फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्मार्ट होने से डर लगता है

Wed, 29 Jul 2015 08:04 PM IST
सुधीर विद्यार्थी
विज्ञापन
विज्ञापन
साधो, खबर है कि मेरा शहर स्मार्ट होने जा रहा है। मुझे वैसे भी स्मार्ट होने से भय लगता है। मेरे एक लंगोटिया यार ने स्मार्ट फोन खरीद लिया, तब से मेरा उससे दोस्ताना टूट-सा गया है। ऐसा किसी ईर्ष्यावश के कारण नहीं हुआ है, बल्कि यह दुर्घटना स्मार्ट मित्र के साथ कदमताल न कर पाने के चलते हुई। मैं किसी स्मार्ट के साथ होता हूं, तो पिछड़ जाता हूं। गंवईपन सिर पर सवार रहता है।
विज्ञापन


स्मार्ट होने के लिए जरूरी है कि आपके पास स्मार्ट घर, स्मार्ट कार हो। आपके कपड़े और फोन स्मार्ट हों। बीवी स्मार्ट हो। अगर आप फेसबुक पर नहीं हैं, तो स्मार्ट नहीं हो सकते। आप वाट्सएप इस्तेमाल करते हैं, हेमा मालिनी के विज्ञापन वाला पानी पीते हैं, सेल्फी खींचना जानते हैं, तभी आप स्मार्ट सिटी के बाशिंदे हो सकते हैं। सुना है कि नगर निगम एक फरमान जारी कर रहा है कि जो स्मार्ट नहीं हैं, वे चौबीस घंटे के अंदर शहर छोड़ दें, अन्यथा उन्हें पुलिस बुलाकर बाहर कर दिया जाएगा। यह भी हो सकता है कि स्मार्ट होने के लिए छह महीने का मौका दिया जाए। फिर भी जो लोग स्मार्ट नहीं बनें, उनकी नागरिकता और पहचान पत्र जब्त कर लिए जाएंगे।

स्मार्ट होना समय की मांग है। इस देश के सेल्फी प्रधानमंत्री चाहते हैं कि यहां का हर नागरिक स्मार्ट हो। वह पिछड़ा सिर्फ तब ही रहे, जब उसे पिछड़े के नाम पर प्रधानमंत्री बनना हो। स्मार्ट न होने को सरकार अब संज्ञेय अपराध मानने की तैयारी कर रही है। जो स्मार्ट नहीं हो सकते, वे चुल्लू भर पानी में डूब मरें। देश के हुक्मरान हमें स्मार्ट बनाने पर आमादा हैं और हम हैं कि घोंचू बने हुए हैं। वैसे जिसके नसीब में बौड़म बनना लिखा हो, वह स्मार्ट हो भी कैसे सकता है?
विज्ञापन


समझ जाइए कि स्मार्ट होने के लिए भाग्य बार-बार दरवाजा नहीं खटखटाता। अब तो सरकार ने स्मार्ट होने वाले शहरों की सूची जारी कर दी है। जो इसमें नहीं हैं, उनके नागरिक पछता रहे हैं। लड़कियां अब शादी के लिए स्मार्ट दूल्हे के साथ स्मार्ट शहरों का भी चुनाव करेंगी।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें