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अर्थव्यवस्था: बेहतर आर्थिक संभावनाओं के बीच जी20 की कामयाबी ने विदेशी निवेशकों में जगाया भरोसा

जयंतीलाल भंडारी
Updated Mon, 25 Sep 2023 07:23 AM IST

सार

जी-20 से भारत विकासशील तथा ग्लोबल साउथ के देशों के लिए और महत्वपूर्ण हो गया है। जी-20 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति, ब्रिटेन तथा जापान के प्रधानमंत्री और सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात व अन्य कई प्रमुख देशों के राष्ट्र प्रमुखों के साथ वाणिज्य व कारोबार बढ़ाने संबंधी द्विपक्षीय वार्ताएं महत्वपूर्ण रही हैं।
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जी-20 समिट - फोटो : सोशल मीडिया।


जी-20 से भारत विकासशील तथा ग्लोबल साउथ के देशों के लिए और महत्वपूर्ण हो गया है। जी-20 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति, ब्रिटेन तथा जापान के प्रधानमंत्री और सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात व अन्य कई प्रमुख देशों के राष्ट्र प्रमुखों के साथ वाणिज्य व कारोबार बढ़ाने संबंधी द्विपक्षीय वार्ताएं महत्वपूर्ण रही हैं। इससे भारत के वैश्विक व्यापार के बढ़ने, भारत के वैश्विक आपूर्तिकर्ता देश के रूप में उभरने, भारत में विदेशी निवेश में वृद्धि होने, देश में विदेशी पर्यटकों की संख्या के बढ़ने और भारत के डिजिटल विकास का नया क्षितिज आकार लेते हुए दिखाई देगा।


अब भारत जी-20 देशों के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) विकसित करने की नई भूमिका में है। दुनिया के आठ देशों ने अपने यहां डीपीआई के विकास के लिए भारत से समझौते किए हैं। खास बात यह भी है कि जी-20 में भाग लेने भारत आए विदेशी राष्ट्र प्रमुखों और प्रतिनिधियों ने आयोजन स्थल भारत मंडपम में भारत की डिजिटल क्रांति और डिजिटल ताकत देखी है। उन्होंने डिजिटल इंडिया के लिए भारत के आधार, डीजीलॉकर, ई-संजीवनी, दीक्षा, भाषिणि, ओएनडीसी जैसे महत्वपूर्ण कदमों, कोविन, उमंग, जनधन, ई-नाम, जीएसटी, फास्ट टैग और ऐसी ही कई गेम चेंजर पहल तथा अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर देश की बदली हुई वित्तीय तस्वीर के साथ यूपीआई और भारत बिल पेमेंट के जरिये सीमा पार भी बिलों के भुगतान की अनूठी पहल देखी है। साथ ही, उन्होंने अनुभव किया है कि डिजिटल पूंजी को तेजी से बढ़ाने में भारत दुनिया में शीर्ष स्थान पर है। विश्व बैंक के मुताबिक, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रचर से देश ने केवल नौ वर्षों में वित्तीय समावेशन के वे लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, जिसमें परंपरागत तरीके से सामान्य रूप से 50 साल लग जाते।


गौरतलब है कि जी-20 शिखर सम्मेलन के इतर क्वाड के सदस्य देशों अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने यह सुनिश्चित किया कि वे आर्थिक रूप से एक-दूसरे को और मजबूती देंगे। साथ ही मौजूदा वैश्विक आपूर्ति शृंखला व्यवस्था की जगह एक दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था को मूर्त रूप देंगे। 55 देशों के प्राकृतिक संपदा संपन्न अफ्रीकी संघ को जी-20 में शामिल कराकर भारत ने वैश्विक पटल पर अपनी कूटनीति का दबदबा बढ़ाया, वहीं चीन के आर्थिक प्रभुत्व वाले अफ्रीकी संघ के देशों में भारत ने चीन का रास्ता रोकने की जोरदार पहल भी की है। अब भारत अफ्रीकी देशों में कृषि, स्वास्थ्य फार्मेसी, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा व ढांचागत विकास के क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ाएगा।


देश में विदेशी पर्यटकों की संख्या भी तेजी से बढ़ने लगेगी। विदेशी पर्यटकों की संख्या के बढ़ने का रुझान दिखाई भी देने लगा है। इस साल जनवरी से जून तक विदेशी सैलानियों की संख्या 43.80 लाख रही, जो पिछले साल की इस अवधि में 21.24 लाख विदेशी पर्यटकों की तुलना में 106 प्रतिशत ज्यादा है।


हालांकि जी-20 से हासिल हुई आर्थिक विकास की नई जोरदार संभावनाओं के बावजूद वर्ष 2047 तक देश को विकसित बनाने का लक्ष्य कठिन और चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इस हेतु विश्व बैंक की परिभाषा के अनुसार, लगातार 7.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि करनी होगी। हमें रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन की हालिया टिप्पणी पर भी ध्यान देना होगा, जिसमें उन्होंने कहा कि यद्यपि भारत के दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था के रूप में रेखांकित होना हमारे लिए गर्व की बात है, लेकिन इस समय प्रति व्यक्ति आय के मामले में दुनिया के 197 देशों में 142वें क्रम पर होना चिंता की बात है।

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