येल विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री विलियम डी. नॉर्डहॉस को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कार्बन उत्सर्जन पर टैक्स लगाने के लिए सरकारों को मनाने में चार दशक लग गए। उनके काम से ज्यादातर अर्थशास्त्री आश्वस्त हैं और अब उन्हें अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई है। लेकिन नॉर्डहॉस दुखी होकर कहते हैं, वह अपने देश की सरकार को आश्वस्त नहीं कर पाए। पुरस्कार की घोषणा के बाद उन्होंने कहा कि 'सरकार की नीतियां विज्ञान से काफी पीछे तो हैं ही, क्या किए जाने की जरूरत है, उससे भी बहुत दूर है। ऐसे में आशावादी होना मुश्किल है। ट्रंप प्रशासन की विनाशकारी नीतियों के चलते वास्तव में हम पिछड़ते जा रहे हैं।'
नॉर्डहॉस के साथ इस बार न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री पॉल एम रोमर को भी यह पुरस्कार दिया गया है, जिनका काम दर्शाता है कि सरकारी नीति तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संयुक्त राष्ट्र पैनल द्वारा बढ़ते तापमान के विनाशकारी परिणाम को कम करने के लिए सार्वजनिक नीति में बड़े बदलाव की आवश्यकता पर जोर देने के कुछ ही घंटों बाद इस पुरस्कार की घोषणा की गई थी। इसे जलवायु परिवर्तन का सामना करने वाले मजबूत कदम के समर्थकों द्वारा ट्रंप प्रशासन को झटका माना गया। गौरतलब है कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने जलवायु परिवर्तन को सीमित करने वाले वैश्विक प्रयासों से अपना हाथ खींच लिया।
रोमर, जिन्होंने समाज के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर ज्यादा आशावादी नजरिया पेश किया है, कहते हैं कि उनका काम दर्शाता है कि सरकारें तकनीकी बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने 1990 के दशक में ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाली क्लोरोफ्लोरो कार्बन गैस के उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों की सफलता पर ध्यान दिया था। वह कहते हैं, 'आज समस्या यह है कि लोग सोचते हैं कि पर्यावरण की रक्षा करना महंगा और कठिन होगा, इसलिए वे उसकी अनदेखी करना चाहते हैं और बहाना बनाते हैं कि ऐसी समस्या है ही नहीं। यदि हम इस पर अपना ध्यान केंद्रित करें, तो मनुष्य अद्भुत उपलब्धियां हासिल करने में सक्षम है।'
सतहत्तर वर्षीय नॉर्डहॉस ने 1963 में येल से ग्रेजुएट किया और 1967 में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। फिर वह अर्थशास्त्र के प्राध्यापक के रूप में येल विश्वविद्यालय लौट आए और तब से वहीं पर हैं। प्रदूषण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच 1970 के दशक में नॉर्डहॉस समेत अर्थशास्त्रियों ने कहना शुरू कर दिया कि इसका सबसे प्रभावी इलाज कर लगाना है-सरकार को पर्यावरण और जन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले प्रदूषकों को इसके लिए भुगतान करने के लिए कहना चाहिए। यह विचार अर्थशास्त्रियों के बीच व्यापक रूप से लोकप्रिय है। सोमवार को उन्होंने कहा कि 'बाजार से जुड़े समाधान का कोई विकल्प नहीं है।' फसल की बर्बादी और बाढ़ समेत जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान का आकलन करने के लिए नॉर्डहॉस ने एक आर्थिक मॉडल विकसित किया, जिसे डायनामिक इंटीग्रेटेड क्लाइमेट-इकोनोमी मॉडल कहा जाता है। उन्होंने कहा कि 'इसका उद्देश्य सचेतन रूप से यह सुझाव देना है कि हम अपने ग्रह के भविष्य के साथ जुआ खेल रहे हैं।'
नॉर्डहॉस द्वारा विकसित दृष्टिकोण उद्योग मानक बना हुआ है। जलवायु परिवर्तन के खतरे पर सोमवार को जारी संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि करती है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि व्यापक नुकसान से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पर्यावरणीय विनियमों में बदलाव के लिए त्वरित तालमेल बनाने की आवश्यकता होगी।
नोबेल समिति ने ग्रीनहाउस गैसों के कारण होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए सार्वभौमिक रूप से कार्बन टैक्स लगाने के प्रभावी उपाय सुझाने के लिए नॉर्डहॉस का जिक्र किया। उन्होंने आर्थिक विकास से संबंधित व्यापक मुद्दों पर भी काम किया है। 1996 में प्रकाशित एक शोध आलेख में उन्होंने दिखाया कि विकास का पारंपरिक माप जीवन की गुणवत्ता में सुधार को कम करता है।
बासठ वर्षीय रोमर को आर्थिक विकास के निर्धारकों पर काम करने के लिए सम्मानित किया गया। अर्थव्यवस्था के व्यापक कार्यकलापों का अध्ययन करने वाले अर्थशास्त्री मानते थे कि नवाचार की गति मानव व्यवहार से प्रभावित होती थी, पर उन्हें इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं थी। नतीजतन वे अक्सर नवाचार को स्वर्ग का अमृत मानते थे, न कि सार्वजनिक नीति का एक वैध विषय। रोमर ने शिकागो विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट और डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की।
उन्होंने कहा कि वह विकास सिद्धांत के प्रति आकर्षित थे, क्योंकि वह नवाचार की तेजी से चमत्कृत थे, जो आधुनिक युग का प्रतीक है। अपने शोध पत्रों में रोमर ने यह विचार विकसित किया कि राष्ट्र अनुसंधान में निवेश करके और बौद्धिक संपदा के स्वामित्व को नियंत्रित करने वाले कानून बनाकर नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं।
रोमर और नॉर्डहॉस के योगदानों में व्यापक समानताएं हैं। नोबेल समिति ने जोर देते हुए कहा कि दोनों विद्वानों ने अपने कामकाज में यह तर्क दिया है कि बाजार अपूर्ण है और सरकारी हस्तक्षेप परिणामों में सुधार ला सकता है। टोरंटो विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री जोशुआ गन्स ने कहा कि दोनों ने सरकारी हस्तक्षेप में बाधा कम करने में भी मदद की है-जलवायु परिवर्तन के मामले में निष्क्रियता की कीमत का अनुमान लगाकर, नवाचार के मामले में सक्रियता के लाभ का आकलन करके। गन्स लिखते हैं, दोनों ने दिखाया कि आर्थिक बलों का सचेत लेखांकन कैसे प्रगति की तरफ ले जा सकता है।
लेकिन ये दोनों विद्वान नीति-निर्माताओं को अपने विचार से सहमत कराने के लिए जूझ रहे हैं। रोमर, जो कोलोराडो के पूर्व गवर्नर के पुत्र हैं, कहते हैं, अर्थशात्री को खुले तौर पर अभियान चलाने के बजाय तथ्यों के व्यवसाय में तटस्थ व्यक्ति के रूप में प्रतिष्ठा हासिल करने की आवश्यकता होती है।
नॉर्डहॉस कहते हैं कि सिर्फ दृष्टिकोण पर्याप्त प्रतीत नहीं होता है। वह कहते हैं, 'हम विज्ञान समझते हैं, हम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझते हैं, लेकिन हम यह नहीं जानते कि कैसे राष्ट्रों को इस मुद्दे पर एक साथ लाया जाए।'