वक्त मिल सकेगा। हालांकि, ट्रंप की नीति का एक भू-राजनीतिक पहलू भी है।


अमेरिका द्वारा जापान और दक्षिण कोरिया जैसे मित्र राष्ट्रों पर टैरिफ लगाए जाने से क्षेत्रीय गठबंधन कमजोर हो सकते हैं। इससे चीन को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका मिल सकता है, जो भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय है। इस दृष्टि से विचार करें, तो भारत की क्वाड और ब्रिक्स जैसे क्षेत्रीय मंचों पर अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति बेहद कारगर है, क्योंकि इससे वैश्विक मंच पर भारत की प्रासंगिकता बढ़ती है।


अप्रैल में पारस्परिक टैरिफ की घोषणा के बाद से अब तक का अनुभव बताता है कि एक अगस्त तक का समय तो एक समझौते के पूरा होने में भी नाकाफी होगा, ऐसे में देखने वाली बात अलबत्ता यह होगी कि इतनी कम मोहलत में दर्जनों व्यापार समझौते कैसे पूरे होंगे। फिलहाल तो यही लगता है कि समय-सीमा का विस्तार अनिश्चितता को और बढ़ाएगा, जिससे विभिन्न देश और बाजार महीनों से जूझ रहे हैं।

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