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निकला न करो तुम सड़कों पर

Thu, 14 May 2015 07:25 PM IST
सहीराम
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अगर आप दिल्ली में हैं, तो सड़कों पर यों न निकला करें-पैदल। कोई भी उड़ता हुआ आ सकता है और आपको उड़ा सकता है। आजकल आसमान पर पंछी उतने नहीं उड़ते, जितने सड़कों पर लोग उड़ते और उड़ाते हैं। इसके लिए फुटपाथ पर सोना बिल्कुल जरूरी नहीं है। हो सकता है, सरकार इसीलिए अब फुटपाथ न बनाती हो। उसे लगता होगा कि सब तो गाड़ियों में ही चलते हैं, पैदल कौन चलता है! फिर फुटपाथ होंगे, तो लोग उन पर सोएंगे भी। इससे गाड़ियों की रफ्तार बाधित हो सकती है।
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दुनिया में अकेले एक दबंग खान ही तो नहीं हैं न। दुनिया दबंगों से भरी पड़ी है। कम से कम दिल्ली में तो जरूर। तो आप सड़कों पर यों न निकला करें-गाड़ी में भी। रोडरेज का डर रहता है। रोडरेज भी बीमारी, दुर्घटना और भूकंप की तरह बताकर नहीं आता। पता नहीं, बंपर टू बंपर चलते हुए किसकी गाड़ी से आपकी गाड़ी टच हो जाए और लोहे की रॉड, बेसबॉल के बल्ले वगैरह निकल आएं। और कुछ नहीं, तो हेलमेट चल सकता है, नहीं तो ईंट-पत्थर तो चल ही सकते हैं। दुनिया दबंगों से भरी पड़ी है, और दिल्ली तो जरूर ही।

अगर आप महिला हैं और दिल्ली में हैं, तो आप सड़कों पर यों न निकला करें। जरूरी नहीं है कि निर्भया कांड ही दोहराया जाए। पर यह भी हो सकता है कि कोई मनचला आपसे प्रेम प्रदर्शन ही कर दे, और ना कहने पर एसिड ही फेंक दे। कोई अपने आपको आपका प्रेमी मान बैठा हो और आपके समक्ष विवाह का प्रस्ताव ही रख दे। ना करने पर वह आपको गोली मार सकता है, चाकू मार सकता है, नहीं तो एसिड तो फेंक ही सकता है। तो अगर आप महिला हैं और दिल्ली में हैं, तो सड़कों पर यों न निकला करें। हो सकता है कि कोई ट्रैफिक वाला ही आपसे पैसे मांग ले और न देने पर खींचकर ईंट मार दे। जरूरी नहीं कि कार और बाइक तथा स्कूटर वाले ही रोडरेज का शिकार होते हों। अब तो बस के ड्राइवर भी होने लगे हैं। सो अगर आप दिल्ली में हैं, तो सड़कों पर यों न निकला करें। सावधानी हटी नहीं कि दुर्घटना घटी।
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