सुना तो था कि हर कुत्ते के दिन आते हैं। फिर भी उस कुत्ते के भाग्य से ईर्ष्या हुई, जिसकी कई दिनों से दिल्ली पुलिस को तलाश थी। भला कितने कुत्तों का यह सौभाग्य होता है कि अखबारों और टीवी चैनलों पर उनकी खबर ही नहीं, बाकायदा तस्वीर भी आए; वह भी बार-बार! तस्वीरों में तो वह बड़ा मासूम लग रहा था, जबकि उस पर आरोप था कि उसने अपने मालिक के उकसाने पर उसकी बीवी को काटा था। लोगों को कौतूहल था कि क्या कुत्ते पर भी पुलिस मुकदमा दायर करेगी।
उधर पुलिस के सामने भी कई सवाल उठ खड़े हुए थे। पहले यह तय होना था कि उस औरत को किसी इंसान ने काटा था या कुत्ते ने। फिर यदि कुत्ते ने काटा, तो क्या उसी कुत्ते ने काटा या किसी और कुत्ते ने। और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न था कि यदि उसी ने काटा, तो क्या अपने मालिक के उकसाने से काटा या शौकिया सिर्फ मुंह का स्वाद बदलने के लिए। इसका जवाब पाने के लिए जरूरी था कि उसके दांतों का मिलान काटने के निशान से किया जाए। पर जब दान की बछिया तक के दांत गिनने का रिवाज नहीं है, तो कुत्ता तो ज्यादा ही संवेदनशील होता है। कहीं ऐसा न हो कि फोरेंसिक लैब में अपने जबड़ों में झांकने वाले पर गुस्सा होकर कुत्ता उसे भी काट खाए। जब कुत्ते की पूंछ बरसों नली में डालकर रखने से भी सीधी नहीं होती, तो फिर काटने का शौक वह आसानी से कहां छोड़ने वाला? फिर तो उसके ऊपर हत्या के प्रयास से लेकर सरकारी काम में अड़ंगा डालने तक की, न जाने कितनी धाराएं लगा दी जाएंगी। तब पता चलेगा कि स्वामिभक्ति का लाख तकाजा हो, पर मियां-बीवी के झगड़े में मुंह बंद रखना चाहिए।
उस बेचारे कुत्ते को गेहूं के साथ घुन की तरह बेकार में थाना-कचहरी के चक्कर में फंसना पड़ रहा है। बड़े आदमी तो कुछ ही साल जेल काटकर निकल आते हैं, चाहे उन्होंने गोली मारी हो या किसी को तंदूर में फूंक दिया हो। मगर जिसकी कुल आयु ही लगभग पंद्रह साल की हो, वह बेचारा एक बार अंदर गया, तो फिर कुत्ते की मौत ही मरेगा।