केंद्र सरकार ने तीन साल तक व्यापक मूल्यांकन और विश्लेषण के बाद जीएसटी में सरलता का प्रस्ताव तैयार किया है। सरकार ने मौजूदा चार टैक्स स्लैब पांच, बारह, अठारह और अट्ठाइस फीसदी में बदलाव करते हुए इन्हें घटाकर पांच और अठारह फीसदी स्लैब वाले दो-स्तरीय जीएसटी का प्रस्ताव किया है। जीएसटी सुधारों के तीन बड़े आधार होंगे। एक, स्ट्रक्चरल सुधार। इसमें टैक्स ढांचे को और बेहतर किया जाएगा। दो, टैक्स दरों को तर्कसंगत बनाना, ताकि जरूरी वस्तुएं सस्ती हो सकें तथा तीन, नए रजिस्ट्रेशन, रिफंड को आसान बनाना। इससे इनपुट और आउटपुट टैक्स दरें संतुलित होंगी।
जीएसटी कम होगा, तो आम व मध्यमवर्गीय लोगों को कीमतों में राहत मिलेगी। लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने के साथ बाजार में नकदी प्रवाह भी बढ़ेगा। जो छोटे उद्योग ट्रंप टैरिफ के कारण निर्यात घटने को लेकर चिंतित हैं, उन्हें घरेलू उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग से बड़ा सहारा मिलेगा। इतना ही नहीं जीएसटी घटाने से औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा और मांग व उत्पादन बढ़ने से जीडीपी में भी वृद्धि होगी। रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। वैश्विक स्तर पर भारत की इज ऑफ डूइंग रैंकिंग भी सुधरेगी। इस परिप्रेक्ष्य में वैश्विक साख निर्धारण करने वाली एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग ने 19 अगस्त को कहा कि निश्चित रूप से भारत में पिछले 5-6 वर्षों के दौरान जीएसटी सुधार बहुत सफल साबित हुए हैं। अब जीएसटी के दो स्लैब बनने से इसकी कार्यान्वयन और लेखांकन प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
दूसरी तरफ, नए आयकर कानून के तहत टैक्स कानूनों के मकड़जाल को खत्म कर एक ऐसी प्रणाली निर्मित होगी, जो सहज और आम टैक्सपेयर के लिए लाभकारी हो और इससे नए करदाता अपनी आमदनी के मुताबिक इनकम टैक्स देने के लिए तत्पर हों। खास बात यह है कि मौजूदा इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि वर्ष 1961 में मौजूदा आयकर कानून लागू किए जाने के बाद से अब तक आयकर कानून की विभिन्न कमियों को दूर करने के लगातार छोटे-बड़े कई प्रयास किए जाते रहे हैं।
स्थिति यह है कि 1961 के इनकम टैक्स कानून में वर्ष 2024 तक 4,000 से ज्यादा संशोधन व सुधार हुए हैं और इसमें पांच लाख से ज्यादा शब्द हैं। ऐसे जटिल हो चुके इनकम टैक्स कानून को सरल और व्यावहारिक बनाने के लिए नया इनकम टैक्स विधेयक 2025 एक अत्यंत सराहनीय कदम है। नए विधेयक के माध्यम से टैक्स कानून को सरल बनाते हुए उसके पेजों की संख्या को आधी कर दिया गया है और अप्रासंगिक हो चुके प्रविधानों को हटा दिया गया है। उम्मीद करें कि जीएसटी और इनकम टैक्स कानून में नए बदलावों के कार्यान्वयन पर सरकार शुरुआत से ही इस तरह ध्यान देगी कि इन कानूनों की सरलता से देश के करोड़ों लोग लाभान्वित हों और भ्रष्टाचार भी नियंत्रित हो।