ऐसा लगता है कि आज हर कोई चांद पर पहुंचना चाहता है। विगत जनवरी में एक चीनी रोबोटिक अंतरिक्ष यान चेंज-4 ने एक छोटे रोवर के साथ चांद के सुदूर किनारे पर उतरकर इतिहास रचा। भारत ने आज से अपना महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान चंद्रयान-2 की शुरुआत की है। इस्राइल से भी इसी साल एक छोटा रोबोटिक लैंडर चंद्र अभियान पर निकला था, लेकिन वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
आने वाले दशकों में इन और दूसरे देशों के भी पर्यटक चांद की सतह पर कदम रख सकते हैं। चीन हालांकि इस मामले में थोड़ा सुस्त रुख अपना रहा है, लेकिन अगले पच्चीस साल में अपने अंतरिक्ष यात्रियों को वहां उतार सकता है। यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने 2050 तक चांद पर 'मून विलेज' शुरू करने की योजना बनाई है। रूस ने भी 2030 तक चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने का लक्ष्य रखा है, हालांकि बहुतों को संदेह है कि इसकी लागत को देखते हुए रूस अपने इस अभियान से हाथ भी खींच सकता है।