पाकिस्तान हर वर्ष 'राष्ट्रीय गौरव के सामूहिक संहार' की अनुमति देता है। संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, सऊदी अरब के राजकुमार या अन्य उच्चाधिकारी जब भी बलूचिस्तान, सिंध और पंजाब आते हैं, तो उन्हें सैकड़ों की तादाद में होबारा बस्टर्ड (इस प्रजाति के पक्षी को भारत में सोन चिरइया और पाकिस्तान में तिलोर कहते हैं) के संहार की अनुमति दी जाती है, जो एक लुप्तप्राय प्रजाति है। पाकिस्तान के आम लोगों के साथ ही यहां के सुप्रीम कोर्ट तक ने सवाल किया है कि अरब देशों से द्विपक्षीय संबंध बढ़ाने के लिए वहां के मेहमानों को इन्हें खाने की इजाजत देना जरूरी है या फिर इस लुप्तप्राय प्रजाति का संरक्षण? माजरा यह है कि होबारा बस्टर्ड के सेवन से यौन क्षमता बढ़ने संबंधी धारणा है।
सऊदी अरब के राजनयिक पहले ही अपनी यौन क्षमता की वजह से बदनाम हैं और अभी गुड़गांव पुलिस को वहां के एक राजनयिक के खिलाफ नेपाली महिलाओं के यौन शोषण की शिकायत तक मिली है। उम्मीद है कि मोदी सरकार इस मसले पर उचित कदम उठाएगी। इस मामले की परिणति ही तय करेगी कि राजनयिक छूट पाने वाले लोग महिलाओं के खिलाफ यौन अपराध में शामिल न हों। भारत की सिविल सोसायटी के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती है, जिसने एक चर्चित बलात्कार कांड के खिलाफ जमकर आंदोलन चलाया था।
भारतीयों ने बस्टर्ड पक्षी के शिकार को प्रतिबंधित करने के लिए बेहतर काम किया है, क्योंकि दुनिया भर में 97 हजार होबारा बस्टर्ड ही बचे हुए हैं। वर्ष 2014 में बलूचिस्तान वन एवं वन्यजीव विभाग के हवाले से प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया था कि खाड़ी देश के एक शाही परिवार के सदस्य ने बलूचिस्तान के चागी इलाके में तीन हफ्तों के शिकार के दौरान 2,100 होबारा बस्टर्ड का शिकार किया था।
इन पक्षियों को मारने का तरीका भी बेहद क्रूर है। एक प्रशिक्षित बाज इन पक्षियों को जमीन पर लाता है, जहां उसे पकड़कर मारा जाता है और फिर साफ करके पकाकर खाया जाता है। इन पक्षियों को मारने के लिए भारी बंदूकों का भी उपयोग किया जाता है। कोई सोच भी नहीं सकता कि हर साल पाकिस्तान आने वाले ये मासूम प्रवासी पक्षी वहां बड़े पैमाने पर मौजूद अरब प्रवासियों के हाथों मारे जाएंगे।
बेचारे बस्टर्ड पक्षी कभी जान भी नहीं पाएंगे कि पाकिस्तान और अरब देशों के बीच बेहतर द्विपक्षीय संबंध उनकी जिंदगी पर निर्भर है! जैसे ही पाकिस्तान में सरकारें बदलती हैं, तो बेहतरीन शिकार स्थलों पर शिकार करने वाले हाथ भी बदल जाते हैं। मसलन, यदि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी सत्ता में है, तो आसिफ अली जरदारी के संयुक्त अरब अमीरात के साथ नजदीकी रिश्ते होंगे (जहां बेनजीर भुट्टो निर्वासन में थीं) और वहां के राजकुमार को बेहतरीन शिकार स्थल उपलब्ध कराया जाएगा। यदि पीएमएल (एन) सत्ता में रहती है, तो सऊदी अरब के नेतृत्व को बेहतरीन शिकार स्थल उपलब्ध कराया जाता है, जहां नवाज शरीफ निर्वासन में थे।
