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पुरबिया प्रवासियों का सपना

Mon, 19 Jun 2017 08:08 PM IST
पत्रलेखा चटर्जी
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पत्रलेखा चटर्जी
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विदेश से प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन को हासिल करने के मामले में भारत ने चीन को पछाड़ दिया है। हाल ही में जारी एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष प्रवासी भारतीयों ने अपने देश में 62.7 अरब डॉलर रेमिटेंस (धन) भेजा था। आम तौर पर प्रवासियों और उनके द्वारा भेजे जाने वाले धन की खबरें सुर्खियां बनती हैं, तो सार्वजनिक बातचीत में केरल और खाड़ी देशों का जिक्र होने लगता है। मध्य-पूर्व में रहने वाले मलयाली अब भी प्रवास एवं रेमिटेंस से संबंधित बहस में अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं, लेकिन बदलती हकीकत के प्रति भारत जागरूक हो रहा है। 
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बेहतर जीवन और आजीविका की खोज में खाड़ी जाने वाले लोगों की संख्या के मामले में केरल अब अग्रणी नहीं रहा है। जिस राज्य ने उसकी जगह हथिया ली है, वह है उत्तर प्रदेश और उसके बाद बिहार। ये दोनों हिंदी भाषी राज्य अभी सबसे ज्यादा प्रवासी खाड़ी देशों में भेजते हैं। 

खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासियों के कामकाज की परिस्थितियां सुर्खियों में रही हैं। कुछ समय पहले, लगभग 15,000 प्रवासी भारतीयों को अधर में छोड़ दिया गया, जब सऊदी अरब की एक कंपनी बंद हो गई। हाल के दिनों में अन्य खाड़ी देशों द्वारा कतर की नाकाबंदी के बाद ऐसी समस्या फिर सुर्खियों में थी। लेकिन एक बार फिर उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य उत्तरी भारत के प्रवासियों के बारे में बहुत कम सुनने को मिला, हालांकि ये राज्य बड़ी संख्या में ब्ल्यू कॉलर श्रमिक (गैर कृषि कार्यों में शारीरिक श्रम करने वाले) खाड़ी देशों में भेजते हैं।
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हिंदी भाषी राज्यों के प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन की मात्रा केरल के प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन से कम हो सकती है, लेकिन यह धन दसियों हजार गरीब परिवारों का भरण-पोषण करता है, जिनमें से ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से हैं। ज्यादातर कम कुशल या अकुशल इन प्रवासियों के साथ जो भी घटता है, उससे बहुत-सी जिंदगियां प्रभावित होती हैं। विदेश मंत्रालय खाड़ी देशों में रोजगार के लिए जाने वालों को उत्पीड़न से बचने के लिए कौशल प्रदान करने वाले कार्यक्रम पर काम कर रहा है। मंत्रालय ने पहले ही दुबई और शारजाह में भारतीय श्रमिक संसाधन केंद्र शुरू किया है। भारत में इस तरह का केंद्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में गुरुग्राम के अलावा लखनऊ समेत चार अन्य शहरों में खोला है। लेकिन अभी और भी काफी कुछ किए जाने की जरूरत है, क्योंकि उत्तर प्रदेश और अन्य उत्तर भारतीय राज्यों के श्रमिक केरल एवं अन्य दक्षिणी राज्यों के श्रमिकों के मुकाबले कम शिक्षित एवं कुशल हैं। 

