'ड्रैकुला' पर बनी पहली फीचर फिल्म 1922 की जर्मन फिल्म 'नोस्फेरातु: ए सिंफनी ऑफ हॉरर' थी, जिसमें स्टोकर के उपन्यास से कहानी और किरदारों को लिया गया था। इसमें, काउंट ओरलॉक (जो असल में ड्रैकुला का एक नकली रूप है) चूहे जैसा, बहुत दुबला-पतला और पीला दिखता है। स्टोकर के ड्रैकुला या काउंट ओरलोक के बारे में बहुत कम बातें उसके 'प्रेमी' होने का संकेत करती हैं, हालांकि जिस तरह से वह अपने पीड़ितों पर हमला करता है और उनका पीछा करता है, उसमें एक अंतर्निहित कामुकता को तार्किक रूप से देखा जा सकता है।
ड्रैकुला को 'प्रेमी' का दर्जा परदे पर बहुत बाद में मिला। इसका सबसे पहला उदाहरण 1944 की फिल्म हाउस ऑफ फ्रेंकस्टीन में देखने को मिलता है, जिसमें रीटा (ऐनी ग्विन) शुरू में ड्रैकुला की मौजूदगी से घबरा जाती है। पर बाद में, जब ड्रैकुला उसकी तर्जनी उंगली में एक अंगूठी पहनाता है—जो जादुई रूप से उसकी उंगली में फिट बैठती है—तो उसे महसूस होता है कि अब उसे 'बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा है।' इस दृश्य के अंत में, जब वह बड़ी चाहत से उसकी आंखों में देखती है, तो वह कहता है कि अगले दिन वह उसे लेने आएगा—मानो यह सब कोई पनपता हुआ प्रेम-मिलन हो। ड्रैकुला के किरदार का विकास, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद लिंग, यौनिकता और हिंसा के बारे में आम सोच में आए बदलावों को दिखाता है। यह वह दौर था, जब लोकप्रिय संस्कृति ने धीरे-धीरे एकल परिवार की केंद्रीयता को कमजोर करना शुरू कर दिया था। जैसे-जैसे किताबों, फिल्मों और टीवी शो में वासना, बेवफाई, समलैंगिक संबंधों और तलाक जैसे विषयों को दिखाया जाने लगा, पिशाचों (वैम्पायरों) की छवियां और भी ज्यादा जटिल होती गईं। उदाहरण के लिए, 1958 की फिल्म 'ड्रैकुला' में ड्रैकुला (क्रिस्टोफर ली) एक शिकारी है, जो विवाहित औरतों के घरों में घुस जाता है। लेकिन, इसमें रोमांस की भी थोड़ी झलक है। एक खास दृश्य में, वह मीना होल्मवुड (मेलिसा स्ट्रिबलिंग) पर हमला करता है। आखिर में मीना मान जाती है।
1970 के दशक तक, पिशाचों से जुड़ी फिल्मों, कॉमिक पुस्तकों में कामुकता ज्यादा स्पष्ट विषय बन गई थी, जो मानवीय कामुकता के प्रति दृष्टिकोण में आए व्यापक सांस्कृतिक बदलावों को दर्शाती थी। 'वैम्पायरेला' जैसी कॉमिक बुक्स ने वैम्पायर को ताकत के एक अत्यधिक कामुक, स्त्री-सुलभ और मादक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि 'द वैम्पायर लवर्स' जैसी फिल्मों ने समलैंगिकता जैसे विषयों को खंगाला। काउंट ड्रैकुलाज ग्रेट लव (1973) फिल्म में ड्रैकुला कैरन नाम की लड़की के प्यार में डूब जाता है, लेकिन वह लड़की उसके प्यार को ठुकरा देती है। फिल्म के आखिर में, प्यार में डूबा हुआ यह पिशाच दुख भरे स्वर में कहता है, 'पहली बार, प्यार ने ड्रैकुला की जिंदगी का अंत कर दिया है,' और यह कहने के बाद वह अपने ही हाथों से अपने दिल में एक कील ठोक लेता है। इसके कुछ ही समय बाद, टीवी के लिए बनी एक फिल्म ‘ड्रैकुला’ में ड्रैकुला को अपनी मृत पत्नी की तलाश करते हुए दिखाया गया है। 'मरे हुए प्रेमी की तलाश' भविष्य की फिल्मों का एक मुख्य विषय बन गई। उदाहरण के लिए, फ्रांसिस फोर्ड कोपोला की फिल्म 'ब्रैम स्टोकर की ड्रैकुला' (1992) में, दर्शकों को पता चलता है कि ड्रैकुला अपनी मृत पत्नी के पुनर्जन्म की तलाश में ट्रांसिल्वेनिया छोड़कर इंग्लैंड चला जाता है। गॉथिक सोप ओपेरा ‘डार्क शैडोज’ (1966-1971) में, बार्नबास कॉलिन्स (जोनाथन फ्रिड) नाम का किरदार अपनी बहुत पहले मर चुकी प्रेमिका, जोसेट, के साथ अपने रोमांस को दोहराने की कोशिश करता है; इसके लिए वह मैगी इवांस (कैथरीन ली स्कॉट) नामक एक लड़की के जीवित शरीर को अलौकिक शक्तियों से नियंत्रित करने का प्रयास करता है, ताकि वह जोसेट की तरह व्यवहार करे। एक वैम्पायर का अपने खोए हुए प्यार के लिए तड़पना—विशेष रूप से ऐसे प्यार के लिए, जो मर चुकी हो—एक महत्वपूर्ण विकास का प्रतीक था।
1970 के दशक की कॉमिक बुक सीरीज 'द टोम्ब ऑफ ड्रैकुला' में, काउंट की एक इन्सानी पत्नी है, जिसका नाम डोमिनी है; जादुई तरीकों से, वह उसके साथ एक बच्चा भी पैदा कर पाता है। भले ही 'प्रेमी ड्रैकुला' का कॉन्सेप्ट अब काफी घिसा-पिटा-सा लगने लगा हो, लेकिन हर माहौल में ढल जाने वाला यह 'काउंट' अपनी पारंपरिक डराने वाली भूमिकाओं के लिए भी हमेशा तैयार रहता है, हाल ही में रॉबर्ट एगर्स की फिल्म 'नोस्फेरातु' (2024) में भी वह इसी रूप में नजर आया है। चाहे वह एक प्रेमी हो, एक दानव हो, या फिर दोनों ही हो—ड्रैकुला असल में 'वैम्पायर' के उस विचार का प्रतिनिधित्व करता है, जो मानवीय अनुभवों के लिए एक आईने का काम करता है। रोमांस कभी-कभी प्यार और दर्द के बीच झूलता रहता है। जुनून कभी-कभी डरावना भी हो सकता है। इसलिए, अगली बार जब आप पर्दे पर ड्रैकुला को रोमांस करते देखें, तो हैरान न हों।