इस बार जब सऊदी अरब के मेहमान को बेहतरीन शिकार स्थल उपलब्ध कराया गया, तो संयुक्त अरब अमीरात ने भारी प्रतिरोध किया। संयुक्त अरब अमीरात का यह सारा गुस्सा यौन क्षमता बढ़ाने से संबंधित था। जैसे ही नवंबर का महीना करीब आता है, चीन, मंगोलिया और कजाकिस्तान से ये पक्षी पाकिस्तान आते हैं, जहां वे प्रजनन करते हैं। पाकिस्तान के आम लोगों को इनके शिकार की अनुमति नहीं है, पर विदेश मंत्रालय अरब देश के लोगों को शिकार की अनुमति देता है।
यह दलील दी जाती है कि जिन क्षेत्रों में शिकार किया जाता है, वहां की अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए ये अरब लोग काफी धन देते हैं। वे इन गरीब रेगिस्तानी इलाकों में सड़क, स्कूल, मस्जिद और अस्पताल बनवाते हैं। बलूचिस्तान सरकार ने दावा किया है कि हर शिकार सीजन में वह करीब दो अरब रुपये कमाती है, लेकिन पाकिस्तानी लोगों का कहना है कि इस प्रांत के लोगों का कल्याण राज्य की जिम्मेदारी है, न कि विदेशियों की, जो शर्त के साथ आर्थिक सहयोग करते हैं।
हालांकि पाकिस्तान में चीजें बदल रही है, यह तब देखा गया, जब यमनियों के खिलाफ लड़ने वाले गठबंधन में शामिल होने से पाकिस्तान ने इन्कार कर दिया। फिर भी अरब देशों के साथ पाकिस्तान का पारंपरिक रिश्ता रहा है। अरब देशों के प्रति अपनी नीति बदलने के बावजूद हर पाकिस्तानी किसी हमले की स्थिति में सऊदी अरब जाने की कोशिश करेगा। यह वायदा है, जो सरकार भी करती है।
आखिरकार पाकिस्तानी न्यायपालिका के रुख में भी परिवर्तन आ रहा है। सबसे पहले खैबर पख्तुनख्वा की अदालत ने इन पक्षियों के शिकार पर पाबंदी लगाई और फिर वहां की प्रांतीय सरकार अदालत में पहुंची, ताकि संघीय सरकार शिकार के लिए लाइसेंस देने पर पाबंदी लगाए। बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट का रवैया भी बदला हुआ दिखा, जब उसने सरकार को आदेश दिया वह तत्काल होबारा बस्टर्ड के शिकार के लिए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाए। अदालत ने जंगली वनस्पतियों व जीवों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों से संबंधित संधियों का हवाला दिया, जिन पर पाकिस्तान ने दस्तखत किया है। अदालत ने कहा कि 'यह अपनी संप्रभुता के समर्पण जैसा है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय संधि और दायित्व बेचे जाने योग्य वस्तु नहीं हैं और होबारा बस्टर्ड आर्थिक लाभ का नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संरक्षण का मुद्दा है। ये पक्षी हमारी संपत्ति हैं। यह उसी तरह है, जैसे लोग अपनी आत्मा और शरीर बेचते हैं।'
बहरहाल, एक पश्चिमी पत्रकार ने इन पक्षियों का शिकार रोकने के लिए एक विलक्षण विचार सुझाया है। उन्होंने लिखा है कि 'इस वर्ष जिन लोगों को शिकार का परमिट मिला है, उनके नाम ट्विटर पर डाले जाएं तथा उनसे मित्रवत आग्रह किया जाए कि अगर वे होबारा बस्टर्ड का शिकार करना छोड़ देंगे, तो उन्हें ताउम्र वियाग्रा भेजा जाएगा!'
-लेखिका पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार हैं