यह समझना मुश्किल नहीं है कि क्यों उत्तर प्रदेश, खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार, इस तरह के बाहर जाने वाले प्रवासियों का प्रमुख केंद्र बन रहे हैं। इस क्षेत्र में खेती योग्य जमीन पर जनसंख्या घनत्व राष्ट्रीय औसत का लगभग दोगुना है-यह दुनिया की सबसे घनी मानव आबादी वाला क्षेत्र है। यही कारण है कि इस क्षेत्र से इतने ज्यादा लोग विदेश प्रवास पर जाते हैं। ज्यादा नहीं, तो एक शताब्दी से ज्यादा समय से प्रवास इस क्षेत्र के लोगों के लिए आजीविका की एक प्रमुख रणनीति रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश से ठेका अनुबंध पर लोग फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, नटाल और वेस्ट इंडीज गए थे। इस क्षेत्र के लोगों का खाड़ी देशों में आप्रवासन अपेक्षाकृत एक नई परिघटना है। प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी प्रवासी मजदूरों के आंकड़े उत्तर प्रदेश से बढ़ते आप्रवास की ओर इशारा करते हैं। ऐसे में बहुत संभव है कि अगले कुछ दशकों में यह राज्य विदेशों से भेजे जाने वाले धन पर ज्यादा आश्रित हो जाएगा। 

खाड़ी देशों सहित अधिकांश प्रवासी श्रमिकों की मांग वाले देशों में जिस तरह से प्रवास का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, वैसे में कौशल विकास और उनका प्रमाणीकरण महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। भारत में, खासकर जिन क्षेत्रों से ज्यादा प्रवासी श्रमिक विदेश जाते हैं, वहां विदेश जाने वाले प्रवासी श्रमिकों की सुविधा के लिए सराहनीय प्रयास शुरू किए जा चुके हैं।

पारंपरिक रूप से प्रवासी श्रमिकों वाले दो राज्य केरल और आंध्र प्रदेश में राज्य सरकारों द्वारा किए जाने वाले प्रयास इसके प्रमुख उदाहरण हैं। केरल में राज्य सरकार ने 1977 में एक सार्वजनिक भर्ती एजेंसी, प्रवासी विकास और रोजगार संवर्धन कंसल्टेंट्स लिमिटेड की स्थापना की। यह एजेंसी बेहतर रोजगार सेवा के जरिये विदेशी रोजगार को प्रोत्साहित करती है और भावी प्रवासी श्रमिकों को शिक्षा, वीजा संबंधी औपचारिकताओं और यात्रा नियमों की जानकारी देती है। नॉन रेजिडेंट्स केरेलाइट्स के कल्याण के लिए केरल सरकार ने 1996 में नॉन रेजिडेंट्स केरेलाइट्स अफेयर्स (नोरका) विभाग की स्थापना की है।

नोरका-रूट्स इसकी क्षेत्रीय एजेंसी है, जिसकी स्थापना 2002 में नॉन रेजिडेंट्स केरेलाइट्स और राज्य सरकार के बीच संपर्क के लिए की गई है। इसके कामकाज में विदेश प्रवास से पूर्व दिशानिर्देश कार्यक्रम, श्रमिकों की भर्ती, कौशल विकास सुविधा, प्रवासी श्रमिकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की पुष्टि और लौटकर आने वाले प्रवासियों के पुनर्वास एवं पुनर्गठन संबंधी गतिविधियां शामिल हैं। 

 आंध्र प्रदेश सरकार ने भी भर्ती एजेंसी ओवरसीज मैनपावर कंपनी आंध्र प्रदेश लिमिटेड शुरू की है, जो श्रमिकों को अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार प्रशिक्षण देता है, उनके कौशल की जांच कर प्रमाणपत्र देता है और श्रमिकों को विदेश में कामकाजी परिस्थितियों की जानकारी देने के लिए प्रस्थान पूर्व दिशानिर्देश कार्यक्रम आयोजित करती है। प्रस्थान पूर्व दिशानिर्देश कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भी आयोजित किए गए, लेकिन उत्तर प्रदेश और बिहार में इस तरह के तंत्र की मौजूदगी या अभाव के बारे में सार्वजनिक क्षेत्र में बहुत कम जानकारी है, जहां से फिलहाल सबसे ज्यादा प्रवासी श्रमिक खाड़ी देशों में जाते हैं। इसमें सुधार लाने की जरूरत है। 
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